नई दिल्ली, 06 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ जन अनुकूल और गरीब अनुकूल पहलों को बढ़ावा
जन अनुकूल और गरीब अनुकूल पहलों को काफी बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 05 सितंबर 2018 को आयोजित अपनी बैठक में वित्तीय समावेश के लिए राष्ट्रीय मिशन - प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) को निम्नलिखित परिवर्तनों के साथ जारी रखने को मंजूरी दे दी है:
· वित्तीय समावेश के लिए राष्ट्रीय मिशन (पीएमजेडीवाई) 14 अगस्त, 2018 के बाद भी जारी रहेगा।
· 5,000 रुपये की मौजूदा ओवर ड्राफ्ट (ओडी) सीमा बढ़ाकर 10,000 रुपये की गई।
· 2,000 रुपये तक के ओवर ड्राफ्ट के लिए कोई शर्त नहीं होगी।
· ओडी सुविधा का लाभ उठाने के लिए आयु सीमा संशोधित करके 18-60 साल के बजाय 18-65 साल की जाएगी।
‘हर परिवार से लेकर हर वयस्क व्यक्ति’ तक की विस्तारित कवरेज के तहत 28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए नए पीएमजेडीवाई खातों के अंतर्गत नए रुपे कार्ड धारकों के लिए दुर्घटना बीमा कवर को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया जाएगा।
● असर:
इस मिशन को जारी रखने के परिणामस्वरूप देश के सभी वयस्क व्यक्ति/परिवार अन्य वित्तीय सेवाओं एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने और 10,000 रुपये तक की ओवर ड्राफ्ट सुविधा के साथ कम से कम एक बुनियादी बैंक खाता खोलने में सक्षम हो जाएंगे। इससे उन्हें वित्तीय सेवाओं की मुख्यधारा में लाने के साथ-साथ सरकार की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं के लाभों को अधिक कुशलतापूर्वक हस्तांतरित करने में भी मदद मिलेगी।
● पीएमजेडीवाई के तहत उपलब्धियां:
· लगभग 32.41 करोड़ जन धन खातों को 81,200 करोड़ रुपये से भी अधिक की जमा राशि के साथ खोला गया है।
· 53 प्रतिशत महिला जन धन खाता धारक और 59 प्रतिशत जन धन खाते ग्रामीण एवं अर्ध शहरी क्षेत्रों में हैं। 83 प्रतिशत से भी अधिक सक्रिय जन धन खातों (असम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर राज्यों को छोड़कर) को ‘आधार’ से जोड़ दिया गया है। इन खाता धारकों को लगभग 24.4 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए गए हैं।
· 7.5 करोड़ से भी अधिक जन धन खातों में डीबीटी हो रहे हैं।
· बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट (बीसी) को 1.26 लाख उप सेवा क्षेत्रों (ग्रामीण क्षेत्र) में तैनात किया गया है जिनमें से प्रत्येक कॉरस्पोंडेंट 1000-1500 परिवारों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लगभग 13.16 करोड़ ‘आधार’ आधारित भुगतान प्रणाली (एईपीएस) लेन-देन जुलाई, 2018 के दौरान बीसी के जरिए किए गए हैं।
· प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत 13.98 करोड़ सदस्य, अब तक 388.72 करोड़ रुपये की राशि वाले 19,436 दावों को निपटाया गया है।
· इसी तरह, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के तहत 5.47 करोड़ सदस्य, अब तक 2206.28 करोड़ रुपये के 1.10 लाख दावों को निपटाया गया है।
· 1.11 करोड़ लोग अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के सदस्य बन चुके हैं।
पीएमजेडीवाई के कार्यान्वयन के लिए एक पाइपलाइन बनाई गई है जिसके माध्यम से जन धन खातों और मोबाइल बैंकिंग को ‘आधार (जैम)’ से जोड़ दिया गया है। यह पाइपलाइन न केवल बचत, ऋण वितरण, सामाजिक सुरक्षा इत्यादि को सुविधाजनक बना रही है, बल्कि डीबीटी के माध्यम से देश के गरीब लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ का हस्तांतरण सुनिश्चित कर इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक कर रही है।
