---रंजीत लुधियानवी, कोलकाता, 21 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ मिल्खा सिंह के बहाने राज्य पर निशाना साधने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई - पार्थ
एक बांग्ला पुस्तक में ओलंपियन मिल्खा सिंह की तस्वीर की जगह एक फिल्म में उनका अभिनय करने वाले अभिनेता फरहान अख्तर की तस्वीर छापने वाले प्राइवेट प्रकाशक का राज्य माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पता लगा लिया है। हालांकि कालेज स्ट्रीट के प्रकाशक का कहना है कि तीसरी कक्षा में यह पुस्तक पाठ्यपुस्तक के तौर पर नहीं बल्कि रेफरेंस पुस्तक के तौर पर पढ़ाई जाती थी। मामले की शिकायत मिलने पर प्रकाशक ने सारी पुस्तकें वापस ले ली हैं।
राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस मामले में राज्य सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में आइटी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्राइवेट संस्था की पुस्तक को सरकारी बता कर दुष्प्रचार करने वालों के साथ ही प्रकाशक संस्था के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
मालूम हो कि वाट्सएप और फेसबुक पर प्राइवेट प्रकाशक की पुस्तक को राज्य सरकार की गलती और स्कूली पाठ्यपुस्तक बताते हुए और राज्य की शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ कुछ लोगों की ओर से प्रचार अभियान चलाया गया था। हालांकि मानवाधिकार संगठन एपीडीआर की राज्य सचिव मंडली के सदस्य रनजीत शूर का कहना है कि सरकार के खिलाफ किसी तरह के विचार प्रकट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना संविधान की धारा 19 और 21 के खिलाफ है। विरोधियों को ढूंढ कर तलाश करना मानवाधिकार रक्षा कानून 1993 के विरुद्ध है। सरकारें ऐसा नहीं कर सकती हैं।
हालांकि शिक्षा मंत्री का कहना है कि विचारों की स्वतंत्रता और झूठी बातें करना अलग -अलग बाते हैं। योजनाबद्ध तरीके से राज्य सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। सरकार विरोधी झूठा प्रचार करने वालों के खिलाफ आइटी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
॥■॥ माओवादी जिले घोषित करने की मांग
पश्चिम बंगाल के पांच जिलों में केंद्र ने चार जिलों को माओवादी प्रभावित जिलों की सूची से बाहर कर दिया है। अब राज्य में महज झारग्राम जिला माओवादी प्रभावित जिले में रह गया है। राज्य सरकार की ओर से केंद्र को पत्र लिख कर मांग की गई है कि चार में से तीन जिलों को फिर माओवादी प्रभावित जिलों की सूची में शामिल किया जाए। बताया जाता है कि पश्चिम मेदिनीपुर, पुरूलिया और बांकुड़ा जिले को दोबारा सूची में शामिल करने की मांग की गई है। हालांकि वीरभूम जिले के लिए आवेदन नहीं किया गया है।
राज्य गृह विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि माओवादी दोबारा संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं। खास तौर पर झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में उनकी गतिविधियों की खबर मिल रही है। ऐसे हालात में तीन जिलों को माओवादी प्रभावित जिलों की सूची से बाहर रखना जोखिम भरा काम हो सकता है। इसका जिक्र करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा गया है।
मालूम हो कि राज्य में 2008 से लेकर 2011 के मध्य तक माओवादी प्रभावित जंगल महल के पांच जिलों में कम से कम 400 लोगों की मौत हुई थी। लेकिन नवंबर 2011 में पुलिस मुकाबले में किशनजी की मौत के बाद हालात बदल गए। इसके बाद 2013 में एक घटना को छोड़ कर तोड़फोड़ की कोई घटना नहीं हुई। इस साल अप्रैल तक झारग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, वीरभूम, पुरूलिया और बांकुड़ा माओवादी प्रभावित जिलों की सूची में शामिल थे। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राज्य के चार जिलों को सूची से बाहर कर दिया गया।
केंद्र से फैसले का विरोध करते हुए राज्य गृह विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि सफलता जाहिर करने के लिए देश के कई जिलों को सूची से बाहर किया गया है। जिससे राज्य से केंद्रीय सुरक्षा बल हटा लिए जाएं। राज्य में माओवादियों के मुकाबले के लिए 6 बटालियन सीआरपीएफ तैनात है। इसके अलावा विशेष परिस्थित के लिए एक विशेष कोबरा व एक महिला बटालियन मौजूद है। लेकिन 6 बटालियन में से 3 बटालियन हाल में असम भेज दी गई है। जबकि बाकी तीन बटालियन छत्तीसगढ़ भेजने के लिए केंद्र ने निर्देश दिए हैं।
