विशेष : खबरों का समूह



नई दिल्ली, 07 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ भारत और फ्रांस ने ‘मोबिलाइज योर सिटी’ (एमवाईसी) कार्यक्रम क्रियान्‍वयन समझौता पर हस्‍ताक्षर किये

भारत और फ्रांस ने अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यक्रम ‘मोबिलाइज योर सिटी (एमवाईसी)’ को लागू करने संबंधी समझौते पर हस्‍ताक्षर किये है। समझौते पर हस्‍ताक्षर आवास तथा शहरी कार्य राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी और भारत में फ्रांस के राजदूत एलेक्‍जेंडर जिग्‍लेर की उपस्थिति में किये गये। समझौते पर भारत की ओर से ओएसडी तथा आवास तथा शहरी कार्य मंत्रालय के पदेन संयुक्‍त सचिव मुकुन्‍द कुमार सिन्‍हा और एएफडी की ओर से क्षेत्रीय निदेशक एजेंसी फ्रेंकेस डी-डेवल्‍पमेंट (एएफडी) निकोल्‍स फोर्निज ने हस्‍ताक्षर किये।

मोबिलाइज योर सिटी (एमवाईसी) एक अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यक्रम का हिस्‍सा है, जो फ्रांस और जर्मनी की सरकारों द्वारा समर्थित है। इसे दिसम्‍बर, 2015 में 21वीं कांफ्रेंस ऑफ पार्टिज (सीओपी 21)) में लांच किया गया। 2015 में एएफडी के प्रस्‍ताव के आधार पर यूरोपीय संघ ने भारत में मोबिलाइज योर सिटी कार्यक्रम में निवेश और तकनीकी सहायता के लिए 3.5 मिलियन यूरो की राशि देने पर सहमति व्‍यक्‍त की है।

एमवाईसी का उद्देश्‍य तीन पायलट शहर-नागपुर, कोच्चि तथा अहमदाबाद में शहरी परिवहन से संबंधित ग्रीन हाऊस गैस (जीएचजी) उत्‍सर्जन कम करने में समर्थन देना और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सतत परिवहन नीति में सुधार के लिए भारत को मदद देना है।

तकनीकी सहायता गतिविधियों से कार्यक्रम के अंतर्गत चुने गये तीन पायलट शहरों के साथ-साथ आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भी लाभ मिलेगा। प्रस्‍तावित सहायता के प्रमुख घटक इस प्रकार हैं :-

1. टिकाऊ शहरी परिवहन परियोजनाओं के नियोजन और क्रियान्‍वयन को समर्थन देना।

2. शहरी आवाजाही के नियमन संचालन और नियोजन के लिए संस्‍थागत क्षमता को मजबूत बनाने में समर्थन।

3. श्रेष्‍ठ व्‍यवहारों के बारे में देश के अन्‍य शहरों के साथ विचारों का आदान-प्रदान।

परियोजना गतिविधियों के ब्‍यौरे एएफडी द्वारा आवास तथा शहरी कार्य मंत्रालय और तीन सहयोगी शहरों की सलाह से तैयार किया जाएगा। इसमें स्‍मार्ट सिटी के लिए स्‍पेशल परपस व्‍हीकल (एसपीवी), नगर महापालिकाएं और परिवहन प्राधिकरण तथा परिवहन संबंधी एसपीवी जैसे संस्‍थान शामिल हैं।


॥■॥ इंडसफूड-II, 2019 में 600 वैश्विक खरीददार भाग लेंगे

भारतीय स्रोतों से खाद्य और पेय जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्‍य से ढाका स्थित भारत-बांग्‍लादेश चैम्‍बर ऑफ कॉमर्स (आईबीसीसीआई) इंडसफूड-II, 2019 में खाद्य और पेय क्षेत्र के खरीददारों के विशाल समूह के साथ भाग लेगा। भारत व्‍यापार संवर्धन परिषद (टीपीसीआई) के अध्‍यक्ष अशोक सेठी के साथ परिचर्चा के पश्‍चात आईबीसीसीआई के अध्‍यक्ष तथा बांग्‍लादेश व्‍यापार और उद्योग परिसंघ के पूर्व अध्‍यक्ष अब्‍दुल मतलुब अहमद ने ढाका के मोहाखली स्थित नितोलभवन में यह घोषणा की।

