नई दिल्ली, 06 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ लघु/सीमांत भूमि जोतों के लिए सिंचाई की सुविधाएं
कृषि गणना वर्ष 2010-11 के अनुसार, विभिन्न आकार के वर्गों में परिचालन भूमि जोतों तथा निवल सिंचित क्षेत्र की अनुमानित संख्या निम्नलिखित हैः-
#क्र•सं•
आकार वर्ग
परिचालन भूमि जोतों की संख्या
निवल सिंचित क्षेत्र (हेक्टेयर)
#1
सीमान्त (0.99 हेक्टेयर से नीचे)
48917426
16834633
#2
छोटा (1.0-1.99 हेक्टेयर)
12130813
14263101
#3
अर्ध-मध्यम (2.0-3.99 हेक्टेयर)
7060529
14995180
#4
मध्यम (4.0-9.99 हेक्टेयर)
3148612
13265785
#5
बृहद (10.0 हेक्टेयर एवं ऊपर)
463237
5208614
#कुल
71720617
64567313
केन्द्र एवं राज्य के हिस्से दोनों के लिए सरकार द्वारा नाबार्ड के माध्यम से वित्त पोषण तंत्र की स्वीकृति की गई। इसमें लघु और सीमांत भूमि जोत भी शामिल हैं।
यह जानकारी केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में दी।
॥■॥ अन्तर्राज्यीय नदी न्यायाधिकरण
अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद (आईएसआरडब्ल्यूडी) अधिनियम, 1956 के अंतर्गत वर्तमान में मौजूदा पांच अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद न्यायाधिकरणों की स्थापना हुई है जो रावी और व्यास जल न्यायाधिकरण, वंसधारा जल विवाद न्यायाधिकरण, महादायी जल विवाद न्यायाधिकरण, महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण, और कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण हैं।
कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण को 06 जुलाई, 2016 की अधिसूचना संख्या सा.आ.3465 (ई) के तहत भंग कर दिया गया था। केन्द्र सरकार ने दिनांक 01 जून, 2018 की अधिसूचना संख्या सा.आ. 2236(ई) के तहत कावेरी जल प्रबंधन योजना अधिसूचित की है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने 22 जून, 2018 को सीडब्ल्यूएएमए और सीडब्ल्यूएसआरसी की स्थापना के लिए आदेश भी जारी किये हैं।
यह जानकारी केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में दी।
॥■॥ जेम सरकारी खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा
सरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल के रूप में सरकार ने सरकारी संगठनों द्वारा सामान्य उपयोग की वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने हेतु कंपनी अधिनियम 2013 के तहत पंजीकृत शत-प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाली एक सरकारी ई-मार्केटप्लेस की स्थापना की है। सरकारी प्रयोक्ताओं के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हेतु सरकारी ई-मार्केटप्लेस का शुभारंभ 9 अगस्त, 2016 को किया गया था।
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और गति संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकी को आसान बनाता है। यह सरकारी प्रोक्ताओं को ई-बोली, रिवर्स ई-नीलामी और मांग एकत्रीकरण की सुविधा प्रदान करता है, ताकि वे अपने धन का सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त कर सकें।
सभी राज्य सरकारें सरकारी ई-मार्केटप्लेस द्वारा प्रदान कराई गई सेवाओं का उपयोग कर रही हैं। इसके अतिरिक्त 22 राज्यों यथा गुजरात, झारखंड, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, नगालैंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, मेघालय और पश्चिम बंगाल ने अपने राज्य में ‘जेम’ के माध्यम से खरीद को अनिवार्य करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सी• आर• चौधरी ने लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
॥■॥ आदर्श दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम
आदर्श दुकान एवं प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) विधेयक, 2016 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं :
(i) आदर्श विधेयक विनिर्माण के अलावा दस या अधिक कामगारों को नियोजित करने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों पर लागू होता है,