‘हर परिवार से लेकर हर वयस्क व्यक्ति’ तक का खाता खोलने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ प्रमुख वित्तीय समावेश कार्यक्रम (पीएमजेडीवाई) को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। जनधन-आधार-मोबाइल (जैम) की पाइपलाइन इन गतिविधियों की कवरेज के लिए आवश्यक व्यवस्था या सुविधाएं सुलभ कराएगी और इस तरह डिजिटलीकृत, वित्तीय दृष्टि से समावेशी और बीमित समाज बनाने की गति में तेजी लाएगी।
● पृष्ठभूमि:
लोगों तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने, वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने और देश भर में हर परिवार को कम से कम एक बैंक खाता सुलभ कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 अगस्त, 2014 को अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के नाम से ‘वित्तीय समावेश पर राष्ट्रीय मिशन’ की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री द्वारा 28 अगस्त, 2014 को राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक रूप से इस योजना का शुभारंभ किया गया था।
॥■॥ मंत्रिमंडल ने अमृतसर, बोध गया, नागपुर, सम्बलपुर, सिरमौर, विशाखापट्टनम और जम्मू स्थित सात नए आईआईएम के स्थायी परिसरों की स्थापना और उनके संचालन की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अमृतसर, बोध गया, नागपुर, सम्बलपुर, सिरमौर, विशाखापट्टनम और जम्मू स्थित सात नए आईआईएम के स्थायी परिसरों की स्थापना और उनके संचालन तथा कुल 3775.42 करोड़ रूपये के पुनरावर्ती खर्च (2999.96 करोड़ रूपये गैर-पुनरावर्ती और 775.46 करोड़ रूपये पुनरावर्ती खर्च) को मंजूरी दे दी है। इन आईआईएम की स्थापना वर्ष 2015-16/2016-17 में की गई थी। वर्तमान में ये संस्थान अस्थायी परिसरों से काम कर रहे हैं।
कुल 3775.42 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है, जिनमें से 2804.09 करोड़ रूपये इन संस्थानों के स्थायी परिसरों के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे जिनका विवरण इस प्रकार हैं:-
क्र.सं.
आईआईएम का नाम
राशि (करोड़ रूपये में)
1
आईआईएम अमृतसर
348.31
2
आईआईएम बोध गया
411.72
3
आईआईएम नागपुर
379.68
4
आईआईएम सम्बलपुर
401.94
5
आईआईएम सिरमौर
392.51
6
आईआईएम विशाखापट्टनम
445.00
7
आईआईएम जम्मू
424.93
कुल
2804.09
इनमें से प्रत्येक आईआईएम 60384 वर्ग मीटर के क्षेत्र पर निर्माण करेगा, जिसमें से प्रत्येक आईआईएम में 600 छात्रों के लिए संपूर्ण बुनियादी ढांचा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन संस्थानों को 5 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष प्रति छात्र 5 लाख रूपये की मंजूरी दी गई है। इसके बाद उम्मीद है कि ये संस्थान अपना संचालन खर्च/रखरखाव खर्च आंतरिक तौर पर धनराशि के सृजन से कर लेंगे।
इन संस्थानों के स्थायी परिसरों का निर्माण जून 2021 तक पूरा हो जाएगा। इसके साथ ही सभी 20 आईआईएम के पास अपने स्थायी परिसर हो जाएंगे।
आईआईएम छात्रों को शिक्षा प्रदान करेंगे ताकि वे पेशेवर प्रबंधक बन सकें। इस मंजूरी से देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
