नई दिल्ली, 06 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ रेल मंत्रालय द्वारा ‘मोबिलिटी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग’ पर संगोष्ठी का आयोजन
रेल मंत्रालय और रेल सूचना सेवा केन्द्र (सीआरआईएस) ने आज यहां ‘मोबिलिटी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग’ पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में रेल एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल मुख्य अतिथि थे। पीयूष गोयल ने भारतीय रेल ई-खरीद प्रणाली संबंधी ‘आपूर्ति’ मोबाइल ऐप भी जारी किया।
पीयूष गोयल ने कहा कि समय आ गया है कि हम भारतीय रेल के आकर्षण को बहाल करें। मेरी दृष्टि में प्रौद्योगिकी के जरिये भारतीय रेल की दशा और दिशा में बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेलवे ट्रेक, सुरक्षा, सिग्नलिंग, खान-पान, समयबद्धता आदि क्षेत्रों में बदलाव लाने के लिए प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘कागज रहित अनारक्षित टिकटों की संख्यान 2014 में 195 थी, जो पिछले वर्ष बढ़कर 67,000 हो गई। यह तीन वर्षों में 35,000 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो बहुत उत्साहवर्धक है।’ उन्होंने बताया कि 710 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा दी जा रही है और इस संबंध में मैं रेलकर्मियों के लिए गौरव का अनुभव करता हूं।
इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के सदस्य यातायात गिरिश पिल्लई, सीआरआईएस के महानिदेशक मुकेश निगम, रेलवे बोर्ड के महानिदेशक/भंडार वी• पी• पाठक, रेलवे बोर्ड के महानिदेशक/कार्मिक आनंद माथुर, रेलवे बोर्ड में सीएंडआईएस की अतिरिक्त सदस्य सुनीरा बस्सी तथा अन्य वरिष्ठ रेल अधिकारी भी उपस्थित थे।
• संगोष्ठी के बारे में :
संगोष्ठी में सूचना प्रौद्योगिकी के तमाम प्रयोगों के बारे में चर्चा की गई। सत्रों के दौरान वक्ताओं ने बताया कि मोबिलिटी बढ़ाने के लिए कैसे सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बारे में वक्ताओं ने कई उपायों की जानकारी दी, जिनसे उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान करने के लिए रेलवे संचालन को प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
कम्प्यूटरों और सूचना प्रसंस्करण प्रणालियों के अलावा संचार तंत्र भी मोबिलिटी के संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आधुनिक प्रौद्योगिकियों के जरिये प्रभावशाली संचार तंत्र खड़ा किया जा सकता है। मोबिलिटी के संबंध में इस संगोष्ठी ने एक शानदार प्लेटफॉर्म के तौर पर काम किया है।
• ‘आपूर्ति’ के बारे में :
भारतीय रेल की ई-खरीद प्रणाली संबंधी ‘आपूर्ति’ मोबाइल ऐप –
इस ऐप में भारतीय रेल की ई-संविदा और ई-नीलामी संबंधी गतिविधियों के आंकड़े और सूचना उपलब्ध हैं।
ई-संविदा गतिविधियों के लिए उपयोगकर्ता संविदाओं के प्रकाशन, उनके समापन और खरीद संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
स्क्रैप की बिक्री संबंधी ई-नीलामी गतिविधियों के लिए उपयोगकर्ताओं को आगामी नीलामी, नीलामी कार्यक्रम, बिक्री शर्तों, ई-नीलामी के लिए उपलब्ध सामग्रियों, नीलामी इकाईयों की जानकारी मिलेगी।
आईआरईपीएस की विवरणिका भी ऐप पर उपलब्ध है।
ऐप में उपयोगकर्ताओं के फीडबैक की भी जानकारी मिलेगी, जिससे ऐप में लगातार सुधार करने में सहायता होगी।
॥■॥ उपराष्ट्रपति आज स्वर्गीय वाजपेयी के परिजनों से मिलने उनके आवास गए
उपराष्ट्रपति एम• वैंकेया नायडू आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर गए। उपराष्ट्रपति के साथ उनकी बेटी दीपा वेंकट भी थीं।
उपराष्ट्रपति ने स्वर्गीय वाजपेयी के परिवार वालों से बातचीत की और उनका कुशलक्षेम पूछा। उपराष्ट्रपति स्वर्गीय वाजपेयी के आवास पर करीब एक घंटा रहे।
