नई दिल्ली, 20 दिसम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बुनियादी अनुसंधान के क्षेत्र में भारत सबसे ऊंचे पायदान पर बैठे देशों में से एक है। वर्ष 2018 में भारतीय विज्ञान को तरक्की और विकास के सबसे ताकतवर उपकरणों में से एक के तौर पर, और ज्यादा पहचान मिलती दिखाई दी, खासकर उभरते हुए परिदृश्य और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था में। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नए क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मई 1971 में स्थापित किया गया विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) इस देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी गतिविधियों को आयोजित, समायोजित और प्रोत्साहित करने के लिए एक केंद्रीय विभाग की भूमिका निभाता है। वर्ष 2018 में इस विभाग के प्रमुख कार्य, पहल और उपलब्धियां इस प्रकार रहीं:
इस साल के सबसे बड़े घटनाक्रमों में एक दिसंबर के महीने में आया जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंटरडिसिप्लनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (एमएम-आईसीपीएस) पर राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत को अपनी मंजूरी दी जिसे पांच वर्षों की अवधि में 3660 करोड़ रुपये के कुल व्यय पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जाना है। ये मिशन समाज की तेजी से बढ़ी रही तकनीकी जरूरतों को संबोधित करता है और नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के लिए दुनिया के शीर्ष देशों द्वारा अपनाई जा रही रूपरेखाओं और अंतर्राष्ट्रीय चलनों को ध्यान में रखता है।
नवंबर में ग्लोबल कूलिंग पुरस्कार की शुरुआत की गई जो एक नवीन चुनौती है जिसका उद्देश्य एक ऐसे आवासीय कूलिंग उपाय के विकास को प्रेरित करना है जो आज के मानकों वाले उत्पादों की तुलना में कम से कम पांच गुना कम प्रभाव जलवायु पर डालता हो। ये प्रौद्योगिकी साल 2050 तक 100 गीगाटन के बराबर कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोक सकती है। इस दो वर्ष की प्रतियोगिता के बाद 30 लाख अमेरिकी डॉलर पुरस्कार राशि के तौर पर प्रदान किए जाएंगे। अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के हिस्से के तौर पर भारत द्वारा 29-30 नवंबर 2018 के दौरान नई दिल्ली में पहले आसियान-भारत इनोटेक शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की गई। इस इनोटेक शिखर सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भारतीय और आसियान देशों के अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों, अन्वेषकों, प्रौद्योगविदों, निजी कंपनियों और स्टार्ट-अप वगैरह के बीच नेटवर्कों का प्रदर्शन और निर्माण करना था ताकि भारत और आसियान देशों के साझेदारों के बीच साझा करने के लिए एक आसियान-भारत नवीनता और प्रौद्योगिकी डाटाबैंक के निर्माण को सुगम किया जा सके। डीएसटी सचिव की अध्यक्षता में 6 नवंबर 2018 को एक अन्तर्मंत्रालयिक / विभागीय बैठक आयोजित की गई ताकि केंद्र सरकार के विभागों और एजेंसियों में अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों में लगे अनुसंधान कर्मियों (जेआरएफ/एसआरएफ/आरए) के मेहनताने और सेवा परिस्थितियों पर दिशा-निर्देशों के संगतिकरण को लेकर चर्चा की जा सके। इस अन्तर्मंत्रालयिक समूह ने योग्यता मानदंड में कुछ बदलाव के साथ फैलोशिप में उर्ध्वगामी संशोधन की सिफारिश की।
अक्टूबर माह में भारत सरकार और उज़्बेकिस्तान गणराज्य की सरकार के बीच विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवीनता के क्षेत्र में सहयोग समझौते को पूरा किया गया। नई दिल्ली में 29-30 अक्टूबर 2018 के दौरान डीएसटी-सीआईआई प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें इटली ने साझेदार देश के तौर पर हिस्सा लिया।