॥■॥ मंत्रिमंडल ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के बाद वन्य जीव प्राकृतिक वास के समेकित विकास की केन्द्र प्रायोजित प्रमुख योजना जारी रखने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 2017-18 से 2019-20 तक 12वीं पंचवर्षीय योजना में वन्य जीव प्राकृतिक वास (सीएसएस-आईडीडब्ल्यूएच) के एकीकृत विकास की केन्द्र प्रायोजित प्रमुख योजना जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसमें केन्द्र प्रायोजित प्रोजेक्ट टाइगर योजना (सीएसएस-पीटी), वन्य जीव प्राकृतिक वास योजना (सीएसएस-डीडब्ल्यूएच) और प्रोजेक्ट हाथी (सीएसएस-पीई) योजना शामिल हैं। केन्द्रीय अंश के रूप में 2017-18 से 2019-20 तक कुल व्यय 1731.72 करोड़ रूपये (प्रोजेक्ट टाइगर के लिए 1143 करोड़ रूपये, वन्य जीव प्राकृतिक वास के विकास के लिए 496.50 करोड़ रूपये और प्रोजेक्ट हाथी के लिए 92.22 करोड़ रूपये) है।
देश के पांच हिस्सों में फैले बाघ वाले कुल 18 राज्य प्रोजेक्ट टाइगर योजना के अंतर्गत लाभान्वित होंगे। इसी प्रकार से अन्य दो योजनाओं के लिए, वन्य जीव प्राकृतिक वास और हाथी वाले 23 राज्यों के विकास के मामले में पूरे देश को शामिल किया जाएगा। इससे वन्य जीव संरक्षण के अलावा प्रोजेक्ट टाइगर में बाघों और प्रोजेक्ट हाथी क्षेत्र में हाथियों के लिए विशेष सहयोग मिलेगा।
इससे पर्यावरण संबंधी लाभों और प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत बाघ संरक्षित क्षेत्र के अंदर और उसके आसपास बड़े पैमाने पर बाघ संरक्षण सहयोग, वन्य जीव प्राकृतिक वास विकास और परियोजना हाथी क्षेत्रों में हाथियों के संरक्षण के अंतर्गत संरक्षित और नजदीकी इलाकों में वन्य जीवों के संरक्षण का प्रभावी कार्यान्वयन हो सकेगा, यह योजना देश में बाघों, हाथियों और वन्य जीव संरक्षण को मजबूती प्रदान करेगी।
यह योजना प्रभावी तरीके से मनुष्य और वन्य जीवों के बीच टकराव को दूर करेगी। इसके अलावा जो समुदाय स्वेच्छा से प्रमुख/महत्वपूर्ण बाघ प्राकृतिक वासों (6900 परिवार) से हटकर कहीं ओर बसना चाहेंगे उन्हें प्रोजेक्ट टाइगर की केन्द्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत और 800 परिवारों को वन्य जीव प्राकृतिक वास विकास की केन्द्र प्रायोजित योजना से लाभ मिलेगा।
ये योजनाएं रोजगार के अवसर सृजित करेगी जिसके परिणामस्वरूप बाघ संरक्षित क्षेत्रों के अंदर और उसके आसपास लोगों को आर्थिक दृष्टि से ऊपर उठाया जा सकेगा। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता को कम करते हुए स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल हो सकेगा। इससे हर वर्ष करीब 30 लाख मानव दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। जिसमें अनेक स्थानीय जनजातियों के अलावा गैर-जनजातीय स्थानीय कार्य बल शामिल होगा। इसके दायरे में रहने वाले लोगों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्थानीय आबादी को गाइडों, ड्राइवर, अतिथि सत्कार कर्मी और अन्य सहायक नौकरियों के अवसर मिलेंगे। ये योजनाएं विभिन्न पर्यावरण विकास की परियोजनाओं के जरिए लेागों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विभिन्न हुनरों को प्रोत्साहन देंगी, ताकि वे स्व-रोजगार अपना सकें।
इन योजनाओं से पर्यटकों के जरिए संसाधन सृजित होंगे जिससे बाघ स्रोत क्षेत्रों और वन्य जीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण अन्य क्षेत्रों को सुरक्षित करने को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह जीवन रक्षक प्रणालियों को बनाए रखने के साथ-साथ खाद्य, जल और आजीविका सुरक्षा प्रदान करने में मददगार होंगी।
योजनाओं का कार्यान्वयन सम्बद्ध राज्यों के बाघ संरक्षित क्षेत्रों, संरक्षित इलाकों और हाथी संरक्षित क्षेत्रों के जरिए किया जाएगा।