॥■॥ जल बचाओ, वीडियो बनाओ, पुरस्कार पाओ प्रतियोगिता : मोहम्मद अमजद, सुप्रीत देव और चंदन कुमार ने दूसरे पखवाड़े में पुरस्कार जीते
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने जल बचाओ, वीडियो बनाओ, पुरस्कार पाओ प्रतियोगिता में दूसरे पखवाड़े (25 जुलाई – 08 अगस्त) के लिए विजेताओं के नामों की घोषणा की। 25 जुलाई से 08 अगस्त, 2018 की अवधि के लिए पटना से मोहम्मद अमजद, टुमकुर, कर्नाटक से सुप्रित देव और चंपारण से चंदन कुमार ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाया। इन विजेताओं को क्रमशः 25,000, 15,000 और 10,000 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
जल बचाओ, वीडियो बनाओ, पुरस्कार पाओ प्रतियोगिता की शुरुआत भारत सरकार के माइगोव पोर्टल की मदद से मंत्रालय ने जल संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शुरू किया था। इस प्रतियोगिता में कोई भी भारतीय नागरिक भाग ले सकता है। उन्हें इस विषय पर नया वीडियो रिकॉर्ड करनी होती है। उन्हें यू-ट्यूब पर अपनी एंट्री अपलोड करनी होगी और माइगोव कंटेस्ट पेज www.mygov.in के वीडियो लिंक सेक्शन पर क्लिक करना होगा। इस साल 04 नवंबर तक प्रत्येक पखवाड़े में तीन विजेताओं को चुना जाएगा।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने नागरिकों से देश के विभिन्न भागों में जल संरक्षण, जल का सर्वोत्कृष्ट इस्तेमाल और जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन के क्षेत्र में कोशिशों, महत्वपूर्ण योगदानों और बेहतर अभ्यासों का वीडियो रिकॉर्ड कर अपलोड करने की अपील की है। प्रतियोगियों से आग्रह किया जाता है कि वे मूल वीडियो ही अपलोड करें। हिन्दी, अंग्रेजी या किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में वीडियो की अवधि न्यूनतम 2 मिनट से 10 मिनट तक होनी चाहिए और इसमें भारतीय कॉपीराइट कानून, 1957 या किसी भी तीसरे पक्ष के बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रावधान का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
॥■॥ राष्ट्रपति ने बुल्गारिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में वहां के प्रधानमंत्री बॉयको बोरिसोव से मुलाकात की। चर्चा के दौरान राष्ट्रपति ने कहा कि श्री बॉयको बोरिसोव के नेतृत्व में बुल्गारिया ने एक राष्ट्र के रूप में अत्यंत सराहनीय प्रगति की है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि भारत, बुल्गारिया के साथ आर्थिक संबंध बढ़ाना चाहता है। बुल्गारिया ने सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मा, प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण इत्यादि क्षेत्रों में बहुत प्रगति की है। इन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को बहुत दिलचस्पी है और वे बुल्गारिया के साथ संयुक्त रूप से उपक्रम लगाना तथा निवेश करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुत पहले से रक्षा सहयोग हो रहा है। भारत, बुल्गारिया से प्रौद्योगिकी प्राप्त करना चाहता है और अपने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत बुल्गारिया की कंपनियों को आमंत्रित करता है।
इसके पहले, राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द और बुल्गारिया के राष्ट्रपति ने संयुक्त रूप से साउथ पार्क, सोफिया में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि वे बुल्गारिया वासियों के कृतज्ञ हैं कि आज अपने विशेष दिन-राष्ट्रीय एकीकरण दिवस – पर उन्होंने महात्मा गांधी को स्थायी निवास दिया हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में लगा दिया था, जिसके मद्देनजर उनके प्रति यह सच्ची श्रद्धांजलि है। टकराव, तनाव, हिंसा और तबाही के दौर में महात्मा गांधी के विचार और मूल्य बहुत प्रासंगिक हैं।
