रेलवे पुलिस की पहल : राजधानी के स्टेशनों पर धूम्रपान पर कटेगा चालान



नई दिल्ली, 26 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

देश की राजधानी में आने वाले दिनों में रेलवे स्टेशन परिसर में धूम्रपान उत्पादों का उपभोग नहीं कर पांएगे। यदि आपने इन स्थानों पर इसका उपभोग किया तो आपका चालान कट सकता है। इसके लिए सभी स्टेशन व उसके आसपास के इलाकों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए सभी पुलिस अधिकारियेां को कोटपा (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) अधिनियम की तकनीकी जानकारी और तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के उपभोग से हेाने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी प्रशिक्षण के माध्यम से दी जा रही है। दिल्ली पुलिस रेलवे के डीसीपी दिनेश कुमार गुप्ता के निर्देश पर संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) व मैक्स इंडिया फाउंडेशन के तकनीकी सहयेाग से समस्त पुलिस अधिकारियेां को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के सभागार में रविवार 25 नवम्बर को प्रशिक्षण दिया गया। इसके तहत सात रेलवे पुलिसथानों के अधिकारियेां को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान सभी पुलिस अधिकारियेां को तंबाकू स्वयं न लेने की शपथ भी दिलाई गई।

इस दौरान दिल्ली पुलिस रेलवे की एसीपी मीरा शर्मा ने सभी पुलिस अधिकारिेयों से कहा कि कहा कि तंबाकू व अन्य धूम्रपान एक सामाजिक बुराई है, इसको अपनी दृढ़ इच्छा से छोड़ा और छुड़ाया जा सकता है। इसके लिए हम सबको मिलकर काम करना होगा। बेहतर हेागा कि सबसे पहले सभी हम स्वयं इस बुराई को छोड़ दे और जो लोग इसका पालन नही करेंगे उन पर कोटपा में चालान करें। इसके साथ ही उन्होेने कहा कि सभी रेलवे स्टेशन, रेलवे पुलिस थाने, रेलवे स्टेशन के आसपास धूम्रपान न करने के बोर्ड भी लगाए जायेंगे।

संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ) के प्रोजेक्ट मैनेजर डा• सोमिल रस्तौगी ने कहा कि ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे (गेटस 2016-2017) के अनुसार देशभर में तंबाकू उत्पादों के 15 से 24 वर्ष तक के 12.4 प्रतिशत युवा इसके उपयोगकर्ता है। दिल्ली में 5 में से एक पुरुष धूम्रपान करता है। इससे पता चलता है कि दिल्ली में धूम्रपान के रुप में तंबाकू का प्रयोग ज्यादा प्रचलित है, जबकि पूरे देश में चबाने वाले तंबाकू का प्रयोग बहुतायत में होता है। पिछले सात वर्षों में यहाँ पर तंबाकू शुरु करने की औसत आयु कम हो गई हो गई है।

दिल्ली में 25 लाख (17.8 प्रतिशत) लोग किसी न किसी रुप में तंबाकू उत्पादों का प्रयोग करतें है वंही देश में 12.6 प्रतिशत विद्यार्थी किसी न किसी रूप में तंबाकू उत्पादों का उपयोग कर रहे है। दिल्ली में प्रतिदिन 81 बच्चे इसकी शुरुआत करतें है वहीं देश में 5500 बच्चे हर दिन तंबाकू सेवन की शुरुआत करते हैं और वयस्क होने की आयु से पहले ही तम्बाकू के आदी हो जाते हैं। इसी कारण दिल्ली में प्रतिवर्ष 19 हजार लोग अपनी जान गंवा देते है। दिल्ली में ही 28 प्रतिशत व्यस्क सार्वजनिक स्थानों पर पैसिव स्मोकिंग का भी शिकार होते है। इसीलिए यह आवश्यक है कि हम बच्चों को तम्बाकू सेवन की पहल करने से ही रोके।

पुलिस अधिकारियों को वायॅस आॅफ टोबेको विक्टिमस (वीओटीवी) के पैटर्न व मैक्स अस्प्ताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा• सैारभ गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में अस्पतालों में कैंसर के जो रोगी बढ़ रहे है, इन दिनों अस्पतालों में जो इससे पीड़ित आते है उनमें पहले की अपेक्षा कम उम्र के लोग आ रहे है। इसलिए यह हम सभी के लिए चिंता का विषय है। तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों में निकोटिन होता है जो कि हेरोइन से भी अधिक खतरनाक होता है। इनमें केवल 5 प्रतिशत से कम लोग ही निकोटिन को छोड़ पाते है। इसलिए हम सभी को मिलकर इसके लिए सकारात्मक ढंग से काम करना होगा। इसलिए पुलिस अधिकारियों का भी दायित्व बनता है कि वे इसे रोकने के लिए सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा 2003) का पूरी तरह से अनुपालना करावें जिससे कि बच्चों व युवाओं को इससे बचाया जा सके।

उन्होने कहा, सभी तरह के 50 प्रतिशत कैंसर की बीमारी और 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर का कारण तंबाकू और इसके उत्पादों का सेवन है। यदि तंबाकू समाज से समाप्त हो जाए, तो हम सभी प्रकार के 50 प्रतिशत कैंसर को रोक सकते हैं। दिल्ली में लगभग 11 प्रतिशत आबादी धूम्रपान करती है। इससे वैसे भी लोगों का स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो जाता है जो धूम्रपान या तम्बाकू उत्पादों का सेवन नहीं करते। इस दौरान कैंसर पैसेंट ने सभी अधिकारियों को बताया कि किस प्रकार से उन्होंने इस प्रकार के उत्पादों का सेवन किया। इससे जो कैंसर हुआ उसके बाद परिवार व समाज में उनकी क्या स्थिति हो गई इस पर विस्तार से बताया। इस दौरान नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुदीन, आनंद विहार, सब्जी मंडी, सराय रोहिल्ला, दिल्ली कैंट रेलवे पुलिस के अधिकारी उपस्थित थे।

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