नई दिल्ली, 31 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने वित्त वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान जारी कर दिए हैं। सीएसओ के अनुसार, अप्रैल-जून, 2018 में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। ये अनुमान पिछले वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में दर्ज किए गए 5.6 प्रतिशत के विकास अनुमानों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं। इससे भारत में आर्थिक विकास की गति काफी तेज होने के संकेत मिलते हैं। यही नहीं, इससे देश में बुनियादी आर्थिक तत्वों के काफी मजबूत होने की भी पुष्टि होती है। सीएसओ ने अनुमान व्यक्त किया है कि वित्त वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 33.75 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है जो वित्त वर्ष 2017-18 और वर्ष 2016-17 की प्रथम तिमाही में आंके गए क्रमशः 31.18 लाख करोड़ और 29.42 लाख करोड़ रुपये के जीडीपी अनुमान की तुलना में काफी अधिक है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष डॉ• बिबेक देबरॉय ने जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि का श्रेय ढांचागत सुधारों पर निरंतर जोर दिए जाने और वर्तमान नीतिगत पहलों के कारगर क्रियान्वयन को दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में पूंजीगत खर्च को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने तथा बुनियादी वस्तुओं एवं सेवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए की गई विभिन्न पहलों ने न केवल इस तेज विकास में योगदान किया है, बल्कि इसकी गुणवत्ता को भी बेहतर कर दिया है।
॥■॥ ‘वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर अर्थव्यवस्था में आई तेजी के ही अनुरूप है’
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने आज वित्त वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही के लिए जीडीपी के अनुमान जारी किए। अर्थव्यवस्था में बने तेजी के माहौल को प्रतिबिंबित करते हुए जीडीपी वृद्धि दर वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में वास्तविक अर्थों में 8.2 प्रतिशत के आंकड़े को छू गई जो वित्त वर्ष 2017-18 की अंतिम तिमाही में दर्ज की गई 7.7 प्रतिशत के मुकाबले और ज्यादा बेहतरी को दर्शाता है। इस विकास का आधार काफी व्यापक है और यह उपभोग व्यय में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि और नियत (फिक्स्ड) निवेश में 10.0 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की बदौलत संभव हो पाया है। विशेषकर फिक्स्ड निवेश में वृद्धि अत्यंत उत्साहवर्द्धक है क्योंकि यह वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में दर्ज की गई 14.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के मुकाबले आंकी गई बढ़त को दर्शाती है। यही नहीं, यह आंकड़ा भावी विकास की दृष्टि से भी अच्छे संकेत दे रहा है।
आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने अपने ट्वीट में कहा है, ‘प्रथम तिमाही में उल्लेखनीय वृद्धि। 8.2 प्रतिशत की समग्र वृद्धि दर, विनिर्माण क्षेत्र में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि और पूंजी सृजन में 10 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि। भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में निरंतर बेहतरी का क्रम अब पूरा हो चुका है। 2018-19 में देश की विकास दर और भी तेज होनी चाहिए जिससे भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था आगे भी बना रहेगा।’
वित्त सचिव डॉ• हसमुख अधिया ने अपने ट्वीट में कहा है, ‘वित्त वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि देश में लागू किए गए ढांचागत सुधार जैसे कि जीएसटी के अच्छे परिणाम अब मिलने शुरू हो गए हैं। विनिर्माण क्षेत्र में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर से भी मांग में व्यापक सुधार होने के संकेत मिलते हैं। यह पिछली चार तिमाहियों में आर्थिक विकास की उल्लेखनीय गति को दर्शाती है जो क्रमशः 6.3, 7, 7.7 प्रतिशत और अब 8.2 प्रतिशत आंकी गई है।’
॥■॥ वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जुलाई तक भारत की केंद्र सरकार की मासिक समीक्षा
जुलाई 2018 तक भारत की केंद्र सरकार के मासिक खाते को समेकित किया गया है और रिपोर्टों को प्रकाशित किया गया है। इसमें उल्लिखित मुख्य बातों का उल्लेख नीचे किया गया है : -