बुल्गारिया यात्रा की समाप्ति के बाद राष्ट्रपति चेक गणराज्य के लिए रवाना हो गये। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति तीन यूरोपीय देशों - साइप्रस, बुल्गारिया और चेक गणराज्य की यात्रा पर रवाना हुये थे।
॥■॥ तुर्की में 87वें इज़मीर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में ‘सोर्स इंडिया’
भारत, तुर्की में शुक्रवार 07 सितंबर, 2018 से शुरू हो रहे 87वें इज़मीर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का साझेदार देश है। इस व्यापार मेले में भारत एक बड़ा बिजेनस पैविलियन ‘सोर्स इंडिया’ लांच करेगा जिसके जरिए भारत की 75 कंपनियां तुर्की और अन्य पड़ोसी देशों के साथ भारत का निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से मेल-जोल बढ़ाएंगी।
यह सोर्स इंडिया पैविलियन का एक श्रृंखला है जिसे भारत व्यापार संवर्धन परिषद (टीपीसीआई) भारत का निर्यात बढ़ाने के लिए दुनियाभर के महत्वपूर्ण व्यापार मेले में आयोजित कर रहा है। टीपीसीआई, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में वाणिज्य विभाग का व्यापार एवं निवेश संवर्धन संगठन है। यह भारत और बाकी दुनिया के बीच व्यपार और निवेश में सहयोग के नए रास्ते तलाशने का काम करता है।
87वें इज़मीर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला इंस्ताबुल और अंकारा के बाद तुर्की के तीसरे सबसे बड़ी जनसंख्या वाले इज़मीर शहर में 07 सितंबर से 11 सितंबर तक चलेगा। मेले में केंद्रित देश के रूप में भारत की भागीदारी होने की वजह से भारत का राष्ट्रगान गाया जाएगा और मेले में रखे स्क्रीन पर भारत का तिरंगा भी लहराता दिखेगा। सोर्स पैविलियन तक खरीदारों और आगुंतकों को पहुंचने में आसानी के लिए विशेष संकेतक लगाए जाएंगे।
अंकारा में भारत के राजदूत संजय भट्टाचार्य ने कहा कि भारत और तुर्की के बीच कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावना हैं। उन्होंने बताया कि तुर्की के विशाल बाजार और यूरोपीय बाजारों तक पहुंच की वजह से तुर्की में भारतीय उद्यमियों के संयुक्त उपक्रम स्थापित करने की अपार संभावनाएं हैं।
॥■॥ मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने पूरे देश में सीबीएसई संबद्ध स्कूलों के 37 शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को सीबीएसई शिक्षक पुरस्कार (2017-18) प्रदान किए
भारत सरकार के मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने राजधानी में वर्ष 2017-18 के लिए सीबीएसई संबद्ध स्कूलों के 37 शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और कक्षा शिक्षण में नवाचारों के लिए सम्मानित किया।
सीबीएसई ने लीक से हटकर पहली बार सीबीएसई पुरस्कार 2017-2018 के लिए प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों से हस्त लिखित आवेदन देने के बजाय ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे।
बोर्ड ने पहले गठित की जाने वाली क्षेत्रीय समितियों के बजाय राष्ट्रीय स्तर की स्क्रीनिंग समिति का गठन किया था। इस समिति ने निम्नलिखित आधार पर पुरस्कार विजेताओं का चयन किया:
•क. पुरस्कारों की सभी श्रेणियों के लिए सामान्य मानदंड जैसे कि अकादमिक योग्यता, विद्वत्तापूर्ण योगदान, कार्यात्मक शोध, पाठ्यक्रम, सामुदायिक एवं विद्यार्थी विकास संबंधी उपलब्धियां, पुरस्कार और सम्मान।
•ख. विशिष्ट मानदंड जैसे कि एक शिक्षक के रूप में प्रभावशीलता, सुधारात्मक शिक्षण, शिक्षक का अहम योगदान, और
•ग. आमने-सामने बैठकर बातचीत या संवाद।
पुरस्कार विजेताओं में प्रधानाध्यापकों के अलावा प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षक भी शामिल हैं। पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन कला, विशेष शिक्षाविशारदों, स्कूल परामर्शदाताओं, व्यावसायिक, व्यायाम शिक्षा और आईटी शिक्षकों के लिए भी पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं।