टीपीसीआई सार्क देशों से अधिक से अधिक खरीददारों को आकर्षित करने के लिए कार्य कर रहा है ताकि उन्‍हें भारत से अपनी खाद्य व पेय जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल सके। खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) तथा रूस परिसंघ के स्‍वतंत्र देश (सीआईएस) के कुछ बड़े खरीददारों ने इंडसफूड-II में शामिल होने की सहमति दी है। इन बड़े खरीददारों में सुपर मार्केट चेन के खरीददार भी शामिल हैं।

बांग्‍लादेश द्वारा भारत से खरीदी जाने वाली कुछ प्रमुख वस्‍तुएं हैं :- फल, मसाले, कृषि उत्‍पाद, सूखे फल, मिठाइयां तथा सरसों व सोया तेल। बांग्‍लादेश पहले से ही पूर्वोत्तर राज्‍यों के साथ व्‍यापार कर रहा है। इंडसफूड-II के तहत बांग्‍लादेश के खरीददारों को पूर्वोत्तर राज्‍यों के नए निर्यातकों से मुलाकात होने की उम्‍मीद है। इनमें पूर्वोत्तर राज्‍यों के बागवानी विभाग भी शामिल है।

टीपीसीआई को आशा है कि दिल्‍ली (एनसीआर) के ग्रेटर नोएडा में 14-15 जनवरी, 2019 को आयोजित होने वाले विश्‍व खाद्य सुपर मार्केट इंडसफूड-II में 50 देशों के 600 वैश्विक खरीददार और 350 से ज्‍यादा भारतीय निर्यातक व उत्‍पादक भाग लेंगे।

2018 में आयोजित इंडसफूड-I में 43 देशों के अग्रणी आयातकों तथा 320 भारतीय निर्यातकों ने भाग लिया था। अनुमान है कि इस दौरान 650 मिलियन डॉलर का व्‍यापार हुआ था। अंतर्राष्‍ट्रीय क्रेताओं तथा खाद्य व पेय उद्योग की 12 श्रेणियों से संबंधित भारतीय विक्रेताओं को बी2बी संवाद का अनूठा अवसर प्राप्‍त हुआ था।


॥■॥ एचयूआरएल ने एफसीआईएल की गोरखपुर और सिंदरी इकाइयों और एचएफसीएल की बरौनी इकाई को फिर से चालू करने के लिए भूमि के पट्टे से जुड़े और रियायत संबंधी समझौते किए

गोरखपुर, सिंदरी और बरौनी स्थित उर्वरक परियोजनाओं को फिर से चालू करने के लिए एनटीपीसी, आईओसीएल, सीआईएल और एफसीआईएल / एचएफसीएल की संयुक्‍त उद्यम कंपनी हिंदुस्‍तान उर्वरक और रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने भारतीय उर्वरक निगम लिमिटेड (एफसीआईएल) और हिंदुस्‍तान उर्वरक लिमिटेड (एचएफसीएल) के साथ भूमि के पट्टे से जुड़े और रियायत संबंधी समझौते किए हैं।

एचयूआरएल द्वारा इन तीन स्‍थानों पर उर्वरक परियाजनाएं स्‍थापित करने के लिए केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 09 अगस्‍त, 2018 को भूमि के पट्टे के संबंध में मंजूरी दे दी थी, जिसके अनुसार समझौतों पर हस्‍ताक्षर किए गए थे और एफसीआईएल/एचएफसीएल द्वारा 55 वर्ष की अवधि के लिए एचयूआरएल को जमीन पट्टे पर दी जाएगी।