(ii) वर्ष में 365 दिन परिचालन करने तथा प्रतिष्ठानों को खोलने/बंद करने की स्वतंत्रता,
(iii) महिलाओं को रात्रि-पाली के दौरान काम करने की अनुमति दी जाए यदि आश्रय, विश्राम कक्ष, महिला शौचालय, उनकी गरिमा का पर्याप्त संरक्षण और परिवहन आदि की व्यवस्थाएं विद्यमान हों,
(iv) भर्ती, प्रशिक्षण, स्थानांतरण या पदोन्नतियों में महिलाओँ से कोई भेदभाव न हो,
(v) सरलीकृत कार्यप्रक्रिया के माध्यम से ऑनलाइन एक ही पंजीकरण,
(vi) पृथक प्रतिष्ठानों द्वारा स्थान की बाध्यता अथवा अन्यथा के कारण संभव न होने की स्थिति में प्रतिष्ठानों समूह द्वारा कामगारों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य, साफ और सुरक्षित पेय जल, प्राथमिक उपचार, शौचालय, शिशु-सदन और कैंटीन के लिए नियोजक द्वारा किए जाने वाले पर्याप्त उपायों के संबंध में नियम बनने हेतु समुचित सरकार को शक्ति देना,
(vii) राष्ट्रीय अवकाशों के अलावा पांच वैतनिक पर्व अवकाश आदि।
दुकानें या प्रतिष्ठान सप्ताह के सातों दिन इस शर्त के अध्ययधीन कार्यरत रह सकते हैं कि प्रत्येक कामगार को कम-से-कम चौबीस घंटे के लगातार विश्राम हेतु साप्ताहिक अवकाश की अनुमति दी जाए। यदि किसी कामगार को साप्ताहिक अवकाश से वंचित किया जाता है, तो उसके बदले दो महीने के भीतर प्रतिपूरक छुट्टी दी जाए तथा यदि कामगारों से विश्राम के दिन काम लेना अपेक्षित हो, तो वे उनकी मजदूरी की सामान्य दर से दोगुनी दर पर मजदूरी पाने के हकदार होंगे।
किसी भी वयस्क कामगार से अपेक्षित नहीं होगा या उसे अनुमति नहीं होगी कि वह किसी दुकान या प्रतिष्ठान में किसी सप्ताह में 48 घंटे से अधिक तथा दिन में नौ घंटे से अधिक काम करे तथा किसी भी कामगार से लगातार 5 घंटे से अधिक समय तक काम करने के लिए नहीं कहा जाएगा जब तक कि उसे आधे घंटे तक का अवकाश न दिया गया हो। इन उपबंधों के गैर-अनुपालन के लिए विधेयक में पर्याप्त दाण्डिक उपबंध बनाए गए हैं।
किसी भी महिला से अपेक्षित नहीं होगा या उसे अनुमति नहीं होगी कि वह किसी दुकान या प्रतिष्ठान में सुबह 6 बजे और रात 9 बजे के बीच के समय के अलावा, किसी सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करे। महिला कामगारों को रात की पाली में काम करने की अनुमति दी जाए यदि राज्य सरकार संतुष्ट हो कि आश्रय, विश्राम कक्ष, महिला शौचालय, रात्रि शिशु-सदन, उनकी गरिमा, सम्मान का पर्याप्त संरक्षण और सुरक्षा तथा परिवहन आदि की पर्याप्त व्यवस्थाएं विद्यमान हैं।
उक्त जानकारी केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
॥■॥ स्वदेशी स्तर पर रक्षा उपकरणों का विनिर्माण
संभावित खतरों, परिचालन चुनौतियों तथा तकनीकी बदलावों के मद्देनजर समूचे रक्षा परिदृश्य की चुनौतियों से निबटने के लिए सेना को पूरी तरह तैयार करने के लिए रक्षा उपकरणों का पूंजीगत अधिग्रहण विभिन्न घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय वेंडरों से रक्षा खरीद प्रक्रिया की व्यवस्थाओं के तहत किया जाता है।
सीजीडीए की ओर से उपलब्ध कराए गए आकंड़ो के अनुसार सेना के तीनों अंगों द्वारा पिछले तीन सालों में घरेलू तथा विदेशी वेंडरों द्वारा रक्षा उपकरणों की खरीद पर किये गये कुल खर्च का ब्यौरा इस प्रकार है।:-
(करोड़ रूपए में ) पूंजीगत अधिग्रहण
#वर्ष
भारतीय वेंडरों से खरीद
प्रतिशत (%)
विदेशी वेंडरों से खरीद
प्रतिशत (%)
कुल खरीद
#2015-16
39149
62.80
23192
37.20
62341
#2016-17
41872
60.55
27278
39.45
69150
#2017-18
43697
60.08
29035
39.92
72732
रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) रक्षा उपकरणों, प्लेटफार्मों, प्रणालियों और उप-प्रणालियों के स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल को प्रोत्साहित करने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया को संस्थागत बनाने, सुव्यवस्थित करने और सरल बनाने पर केंद्रित है। सरकार के 'मेक इन इंडिया' पहल के मुख्य उद्देश्यों को कई नीतिगत उपायों के माध्यम से महसूस किया जा रहा है जिनमें शामिल हैं: -
