आदि महोत्सव, दिल्ली हाट में छह बार की महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियन मैरी कॉम सम्मानित



नई दिल्ली, 30 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड ने आज दिल्ली हाट में आयोजित आदि महोत्सव के समापन दिवस पर छह बार की महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियन मैरी कॉम का सम्मान किया। मैरी कॉम “ट्राइब्स” की ब्रांड एंबेस्डर भी हैं। आदि महोत्सव के दौरान देशभर के जनजातीय दिग्गज शिल्पकारों के विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था। इसका आयोजन जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड ने 16 से 30 नवंबर, 2018 तक किया था।

स्वागत समारोह की अध्यक्षता जनजातीय कार्य मंत्री जुआल ओराम ने की। इस अवसर पर जनजातीय कार्य राज्य मंत्री जसवंतसिंह सुमनभाई भाभोर और 20 से अधिक राज्यों से आए एक हजार से अधिक जनजातीय शिल्पकार उपस्थित थे। इन शिल्पकारों ने महोत्सव के दौरान विभिन्न कलाओं, शिल्पों और खानपान का प्रदर्शन किया था। जनजातीय शिल्पकारों और महिलाओं ने बाग, माहेश्वरी, चंदेरी, बनारसी, संबलपुरी साड़ियों सहित विभिन्न हथकरघा और शानदार दस्तकारी पेश की। यह आयोजन जनजातीय शिल्पकारों के लिए बहुत उत्साहवर्धक रहा है और 15 दिनों के दौरान 16 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।

मैरी कॉम का सम्मान करते हुए जुआल ओराम ने कहा कि मैरी कॉम भारत का गौरव हैं, जिन्होंने अभी हाल में छठवीं महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इस तरह उन्होंने विश्व में किसी भी महिला मुक्केबाज द्वारा जीते जाने वाले अधिकतम स्वर्ण पदकों का पुराना तोड़ दिया। श्री ओराम ने कहा कि मैरी कॉम का सम्मान करते हुए जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड/ट्राइब्स इंडिया को गर्व हो रहा है। वे ट्राइब्स इंडिया के पंचतंत्र वर्ग के उत्पादों की ब्रांड एंबेस्डर भी हैं, जिन्हें देशभर के जनजातीय दिग्गज शिल्पकार तैयार करते हैं। “पंच” तंत्र वर्ग के उत्पाद बेहद शानदार हैं और मैरी कॉम द्वारा प्रेरित हैं।

उल्लेखनीय है कि महोत्सव के दौरान प्रत्येक दिन साढ़े छह बजे से लेकर साढ़े आठ बजे रात तक जनजातीय संगीत और नृत्य का प्रदर्शन किया जाता था। इस दौरान 20 राज्यों के लगभग 250 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। महोत्सव के दौरान 20 राज्यों के एक हजार से अधिक जनजातीय शिल्पकारों ने अपने उत्पाद पेश किए। महोत्सव में जनजातीय पाक कला का भी प्रदर्शन किया गया। विशेष बात यह रही कि महोत्सव के दौरान सभी जनजातीय कारोबारी स्टॉलों पर क्रेडिट/डेबिट कार्डों के जरिए भुगतान की सुविधा उपलब्ध थी, जो “कैशलेस” के प्रति राष्ट्रीय आकांक्षा का प्रतीक है।

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