एफसीआईएल की गोरखपुर और सिंदरी इकाइयों और एचएफसीएल की बरौनी इकाई के फिर से चालू होने से उर्वरक क्षेत्र में पर्याप्‍त निवेश सुनिश्चित हो सकेगा। इससे नौकरियों के अवसर पैदा होंगे और देश के पूर्वी क्षेत्र/राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में तेजी आएगी। उर्वरक इकाइयों के फिर से चालू होने से यूरिया का स्‍वेदश में उत्‍पादन बढ़ेगा जिससे यूरिया में आत्‍मनिर्भरता बढ़ेंगी। सभी तीनों नए संयत्रों को चालू करने के लिए काम चल रहा है और इनके 2021 के आरंभ में चालू होने की उम्‍मीद है।

दस्‍तावेजों में हस्‍ताक्षर की प्रक्रिया उर्वरक सचिव भारती शिवा स्‍वामी सीहाग विभाग और एचयूआरएल, एफसीआईएल, एचएफसीएल तथा पीडीआईएल के वरिष्‍ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी हुई।


॥■॥ मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डॉ• सत्‍य पाल सिंह ने मेन्‍डोजा, अर्जेंटीना में जी-20 शिक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया

मानव संसाधन विकास राज्‍य मंत्री डॉ• सत्‍य पाल सिंह ने 05 और 06 सितम्‍बर, 2018 को मेन्‍डोजा, अर्जेंटीना में आयोजित जी-20 शिक्षा मंत्रियों की और संयुक्‍त मंत्रिस्‍तरीय बैठक में भाग लेने के लिए एक उच्‍चस्‍तरीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्‍व किया। जी-20 के इतिहास में शिक्षा मंत्रियों की यह पहली बैठक थी।

शिक्षा मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन के अवसर पर डॉ• सत्‍य पाल सिंह ने जी-20 शिखर सम्‍मेलन में पहली बार शिक्षा मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने के लिए अर्जेंटीना की सराहना की और उसे धन्‍यवाद दिया। उन्‍होंने कहा कि किसी भी समाज और देश की तरक्‍की के लिए शिक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अत: वैश्विक एजेंडा के केन्‍द्र में शिक्षा को रखना सर्वाधिक उपयुक्‍त है।

डॉ• सिंह ने कहा कि प्राचीन काल से भारत सभ्‍यता और संस्‍कृति का उद्गम स्‍थल रहा है। आधुनिक समय में भारत ने अपने प्राचीन विवेक को भूले बिना शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से तरक्‍की की है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने शिक्षा को अत्‍यधिक महत्‍व दिया है और उनकी पहल के तहत भारत ने अपने विकास की रणनीति तैयार की है जिसमें सुलभता, समानता, गुणवत्‍ता, वहनीयता, जवाबदेही और नियोजन योग्‍य होने की संभावना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा ‘बच्‍चों पर केन्द्रित’ होनी चाहिए ताकि बच्‍चों का सर्वांगीण विकास हो सके और वे सबसे पहले अच्‍छे इंसान तथा बाद में वैश्विक नागरिक बन सकें। इस दर्शन शास्‍त्र को कार्य में बदलने के लिए भारत नई शिक्षा नीति तैयार कर रहा है।

उन्‍होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों में से एक है जहां 1.53 मिलियन स्‍कूल, 864 विश्‍वविद्यालय हैं और 300 मिलियन से अधिक छात्रों के नाम दर्ज हैं। इतनी बड़ी शिक्षा प्रणाली होने के बावजूद भारत में अभी भी शिक्षा की सुलभता का और विस्‍तार करने की आवश्‍यकता है। डॉ• सिंह ने कहा कि इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए पिछले 4 वर्षों में काफी काम किया गया है। उन्‍होंने मोदी सरकार की अनेक डिजि‍टल पहलों को उजागर किया जिसमें भारत का अपना एमओओसी मंच स्‍वयं शामिल है जो बड़ी संख्‍या में छात्रों की किसी भी समय कहीं भी अध्‍ययन के लिए प्रोत्‍साहित कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में 1.3 मिलियन विभागों के लिए ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स कराने के लिए 75 विशेष क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय संसाधन केन्‍द्रों की‍ स्‍थापना कर अध्‍यापकों के प्रशिक्षणों पर विशेष जोर दिया गया है।

