नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ गुरू नानक की शिक्षा से प्रेरित सिख समाज की मानव सेवा अनुकरणीय – उपराष्ट्रपति
भारत के 50 प्रतिष्ठित सिख नागरिकों के जीवन वृत्त के संकलन ‘प्रोमिनेंट सिख्स ऑफ इंडिया’ के विमोचन के अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने सिख मत में निहित नि:स्वार्थ मानवसेवा की भावना को वृहत्तर समाज के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि सिख समाज ने न केवल देश और विश्व के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है बल्कि सभी भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता की सेवा की है। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने विश्व के विभिन्न भागों में सिखों द्वारा की जा रही मानवसेवा तथा विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरू नानक देव के उपदेशों में ‘केयर एंड शेयर’ की मूल भारतीय परंपरा निहित है। सिख समुदाय की वीरता की परंपरा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इतिहास वीर सिखों के देशप्रेम और देशभक्ति का साक्षी है। जब-जब देश को आवश्यकता पड़ी सिखों ने अपना सर्वस्व लगा कर देश की रक्षा की है।
इस अवसर पर युवा प्रतिभा पलायन की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि युवा पाठक इन प्रतिष्ठित विभूतियों के जीवन से प्रेरणा लेकर, देश में ही रह कर राष्ट्र-उत्कर्ष के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य करेंगे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की आबादी के 65% युवा, देश में परिवर्तन के प्रवर्तक बन सकते हैं। इसके लिए युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा और प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों को जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए।
पुस्तक में डा• प्रभलीन सिंह ने डा• मनमोहन सिंह, हरदीप सिंह पुरी, एस•एस• अहलुवालिया, मिल्खा सिंह, बिशन सिंह बेदी जैसे 50 प्रख्यात सिख नागरिकों के जीवन वृत्त का संकलन किया है। पुस्तक विमोचन के अवसर पर सिख समुदाय के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
॥■॥ सिखों के पराक्रम, प्रतिबद्धता और मानवता के प्रति उनके योगदान को सलाम करता हूं : उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने कहा है कि वे सिख समुदाय के पराक्रम, प्रतिबद्धता और मानवता के प्रति उनकी सेवाओं को सलाम करते हैं। अविश्वास, पूर्वाग्रह और असहिष्णुता से भरे मौजूदा समय में ये गुण और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
श्री नायडू ने आज नई दिल्ली में ‘प्रोमिनेंट सिख्स ऑफ इंडिया’ पुस्तक का विमोचन करने के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस पुस्तक में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 50 जाने-माने सिखों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक सिख धर्म के प्रवर्तक श्री गुरूनानक देव जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। प्रभलीन सिंह द्वारा लिखी गई यह पुस्तक पंजाब विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित की गई है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुरूनानक जी ने जाति, धर्म और समुदाय में भेदभाव किए बिना निर्धनतम लोगों की सेवा कर देश के लिए बड़ा योगदान किया। उन्होंने एक ऐसे समाज की नींव रखी जिसका मुख्य कर्तव्य लोगों की सेवा और राष्ट्र निर्माण में योगदान करना है। उन्होंने कहा कि जब भी जरूरत पड़ी सिख हमेशा देश रक्षा के लिए आगे आए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था ज्यादा तेज गति से प्रगति कर रही है। उन्होंने प्रगति के रास्ते में आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट प्रयास का आह्वान किया। श्री नायडू ने कहा कि हमें चुनौतियों को अवसरों में बदलना होगा और प्रगति की रफ्तार बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की 65 प्रतिशत युवा आबादी बदलाव का सशक्त माध्यम बनते हुए देश को नई उंचाइयों पर ले जाने का काम कर सकती है।
श्री नायडू ने कहा कि युवाओं को इतिहास में अपनी छाप छोड़ने वाले महान नेताओं के जीवन और उपलब्धियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। यह हमारा कर्तव्य बनता है कि हम युवाओं को राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जुड़ने और प्रगति में योगदान के लिए प्रेरित करें।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं में रोजगारपरक कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस तरह युवाओं को उनकी ताकत का एहसास कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करते हैं और उन्हें देश में सुधार प्रक्रिया का बेहतर उपयोग करते हुए विकास प्रक्रिया में भागीदार बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा ‘हमारे युवाओं को ऐसी दिशा तय करनी चाहिए जहां वे नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बन सकें।