नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग तथा नागर विमानन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा है कि कृषि क्षेत्र की कमियों को तत्काल दूर करने की आवश्यकता है, क्योंकि भारत की अधिकतर आबादी अभी भी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि तीन प्रमुख चुनौतियों – मिट्टी की सेहत, पुन: स्थापित करने, जल के अधिकतम उपयोग तथा जलवायु परिवर्तन-का सामना कर रही है। सुरेश प्रभु आज नई दिल्ली में भारतीय कृषि वैज्ञानिक, अंतर्राष्ट्रीय प्रशासक और भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ• एम•एस• स्वामीनाथन के सम्मान समारोह में बोल रहे थे।
वाणिज्य मंत्री ने देश में अनाजों का उत्पादन बढ़ाने में डॉ• स्वामीनाथन के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि हरित क्रांति के परिणामस्वरूप भारत लगभग 15 वर्षों में खाद्यान्न के मामले में आत्म निर्भर हो गया। उन्होंने कहा कि भारत आज 600 एमटी अनाज का उत्पादन करता है और अधिक अनाज के निर्यात की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय कृषि निर्यात नीति तैयार कर चुका है, ताकि 2022 तक किसानों की आय बढ़ायी जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना, परम्परागत कृषि विकास योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और ई-नेम जैसी लाई गई योजनाएं कृषि को लाभकारी बनाएंगी।
आज एक समारोह में उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने डॉ• एम•एस• स्वामीनाथन को प्रथम विश्व कृषि पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर केरल के राज्यपाल न्यायमूर्ति पी• सतसिवम, हरियाणा के कृषि मंत्री ओ•पी• धनकण तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ• त्रिलोचन महापात्र भी उपस्थित थे।