डॉ• सिंह ने उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के नवोन्‍मेष सूचकांक रैकिंग की विभिन्‍न पहलों, सरकार के सामने मौजूद समस्‍याओं का समाधान निकालने के लिए साफ्टवेयर और हार्डवेयर में स्‍मार्ट इंडिया हैकाथन, युवा स्‍नातक छात्रों द्वारा उद्योग और शिक्षा, डिजाइन सोच और नवोन्‍मेष को बढ़ावा देने के लिए स्‍कूलों और उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के अनुसंधान पार्कों में अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाओं और अंर्तराष्‍ट्रीय सहयोग से संयुक्‍त अनुसंधान परियोजनाओं से एकत्र जनसमूह को अवगत कराया।

उन्‍होंने कहा हमारा मानना है कि शिक्षा प्रणाली न केवल शिक्षा प्रदान करे बल्कि समुदाय की जरूरतों को प्रत्‍यक्ष रूप से पूरा करे। इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए सरकार ने उन्‍नत भारत अभियान की शुरूआत की है जिसके अंतर्गत उच्‍च शिक्षण संस्‍थान नजदीकी गांवों को गोद लिया जा सकता है और उनकी समस्‍याओं का टेक्‍नोलोजी संबंधी समाधान प्रदान कर उनकी मदद की जा सकती है।

डॉ• सिंह ने कहा कि भारत दुनिया की एक बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अपनी भूमिका और जिम्‍मेदारियों को हम पूरी तरह समझते हैं। उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि भारत जी-20 शिक्षा मंत्रियों की बैठक के एजेंडा को पूरा समर्थन देगा।

भारत की सक्रिय सहायता से जी-20 शिक्षा मंत्रियों के घोषणापत्र 2018 को अंतिम रूप दे दिया गया।

दूसरे दिन डॉ• सत्‍य पाल सिंह ने संयुक्‍त मंत्रिस्‍तरीय बैठक को संबोधित किया जिसमें सदस्‍य देशों के शिक्षा और श्रम तथा रोजगार मंत्री शामिल थे। उन्‍होंने कहा कि भारत आबादी की दृष्टि से सुखद स्थिति में है क्‍योंकि इसकी 52% जनसंख्‍या 25 वर्ष से कम उम्र की है। हालांकि यह अनोखी तरह की सुखद स्थिति है, साथ ही इसने देश के विकास और प्रगति की दिशा में इसका लाभकारी तरीके से इस्‍तेमाल करने की चुनौती खड़ी की है। इस हकीकत को समझते हुए प्रधानमंत्री ने 2015 में स्किल इंडिया मिशन की शुरूआत की ताकि 2022 तक 400 मिलियन युवाओं को कौशल प्रदान किया जा सके। बड़े पैमाने पर व्‍यावसायिक शिक्षा दी जा रही है। उन्‍होंने कहा कि नेशनल स्किल्‍स क्‍वा‍लीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्‍यूएफ) की शुरूआत की गई है जिसके अंतर्गत अध्‍ययनकर्ता औपचारिक, गैर-औपचारिक अथवा अनौपचारिक अध्‍ययन के जरिए किसी भी स्‍तर पर आवश्‍यक क्षमता के लिए प्रमाण पत्र प्राप्‍त कर सकता है।

डॉ• सिंह ने कहा कि सहयोगपूर्ण रूपरेखा तैयार करने के लिए जी-20 सबसे उपयुक्‍त मंच है जहां विभिन्‍न देशों के साथ एक-दूसरे के कौशल मानकों को साझा किया जा सकता है।

उन्‍होंने भारत की उपलब्धियों, चिंताओं और भविष्‍य की योजनाओं को दर्शाने का अवसर प्रदान करने के लिए अर्जेंटीना सरकार और जी-20 समूह को एक बार फिर धन्‍यवाद दिया। बैठक की समाप्ति पर जी-20 शिक्षा और श्रम तथा रोजगार मंत्रियों का संयुक्‍त घोषणा पत्र 2018 मेंडोजा जारी किया गया।