॥■॥ नई सूचना तकनीक नीति का एलान
सूचना तकनीक के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नई सूचना तकनीक (आईटी) नीति का एलान किया है। ममता ने हाल में न्यू टाउन में राज्य के सिलिकान वैली हब का शिलान्यास करने के बाद उक्त नीति का एलान किया। राज्य सरकार की ओर से यहां जारी एक अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई है।
अधिसूचना में कहा गया है कि नई नीति थ्री डी प्रिंटिंग, बिग डाटा एनालिटिक्स, एनिमेशन व गेमिंग के अलावा साइबर सिक्योरिटी, इंटरनेट-आफ-थिंग्स (आईओटी), रोबोटिक्स, ड्रोन्स, फिनटेक, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), इंडस्ट्री 4.0 और क्वांटम कंप्यूटिंग पर केंद्रित होगी। इसमें कहा गया है कि आर्थिक रूप से राज्य मजबूत हुआ है और सरकार अब सामाजिक कल्याण और आर्थिक विकास के लिए आईटी का इस्तेमाल करना चाहती है। सरकार की मंशा सूचना व संचार तकनीक और इलेक्ट्रानिक सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की है।
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक इस नीति का लक्ष्य नए रोजगार पैदा करने के अलावा राज्य के युवाओं का कौशल बढ़ाना है ताकि उनको डिजिटल अर्थव्यवस्था में नौकरियां मिल सकें। यह नीति सूचना तकनीक के क्षेत्र में शोध व विकास को बढ़ावा देगी। इसका लक्ष्य आईटी के जरिए समाज कल्याण की प्रक्रिया को तेज करना है। अधिसूचना में दावा किया है कि इस क्षेत्र को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर तो पैदा होंगी ही, निवेश के ठिकाने के तौर पर बंगाल को भी बढ़ावा मिलेगा। नई नीति में ब्लाक चेन के साथ ही साइबर सुरक्षा, साइबर फारेंसिक और डाटा साइंस पर खास जोर दिया जाएगा।
॥■॥ सालों केरल रहने वाले बाढ़ के कारण अपने घर लौटे
बाढ़ प्रभावित केरल से हजारों लोग पश्चिम बंगाल में लौट आए हैं। राज्य सरकार की कोशिश से उन्हें विशेष ट्रेन से यहां लाया गया। सोमवार की रात 10.40 बजे ट्रेन हावड़ा स्टेशन के न्यू कांप्लेक्स मेें पहुंची। ट्रेन के पहुंचने से पहले ही राज्य के नगर विकास मंत्री फिरहाद हाकिम स्टेशन पर पहुंच गए थे। बाढ़ प्रभावित इलाके से लौटने वालों का उन्होंने स्टेशन पर स्वागत किया। कई लोगों ने भी वापसी पर मंत्री का आभार जताया।
ट्रेन से हावड़ा स्टेशन पर उतर कर कई लोगों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि सालों से केरल में काम कर रहे थे, लेकिन ऐसी आपदा पहले कभी नहीं देखी। पहली बार ऐसा केरल देखा है।
मालूम हो कि केरल से लौटने वाले ज्यादातर लोगों में मुर्शिदाबाद, बर्दमान के कटवा और पूर्वस्थली, मालदा, पश्चिम बर्दमान के आसनसोल और दुर्गापूर के रहने वाले हैं। यहां से सारे लोग काम की तलाश में केरल गए थे। इसमें से सैकड़ों लोग सालों से केरल में ही रह रहे थे। लेकिन उनका कहना है कि कभी भी ऐसे हालात देखने को नहीं मिले। इलाके के जानकार लोग बताते हैं कि बीते 94 साल में वहां ऐसी आपदा कभी नहीं आई थी।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से लौटने वालों के लिए राज्य सरकार की ओर से 25 विशेष बसों की व्यवस्था की गई थी। इस मौके पर हाकिम ने कहा कि अभी भी राज्य के बहुत लोग केरल में फंसे हुए हैं। राज्य सरकार वहां के लोगों को लेकर चिंतित है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी चिंतित हैं। उन्होंने मुझे यहां आने के लिए कहा था। केरल में फंसे लोगों को घर पहुंचाने की जिम्मेवारी सौंपी है। अब भी कुछ लोग वहां हैं, उन्हें लौटाने की व्यवस्था की जा रही है।
बाढ़ पीड़ित कई लोगों ने यहां पहुंचने पर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होने बताया कि घर, रास्ते जलमग्न हैं। खाने के लिए भोजन नहीं है। बिजली से लेकर इंटरनेट संपर्क के सारे साधन बेकार हो गए हैं। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि भयावह हालात से जिंदा बच कर कभी निकल सकेंगे, ऐसे में राज्य सरकार की ओर से यहां लाने के लिए उन्होंने आभार जताया।
दक्षिण पूर्व रेलवे की ओर से बताया गया कि तिरुअनंतपुर से 21 डिब्बों की विशेष ट्रेन में लोग हावड़ा पहुंचे। रेलवे की एक मेडिकल टीम यात्रियों के साथ थी, जिसमें दो डाक्टर थे। लेकिन किसी यात्री को डाक्टर की जरुरत नहीं पड़ी। बताया जाता है कि काम करने वाले श्रमिक व दूसरे पेशे के लोग शामिल हैं।