अभिनंदन समारोह रीना रे, सचिव (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता), अनिता करवल, अध्यक्ष, सीबीएसई, अनुराग त्रिपाठी, सचिव, सीबीएसई और मानव संसाधन विकास मंत्रालय, एनवीएस, केवीएस और अनेक स्कूलों के कई अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया।
उपेन्द्र कुशवाहा ने देश भर के सभी पुरस्कार विजेताओं और अन्य शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका अद्वितीय होती है क्योंकि ‘एक शिक्षक का सकारात्मक प्रभाव अनंत काल तक कायम रहता है और आप कभी भी यह नहीं कह सकते कि इस तरह के प्रभाव पर कहां जाकर विराम लगा।’ एक आदर्श के रूप में शिक्षकों का सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के मन-मस्तिष्क पर लंबे समय तक कायम रहता है। अत: नैतिक मूल्यों को विद्यार्थियों के चेतन में आत्मसात कराते हुए शिक्षा को मानवीय स्वरूप प्रदान करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को प्रणाली की चुनौतियों का सामना करने और अच्छी प्रथाओं को लागू करने एवं विद्यार्थियों को अच्छी तरह से शिक्षित करने में सक्षम होना चाहिए क्योंकि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होते हैं।
सचिव (स्कूल शिक्षा और साक्षरता) रीना रे ने सभी पुरस्कार विजेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षा का एक अहम लक्ष्य भविष्य के लिए आत्मविश्वास से भरे छात्रों को तैयार करना और उन्हें सामाजिक रूप से जवाबदेह, गुणवान एवं अभिनव विचारकों में तब्दील करना है, जबकि शिक्षा सुगम एवं न्यायसंगत होनी चाहिए और इसके जरिए उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
सीबीएसई की अध्यक्ष अनिता करवल ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समूचा विश्व शिक्षकों का ऋणी है क्योंकि वे राष्ट्र एवं वैश्विक समाज का निर्माण करते हैं और शिक्षण एवं मार्गदर्शन के जरिए अंसख्य विद्यार्थियों के जीवन को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करते हैं।
सीबीएसई के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा कि ये पुरस्कार दरअसल प्रत्येक पुरस्कार विजेता की प्रतिबद्धता, समर्पण और निःस्वार्थ भावना का प्रतीक हैं।
प्रत्येक पुरस्कार के तहत एक उत्कृष्टता प्रमाणपत्र एवं एक शॉल के अलावा 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाता है।
॥■॥ वृत्तीय अर्थव्यवस्था, संसाधनों की क्षमता पर्यावरण संबंधी निरंतरता के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आर्थिक वृद्धि की चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकती है : डॉ• हर्षवर्धन
इस बात पर जोर देते हुए कि वृत्तीय अर्थव्यवस्था और संसाधनों की कार्य क्षमता पर्यावरण संबंधी निरंतरता के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आर्थिक वृद्धि की प्रक्रिया के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकती है, केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ• हर्षवर्धन ने संसाधनों के क्षमता निर्माण में कॉरपोरेट की भागीदारी और एक वृत्तीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकता बताई है। ‘‘सभी के भविष्य’’ विषय पर 13वें वहनीयता शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ• हर्षवर्धन ने सफल प्रबंधन और वनों के विकास, वन्य जीव प्राकृतिक वास और पर्यावरण प्रणाली के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत में वनों और वृक्षों से अच्छादित क्षेत्र में एक प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरंतर विकास की बात करते समय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बारे में एक साथ बात होनी चाहिए। वर्तमान सरकार ने इन दोनों को बराबर महत्व दिया है और हम निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। डॉ• हर्षवर्धन ने पर्यावरण, वन, वन्य जीव और