भारत सरकार ने जुलाई 2018 तक 3,49,467 करोड़ रुपये (कुल प्राप्तियों के तदनुरूप बजट अनुमान 18-19 का 19.22 प्रतिशत) प्राप्त किए हैं जिनमें 292611 करोड़ रुपये का कर राजस्व, 43125 करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व और 13731 करोड़ रुपये की गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं। गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों में ऋणों की वसूली (4512 करोड़ रुपये) और पीएसयू का विनिवेश (9219 करोड़ रुपये) शामिल हैं।
इस अवधि तक भारत सरकार द्वारा करों की हिस्सेदारी के अंतरण के रूप में राज्य सरकारों को 212,414 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की समान अवधि की तुलना में 19686 करोड़ रुपये अधिक है।
भारत सरकार द्वारा किया गया कुल खर्च 889,724 करोड़ रुपये (तदनुरूप बजट अनुमान 18-19 का 36.43 प्रतिशत) है जिनमें से 778,387 करोड़ रुपये राजस्व खाते में और 111,337 करोड़ रुपये पूंजी खाते में हैं। कुल राजस्व खर्च में से 1,80,844 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान के मद में और 141682 करोड़ रुपये प्रमुख सब्सिडियों के मद में व्यय किए गए हैं।
॥■॥ 2018-19 की प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए जीडीपी के अनुमान
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने वित्त वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमान स्थिर मूल्यों (2011-12) और वर्तमान मूल्यों दोनों पर ही जारी कर दिए हैं। इन अनुमानों से जुड़ी मुख्य बातों का उल्लेख नीचे किया गया है:
आर्थिक गतिविधि की दृष्टि से जीवीए के अनुमान
स्थिर (2011-12) मूल्यों पर अनुमान
वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में स्थिर (2011-12) मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के बढ़कर 33.74 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वर्ष 2017-18 की प्रथम तिमाही में यह 31.18 लाख करोड़ रुपये आंका गया था। यह 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में बुनियादी स्थिर मूल्यों (2011-12) पर तिमाही जीवीए के बढ़कर 31.63 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान लगाया गया है, जो वर्ष 2017-18 की प्रथम तिमाही में 29.29 लाख करोड़ रुपये था। यह 8.0 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है।
जिन क्षेत्रों ने वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में 7.0 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर दर्ज की है उनमें ‘विनिर्माण’, ‘विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाएं’, ‘निर्माण’ एवं ‘लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाएं’ शामिल हैं। ‘कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन’, ‘खनन एवं उत्खनन’, ‘व्यापार, होटल, परिवहन, संचार एवं प्रसारण से जुड़ी सेवाओं’ और ‘वित्तीय, अचल संपत्ति एवं प्रोफेशनल सेवाओं’ की वृद्धि दर क्रमश: 5.3, 0.1, 6.7 और 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
वर्तमान मूल्यों पर अनुमान
सकल घरेलू उत्पाद
वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के बढ़कर 44.33 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है, जो वर्ष 2017-18 की प्रथम तिमाही में 38.97 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह 13.8 फीसदी की वृद्धि दर दर्शाती है। वर्ष 2018-19 की प्रथम तिमाही में बुनियादी वर्तमान मूल्यों पर जीवीए के बढ़कर 41.02 लाख करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान लगाया गया है, जो वर्ष 2017-18 की प्रथम तिमाही में 36.34 लाख करोड़ रुपये था। यह 12.9 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है। विभिन्न क्षेत्रों (सेक्टर) में वृद्धि दरें इस तरह रहीं : ‘कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन’ (7.0 प्रतिशत), ‘खनन एवं उत्खनन’(18.0 प्रतिशत), विनिर्माण (17.7 प्रतिशत), ‘विद्युत, गैस, जलापूर्ति एवं अन्य उपयोगी सेवाएं’ (13.2 प्रतिशत), ‘निर्माण’ (13.8 प्रतिशत), ‘व्यापार, होटल, परिवहन एवं संचार’ (11.7 प्रतिशत), ‘वित्तीय, अचल संपत्ति एवं प्रोफेशनल सेवाओं’ (12.1 प्रतिशत) और ‘लोक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाएं’ (15.4 प्रतिशत)।