वाहन प्रदूषण का मुकाबला करने के लिए सितंबर में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा नई दिल्ली में आईटीओ चौराहे और मुकरबा चौक पर 'वायु' (विंग ऑगमेंटेशन एंड प्योरिफाइंग यूनिट) का उद्घाटन किया गया। 'वायु' सार्वजनिक जगहों पर वाहनों द्वारा छोड़े गए आस-पास फैले ऐसे प्रदूषण स्तरों को कम करने में मदद करता है जिसमें प्रदूषकों की उच्च सांद्रता होती है। वायुमंडल में छोड़े गए पीएम10, पीएम2.5, कार्बन मोनोक्साइड, वीओसी और हाइड्रोकार्बन को वायु घटा सकता है। इस उपकरण की लागत 60,000 रुपये है जिसमें प्रति माह रख-रखाव की लागत 1500 रुपये आती है। सितंबर में ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, इंटेल टेक्नोलॉजीज़ और भारत-अमेरिका विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी फोरम के बीच 'द मेक टुमॉरो फॉर इनोवेशन जेनरेशन' शीर्षक वाले कार्यक्रम की पीपीपी पहल की गई। ये कार्यक्रम 14 से 17 साल की आयु वाले स्कूली बच्चों को प्रोत्साहित करता है कि खुद को मिले किट के माध्यम से वे नवीन प्रोटोटाइप बनाएं।
जुलाई में भारत सरकार और कोरिया गणराज्य के बीच भारत में 'अनुसंधान और इनोवेशन के लिए भारत-कोरिया केंद्र' (आईकेसीआरआई) स्थापित करने को लेकर एक प्रमुख भागीदारी की घोषणा की गई। ये केंद्र नवीनता व उद्यमिता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समेत दोनों देशों के बीच अनुसंधान और नवाचार में सभी सहयोगी कार्यक्रमों के व्यवस्थित संचालन और प्रबंधन के लिए एक धुरी का काम करेगा।
शरीर विज्ञान, दवा और संबद्ध क्षेत्रों के 30 युवा मेधावी भारतीय अध्येताओं ने 24 से 29 जून 2018 के दौरान जर्मनी के लिंडाऊ में हुई 68वीं नोबेल पुरस्कार विजेताओं की बैठक में हिस्सा लिया। छात्रों के इस भारतीय दल ने डीएसटी और जर्मन अनुसंधान फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से समर्थित अपनी यात्रा के दौरान 2 से 6 जुलाई 2018 को जर्मनी में विभिन्न अनुसंधान संस्थानों / विश्वविद्यालयों का दौरा किया। जून में विभाग ने 27 युवा भारतीय वैज्ञानिकों / अन्वेषकों को तीसरे ब्रिक्स वैज्ञानिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भेजा जो 25-29 जून 2018 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन ने ऊर्जा, जल और सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए आईसीटी का इस्तेमाल, इन तीन विषयों को संबोधित किया। इस सम्मेलन में ब्रिक्स युवा इनोवेटर पुरस्कार प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस सम्मेलन के दौरान 23 साल के एक भारतीय इनोवेटर को 'ब्रिक्स के सबसे होनहार इनोवेटर' का पुरस्कार दिया गया।
मई में डेनमार्क और स्वीडन में हुई मिशन इनोवेशन मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान द्विपक्षीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी नवाचार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। मई 2018 में भारत और नीदरलैंड्स के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग के 10 वर्ष पूरे होने का अवसर भी आया।
'भारत-ब्रिटेन विज्ञान एवं नवाचार नीति संवाद' अप्रैल में हुआ एक प्रमुख कार्यक्रम था जिसमें सहमति बनी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा में संभावनाओं की पहचान करने में वैश्विक चुनौतियों का सामना करने को लेकर; स्वच्छ विकास, स्मार्ट शहरीकरण, भविष्य की गतिशीलता, पर्यावरण (जमीन और समुद्र से प्लास्टिक और माइक्रो-प्लास्टिक को हटाना), जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को प्रोत्साहित करने को लेकर; और अंतर्राष्ट्रीय सौर संधि (आईएसए) में हिस्सा लेने के संबंध में आपसी सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे पहले दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने वक्तव्य दिया था कि भारत-ब्रिटेन सहयोग के उनके दृष्टिकोण के केंद्र में प्रौद्योगिकी साझेदारी है और उनकी इच्छा इसे 2021 तक 40 करोड़ पाउंड तक बढ़ाने की है।
भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मार्च में नवाचार एवं उद्यमिता महोत्सव (एफआईएनई) का उद्घाटन किया और राष्ट्रपति भवन में 'गांधीवादी युवा प्रौद्योगिकीय नवाचार पुरस्कार' प्रदान किए।
जनवरी महीने में भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इजरायल के राष्ट्रीय तकनीकी नवाचार प्राधिकरण ने पांच वर्ष की अवधि के लिए 4 करोड़ डॉलर की 'भारत-इजरायल औद्योगिकीय अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी नवाचार निधि' संयुक्त रूप से स्थापित की। ये निधि उन संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को अपना सहयोग प्रदान करेगी जिनका उद्देश्य व्यावसायीकरण की संभावना वाले नवीन प्रौद्योगिकी से संचालित उत्पादों, सेवाओं और प्रक्रियाओं को साथ में विकसित करना है। निजी उद्योगों, उद्यमों और आरएंडडी संस्थानों समेत भागीदारी निर्मित करने में संस्थागत मदद देते हुए ये निधि भारत और इजरायल के बीच तकनीकी-आर्थिक सहयोग को अवसर मुहैया करवाएगी।
