सत्ता की हनक में बौखलाये वीसी, दो शिक्षकों को किया बर्खास्त !



* सत्ता की हनक में बौखलाये वीसी ने बिना कारण बताए दो शिक्षकों को किया बर्खास्त!

* हाल मोतीहारी स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय की

* बिहार में भी जलाल झेल रहे बिहारी

--- शैलेश तिवारी, पटना।
मोतीहारी। पूरे देश-दुनिया मे बिहारी जलालत झेलते ही है। अब अपने घर मे भी उन्हें कुछ ऐसे ही प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। बिहार के मोतीहारी स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के नमूने वीसी की करतूत दखिये। आजकल देश के सभी बकलोल कुलपति हिटलर से अपना संबंध साबित करने पर तुले हुए है। जूलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अमित रंजन व बायोटेक के डॉ शशिकांत रे को महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतीहारी के कुलपति ने अचानक गुरुवार को हटा दिया। इस आदेश के विरुद्ध विश्विद्यालय के समक्ष दोनों प्राध्यापक भूख हड़ताल पर बैठ गए है। विश्वविद्यालय के इस तुगलकी फरमान के विरुद्ध हटाये गए प्राध्यापकों के समर्थन में छात्र भी उतर गए है। छात्र सौरभ सुमन ने बताया कि यह कुलपति की ज्यादती है, जिसके विरुद्ध कल सुबह से हड़ताल व आंदोलन शुरू किया जायेगा। कुलपति ने शुक्रवार को हंगामा के मद्देनजर गुरुवार की शाम को पूजा का अवकाश घोषित कर दिया है व इसकी सूचना छात्रों व कर्मियों को व्हाट्सएप के माध्यम के दी गयी है। शिक्षकों के समर्थन में मौके पर जमे छात्रों की मानें तो उक्त शिक्षकों ने कोई राजनीति नही की है। बावजूद इन्हें राजनीति का शिकार बनाया गया है।

यहाँ बता दें कि टर्मिनेशन लेटर थमाते हुए हटाये गए शिक्षकों को अकाउंट में एक माह की सैलरी देने का आश्वाशन दिया गया है। इससे पूर्व भी प्रबंधन विभाग के डॉ संदीप कुमार से कुलपति ने जबरन इस्तीफा लिखवा लिया था। इन सभी मामलों में कॉमन यह है कि अबतक हटाये गए सभी प्राध्यापक बिहार के ही है। डॉ अमित प. चंपारण जिला के है। जबकि डॉ रे सिवान व पूर्व में हटाये गए डॉ संदीप गोपागंज जिले के रहनेवाले है।

पूर्व में हटाये गये डॉ संदीप ने बताया कि कुलपति ने उनपर मोलेस्ट्रेशन का आरोप लगाकर जबरन इस्तीफा लिखवा लिया। उसवक्त वे भी डर गए कि यदि कुलपति इस तरह की बात कहेगा तो लोग भी उनहें ही गलत समझेंगे। जबकि हकीकत इसके विपरीत है। कुलपति नौकरी देने के बदले महिलाओं का गलत इस्तेमाल विरोधियों के खिलाफ कर रहे है। डॉ संदीप ने यह भी बताया कि वे हिमाचल व राजस्थान का नेक्सस बना कर बिहारियों को ठिकाने लगा रहे है।

इसके पूर्व बहाली को लेकर भी कुलपति के कार्यशैली पर सवाल उठते रहे है। अपने स्थापना काल से ही कुलपति की कार्यशीली से यह विश्वविद्यालय विवादों के घेरे में है। सुनने में आया है कि कुलपति महोदय बीएचयू के वीसी के देशव्यापी चर्चा को लेकर खासे परेशान हैं व कुछ ऐसा कर गुजरने को आमादा हैं जिससे यह विश्वविद्यालय जल्द सुर्खियों में आ जाये!

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