शिक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान डॉ• सिंह ने नौ देशों के शिक्षा मंत्रियों के साथ सफल बातचीत की जिसमें इटली के शिक्षा मंत्री लारेंजो फिओरामोंती, जापान के योशीमासा हसामी, जर्मनी के प्रोफेसर थॉमस रशेल, चीन के डॉ• डीयू चानयुवान, रूस के पवेल जैनकोविच, ब्रिटेन के थियोडोर एग्‍न्‍यू, अमेरिका की बेटसी दावोस, सउदी अरब के अहमद अल ईसा, कनाडा की टीना ब्‍यूड्री मेलर और विश्‍व बैंक के वरिष्‍ठ निदेशक जेमी सावेद्रा शामिल थे।

डॉ• सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में भारत की प्रगति की जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि हालांकि भारत के पास पेशकश के लिए बहुत कुछ है, अपने शिक्षा क्षेत्र को अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए वह अन्‍य देशों से सीखना चाहता है। उन्होंने अंर्तराष्‍ट्रीय सहयोग के लिए भारत की हाल में की गई पहलों से सदस्‍य देशों को अवगत कराया। उन्‍होंने भारत में अध्‍ययन की विशेषताओं, ज्ञान (ग्‍लोबल इनीशियेटिव फॉर एकेडेमिक कोलेबरेशन) और स्‍पार्क (स्‍कीम फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडेमिक एंड रिसर्च कोलेबरेशन) पर प्रकाश डाला। शिक्षा मंत्रियों ने इन सभी योजनाओं में काफी दिलचस्‍पी दिखाई और भारत को पूर्ण सहयोग देने का आश्‍वासन दिया। इटली, चीन, जापान और अमेरिका भारत के साथ एक समझौता ज्ञापन पर सहमत हो गए। यह फैसला लिया गया कि भविष्‍य में सहयोग के लिए एक रोड मैप तैयार करने के उद्देश्‍य से आगे बातचीत की जाए। डॉ• सत्‍यपाल सिंह ने आश्‍वासन दिया कि भारत द्विपक्षीय सहयोग के लिए उनके प्रयासों को पूरा समर्थन प्रदान करेगा।

दोनों बैठकों में सदस्‍य देशों के शिक्षा और श्रम तथा रोजगार मंत्रियों के साथ-साथ विश्‍व बैंक, यूनेस्‍को जैसे अंर्तराष्‍ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।


॥■॥ जेपी नड्डा केरल गये, राहत और बचाव उपायों की समीक्षा की

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री जेपी नड्डा ने केरल में राहत और बचाव कार्यो की समीक्षा की। केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के साथ स्‍वास्‍थ्‍य सचिव प्रीति सूदन तथा स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अन्‍य अधिकारी थे। केन्द्रीय मंत्री ने केरल की स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री केके शैलजा तथा राज्‍य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने दुर्भाग्‍य से लोगों के मरने पर दुख व्‍यक्‍त किया और बाढ़ के कारण जानमाल के नुकसान पर चिंता व्‍यक्‍त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व और मार्गदर्शन में केरल में बाढ़ राहत के लिए सभी संभव उपाय किये जा रहे हैं और प्रधानमंत्री स्‍वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केरल में बाढ़ के कारण उत्‍पन्‍न सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है।

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री चालापुड़ी तालुका अस्‍पताल भी गये और वहां मरीजों से बातचीत की। इसके बाद जेपी नड्डा वी.आर.पुरम तथा मुलासेरी के राहत शिविरों में गये और राज्‍य को सभी समर्थन और सहयोग देने का आश्‍वासन दिया।

स्थिति से निपटने के लिए अल्‍प सूचना पर प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती के लिए 50 मेडिकल डॉक्‍टर तैयार रखे गये हैं। जन स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ, माइक्रोबायोलॉजिस्‍ट तथा इन्‍टोमोलॉजिस्‍ट वाले 12 जन स्‍वास्‍थ्‍य दल तैयार हैं। तत्‍काल वितरण के लिए 48 आवश्‍यक आपात दवायें तैयार रखी गई है।