वर्ष 2018 के आरंभ में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा तीन विज्ञान एवं आभियांत्रिकी अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) योजनाएं शुरू की गईं जो इस प्रकार हैं:
1. अनुसंधान उत्कृष्टता के लिए टीचर असोसिएटशिप (टीएआरई) : इस योजना का उद्देश्य राज्य विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और निजी अकादमिक संस्थानों में काम कर रहे ऐसे संकाय सदस्यों में छुपी हुई संभावना को ढूंढना है जो बहुत अच्छे से प्रशिक्षित हैं लेकिन सुविधा, धन और मार्गदर्शन के अभाव समेत अन्य कारणों से उन्हें अपने अनुसंधान का पीछा करने में कठिनाई होती है। ये योजना ऐसे संकाय सदस्यों को गतिशीलता देती है ताकि वे आईआईटी, आईआईएससी, आईआईएसईआरएस, अन्य राष्ट्रीय संस्थानों (एनआईटी, सीएसआईआर, आईसीएआर, आईसीएमआर लैब वगैरह) और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे बहुत प्रतिष्ठित सार्वजनिक संस्थानों से अपना अनुसंधान पूरा कर सकें जो उस संस्थान के पास स्थित हैं जहां संबंधित संकाय सदस्य कार्यरत है। इस योजना के अंतर्गत 500 तक टीचर असोसिएटशिप (टीए) को मदद दी जाएगी।
2. डॉक्टरल फैलोशिप के लिए विदेश यात्रा (ओवीडीएफ) : ये योजना भारतीय संस्थानों में दाखिला प्राप्त 100 पीएचडी छात्रों को अवसर प्रदान करती है कि वे अपने डॉक्टरल अनुसंधान के लिए 12 महीने की अवधि तक प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों / संस्थानों और संबंधित देश में महत्व के क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
3. एसईआरबी विशिष्ट जांचकर्ता पुरस्कार (डीआईए) : डीआईए की शुरुआत एसईआरबी/डीएसटी परियोजनाओं के ऐसे मुख्य जांचकर्ताओं की पहचान करने और पुरस्कृत करने के लिए की गई है जिन्होंने बहुत ही बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस योजना का उद्देश्य सिर्फ पूर्ण हुई परियोजनाओं के सर्वश्रेष्ठ मुख्य जांचकर्ताओं को पुरस्कार देना ही नहीं है बल्कि मौजूदा प्रमुख जांचकर्ताओं को भी प्रोत्साहित करना है ताकि वे अत्यंत अच्छा प्रदर्शन करें। डीआईए करियर में एक बार मिलने वाला ऐसा पुरस्कार है जो सिर्फ उन युवा वैज्ञानिकों के लिए तैयार किया गया है जिन्हें कोई दूसरा प्रतिष्ठित पुरस्कार या फैलोशिप नहीं मिली है।
इस साल कुछ अन्य प्रमुख पहल भी की गईं। आईआईएससी बैंगलोर में भारत की पहली सुपरक्रिटिकल ब्रैटन साइकल सीओ2 परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया गया जिसमें सौर ऊर्जा समेत विस्तृत श्रंखला वाले गर्म स्त्रोतों से चलने वाले अत्यधिक कुशल कॉम्पैक्ट बिजली संयंत्रों की राह तैयार करने की संभावना है। 'स्वच्छ, हरित और स्वस्थ राष्ट्र के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार' की केंद्रीय थीम पर देश भर में बच्चों के विज्ञान सम्मेलन आयोजित किए गए।
'अनुसंधान समझाने के लिए लेखन क्षमताओं को बढ़ाना' (एडब्ल्यूएसएआर) इस पहल की शुरुआत ने संचार विज्ञान को बड़े तौर पर प्रोत्साहन दिया। इस नई पहल का इरादा भारतीय अनुसंधान की कहानियों को जनता के बीच ऐसे प्रारूप में संप्रेषित करना और बांटना है कि एक आम आदमी को रोचक और आसान ढंग से समझ में आ जाए।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 'वैज्ञानिक अनुसंधान बुनियादी ढांचा व रखरखाव नेटवर्क' (एसआरआईएमएएन) पर एक नीति दस्तावेज मसौदा तैयार किया जा चुका है। अब साल 2019 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के शासनादेश को पूरा करने की दिशा में तीव्र गति दिखाई देने वाली है जिसमें नीतियों का निर्माण, उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान के साथ एसएंडटी के नए क्षेत्रों का प्रोत्साहन, दूसरे क्षेत्रों से जुड़ाव वाले एसएंडटी के क्षेत्रों का समन्वयन, कमज़ोर तबकों, महिलाओं, समाज के दूसरे वंचित वर्गों और अन्य के लिए एसएंडटी का प्रयोग करना शामिल है।