तटवर्ती नियंत्रण क्षेत्र के दायरे में एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली ‘परिवेश’ के हाल ही में कार्यान्वयन की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वचालित प्रणाली से आवेदनकर्ताओं को अपने आवेदन की स्थिति का पता लगाने के साथ ही पर्यावरण संबंधी स्वीकृति को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। डॉ• हर्षवर्धन ने भारत द्वारा 5पी-पीपल (जनसमूह), प्लेनेट (नक्षत्र), प्रॉसपैरेटी (समृद्धि), पीस (शान्ति) और पार्टनरशिप (सहभागिता) को जोड़कर अच्छी जीवन शैली अपनाने के सकारात्मक कार्य का जिक्र किया।
इस बात को स्वीकार करते हुए कि हवा की गुणवत्ता एक पर्यावरण संबंधी मुद्दा है जो देश के नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है, डॉ• हर्षवर्धन ने कहा कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्य योजना और वायु गुणवत्ता निगरानी संरचना ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर सरकार का विशेष ध्यान है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि पर्यावरण संबंधी चुनौतियां समाज के सभी वर्गों द्वारा मिलकर कार्य करने को अनिवार्य बनाती हैं। मनुष्य ने प्रकृति पर भारी दवाब डाला है जिसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, जैव विविधता की हानि, गरीबी और बढ़ती असमानता जैसी वैश्विक चुनौतियां पैदा हुई हैं। उन्होंने शहरों के ठोस कचरे को उचित तरीके से अलग करने और प्लास्टिक कचरे को दोबारा इस्तेमाल के उपयोगी बनाने के लिए योजनाएं बनाने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि हम कचरा संग्रह और उसके निपटारे की प्रभावशाली प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न शहरी प्राधिकारों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ कार्य कर रहे हैं।
डॉ• हर्षवर्धन ने वायु प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, नदी संरक्षण अथवा जैव विविधता संरक्षण जैसी विभिन्न पहलों पर सरकार के साथ हाथ मिलाने के लिए उद्योग के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया।
इस अवसर पर आवास और शहरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का विकास पथ हरित होगा और यह 2030 के विकास संबंधी एजेंडा के अनुरूप होगा। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के बढ़ते तापमान से मुकाबला करने के प्रयासों में एकजुट है और राष्ट्रीय स्तर पर भारत के भावी योगदान पर नजर डाली जाए तो यह इसकी पुष्टि करता है। उन्होंने 2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन, वायु प्रदूषण, मलिन बस्तियों में रहने वालों के लिए आवास तथा जल संबंधी आपदाएं जलवायु से जुड़े कुछ ऐसे पहलू हैं जिन्हें लक्ष्य 11 में शामिल किया गया है।
भारत को 2 अक्टूबर, 2019 तक खुले में शौच मुक्त बनाने और शत-प्रतिशत वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन के स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन न केवल संरचना से जुड़ा है बल्कि इससे नागरिकों में व्यवहार संबंधी सांस्कृतिक बदलाव आएगा।
श्री पुरी ने कहा कि मकानों के निर्माण में नई और वैकल्पिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, जलवायु के अनुसार पर्यावरण अनुकूल उपलब्ध स्थानीय सामग्री को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे न केवल निर्माण लागत बल्कि कार्बन पदचिन्ह कम होंगे। उन्होंने सस्ती, पर्यावरण अनुकूल और आधुनिक शहरी परिवहन सेवाओं पर जोर दिया और कहा कि दिल्ली मेट्रो आज दुनिया की सर्वेश्रेष्ठ परिवहन प्रणालियों के समकक्ष है।
इस अवसर पर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चन्द्रजीत बनर्जी, यूरोपीयन कमीश्नर कारमेनू वेल्ला और उद्योग तथा समाज के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।