राज्‍य सरकार के अनुरोध पर 48 आवश्‍यक आपात दवाओं की पहली खेप भारतीय वायु सेना द्वारा पहुंचाई गई। इस खेप में लगभग 73 एमटी दवाइयां हैं। इनमें एक करोड़ क्‍लोरिन टैबलेट्स हैं और इसके अतिरिक्‍त 1.25 करोड़ क्‍लोरिन टैबलेट (कुल 2.25 करोड़) हैं। राज्‍य को 20 एमटी ब्‍लीचिंग पाउडर उपलब्‍ध कराया गया है और 60 एमटी और ब्‍लीचिंग पाउडर (कुल 80 एमटी) प्रदान किया गया है। राज्‍य से 4 लाख सेनेटरी नैपकिन्‍स सप्‍लाई का अनुरोध किया गया, जिसे त्रिवेन्‍द्रम में प्रदान किया गया। कीटनाशक, मच्‍छर नाशक और फोगिंग मशीनें राज्‍य को प्रदान की गई। बाद में 40 और फोगिंग मशीनें दी गई।

आपात परिस्थितियों के नियमों को लचीला बनाया गया और राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (एनएचएम) के माध्‍यम से उनके अनुरोध पर 18.71 करोड़ रुपये की अतिरिक्‍त राशि प्रदान करने की स्‍वीकृति दी गई। आगे के अनुरोध पर गैर-संक्रमणकारी बीमारियों में काम आने वाली दवाओं सहित 48 आवश्‍यक दवायें राज्‍य को प्रदान की गई। अधिकतर दवायें 120 एमटी खेप में भेजी गई। लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी बढ़ने के कारण केरल को डॉक्‍सीसाइक्‍लीन के 18,00,000 कैप्‍सूल दिये गये हैं, जो प्रोफिलेक्सिस तथा लेप्टोस्पायरोसिस के इलाज में काम आते है।

त्‍वरित मनोवैज्ञानिक-सामाजिक मूल्‍यांकन तथा समुदाय आधारित मनोवैज्ञानिक-सामाजिक देखभाल के लिए नीमहान्‍स की ओर से 40 सदस्‍यों की मनोवैज्ञानिक-सामाजिक टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों ने समुदाय आधारित मनोवैज्ञानिक-सामाजिक देखभाल के लिए 5353 स्‍वयंसेवियों को संवेदी बनाया हैं, आपदा में बचने वाले 65,155 लोगों को मनोवैज्ञानिक-सामाजिक प्रथम सहायता के जरिये समर्थन दिया गया है। 17,140 व्‍यक्तिगत सत्र चलाये गये और 2,335 ग्रुप सैशन चलाये गये। मनोरोग देखभाल/मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए 396 मामले रेफर किये गये।

बाढ़ प्रभावित जिलों में चिकित्‍सा सेवा के लिए 30 विशेषज्ञ डॉक्‍टर, 20 जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर तथा 40 मलयालम भाषी नर्सें तैनात की गई हैं। ये डॉक्‍टर पलक्‍कड़, मल्‍लापुरम, कोझिकोड़ तथा एर्नाकुलम जिले के जिला अस्‍पतालों/तालुका अस्‍पतालों में चिकित्‍सा सेवा दे रहे हैं।

इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी (आईआरसीएस) और इसकी राज्‍य शाखाएं भी राज्‍य को सहायता दे रही है। खोज और बचाव कार्यों में आईआरसीएस के 5,000 स्‍वयंसेवियों ने भाग लिया। उन्‍होंने 300 टेंट, 2,500 तारपोलीन तथा 3,000 साडि़यां, 3,500 कंबल, 4,000 चादरों जैसी उपयोगी सामानों की सप्‍लाई की है। इसमें तीन जलशोधन इकाइयां (क्षमता 700 लीटर/घंटा) शामिल हैं।

राष्‍ट्रीय बीमारी नियंत्रण केन्‍द्र स्थिति की निगरानी कर रहा है। 21 अगस्‍त, 2018 से महामारी जनित बीमारियों के लिए इवेंट आधारित दैनिक रिपोर्टिंग हो रही है। रणनीतिक संचालन केन्‍द्र को सक्रिय किया गया है।

ईएमआर प्रभाग लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू, चिकनपॉक्‍स तथा डायरिया की गंभीर बीमारी के दैनिक आधार पर बढ़ने के कारण स्थिति पर नजर रखे हुए है।

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