• मेक टू के लिए एक पृथक उप श्रेणी अधिसूचित की गयी है जिसमें मान्यता की शर्तों में नरमी, आवश्यक दस्तावेजों की संख्या कम से कम रखने तथा उद्योंगों तथा व्यक्तियों द्वारा स्वत दिए गए प्रस्ताव जैसी सहूलियतों को शामिल किया गया है।
• पूंजीगत अधिग्रहण के लिए मेक टू – उप श्रेणी के तहत स्वत: दिए गए प्रस्तावों पर विचार के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया का अनुपालन।
• रक्षा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं, प्रक्रियाओं और नियामक जरूरतों से संबंधित सभी जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए रक्षा मंत्रालय में अलग से एक निवेशक प्रकोष्ठ की स्थापना।
• निर्यात मंजूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित पारदर्शी और ऑनलाइन बनाया गया है।
• देश के रक्षा उद्योग के आधर को मजबूत बनाना एक सतत प्रक्रिया है। सरकार इसे आवश्यकताओं और संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर चलाती है। आर्थिक विकास के इंजन के तौर पर देश में रक्षा उद्योग के आधार को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में दो औद्योगिक रक्षा गलियारे बनाए जाने का फैसला लिया गया। एक रक्षा गलियारा तमिलनाडु में चेन्नई से होसूर, कोयंबटूर, सेलम होता हुआ तिरुचिराप्पल्ली तक दूसरा उत्तर प्रदेश (यूपी) में अलीगढ़ से आगरा, झांसी, कानपुर, चित्रकूट और लखनऊ तक होगा।
• रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवोन्मेषण शीर्षक से एक नई योजना का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 12 अप्रैल, 2018 को डिफेंस एक्सपो 2018 में शुभारंभ किया गया। इसका मुख्य लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना है। इसके अलावा इस प्रक्रिया में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों, स्टार्टअपस, अनुसंधान और विकास कार्यों से जुड़ी संस्थाओं तथा शिक्षण समुदाय को जोड़ना है और उन्हें नवाचार से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिए वित्तीय मदद की व्यवस्था करना है।
• ऑफसेट से जुड़े दिशा-निर्देशों को लचीला बनाया गया है। इसके लिए ऑफसेट साझेदार और ऑफसेट उपकरणों के लिए लिखित अनुबंधों में भी बदलाव किया गया है। मूल विदेशी उपकरण बनाने वाले निर्माताओं को अब अनुबंध पर हस्ताक्षर करते समय ऑफसेट साझेदारों और उत्पादों का ब्यौरा नहीं देना पड़ेगा।
• निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए डीपीएसयू और ओएफबी के लिए आउटसोर्सिंग और वेंडर डेवलपमेंट दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।इसके तहत प्रत्येक डीपीएसयू तथा ओएफबी के लिए आउटसोर्सिंग और वेंडर डेवलपमेंट के वास्ते मध्यावधि और दीर्घावधि योजना बनाना अनिवार्य बनाया गया है ताकि निजी क्षेत्र से आउटसोर्सिंग को बढ़ावा मिले।
• रक्षा खरीद प्रक्रिया में 2016 में संशोंधन किया गया और घरेलू रक्षा उद्योग के विकास के लिए इसमें विशेष व्यवस्थाएं की गई।
नई नीति में स्वदेशी डिजाइन विकास और विर्निर्माण खरीद की एक नई श्रेणी जोड़ी गई है। इसका उद्देश्य स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और विकसित किए गए रक्षा उपकरणों की खरीद को प्रोत्साहित करना है।
यह जानकारी रक्षा राज्य मंत्री डॉ• सुभाष भामरे ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
॥■॥ ईपीएफओ के 117 जिला कार्यालयों/सेवा केन्द्रों का उन्नयन
ईपीएफओ ने देश में विभिन्न स्थानों पर 117 जिला कार्यालयों/सेवा केन्द्रों का उन्नयन किया है। पूर्ण विवरण संलग्न है -
अनुलग्नक
ईपीएफओ के जिला कार्यालयों/सेवा केन्द्रों
क्र•सं•
राज्य
जिला कार्यालयों की संख्या
1
आंध्रप्रदेश
11
2
अरुणाचल प्रदेश
1
3
असम
4
4
बिहार
5
5
छत्तीसगढ़
1
6
गुजरात
8
7
हरियाणा
5
8
हिमाचल प्रदेश
4
9
झारखंड
7
10
कर्नाटक
8
11
केरल
5
12
मध्य प्रदेश
6
13
महाराष्ट्र
4
14
मणिपुर
1
15
मिजोरम
1
16
नागालैंड
1
17
ओडिशा
5
18
पंजाब
7
19
राजस्थान
8
20
सिक्किम
1
21
तमिलनाडु
13
22
तेलंगाना
2
23
त्रिपुरा
1
24
उत्तरप्रदेश
4
25
पश्चिम बंगाल
4
कुल
117
उक्त जानकारी केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।