शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम



नई दिल्ली, 26 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

सरकार समाज के सभी वर्गों तक सर्वोत्तम शिक्षा की पहुंच सुनिश्चि कराने के लिए प्रतिबद्ध है और मंत्रालय की परिकल्पना है कि शिक्षा के क्षेत्र में न्यायसंगत समावेशन के साथ भारत के मानव संसाधन की क्षमता का पूर्ण विकास हो। मानव संसाधन विकास मंत्रालय साक्षरता एवं युवाओं की बुनियादी शिक्षा को बढ़ाने और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सहित शिक्षा के हर स्तर तक पहुंच के विस्तार के उद्देश्य से कई योजनाएं चला रहा है।

इस दिशा में सरकार कई योजनाएं चला रही हैं। जैसे कि प्राथमिक शिक्षा में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आईटीई) अधिनियम 2009 और सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम। इनका उद्देश्य स्कूल के संरचनात्मक ढांचे, पाठ्यक्रम एवं आकलन में सुधार, शिक्षा संकेतकों की पहचान, संशोधित शिक्षा व्यवस्था के जरिए बेहतर शिक्षा के नतीजे लाना है। माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए), स्कूलों में आईसीटी, केंद्र प्रायोजित शिक्षक शिक्षा योजना (सीएसएसटीई), शाला सिद्धि, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल ही में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने केंद्र प्रायोजित योजना के रुप में समग्र शिक्षा- स्कूली शिक्षा के लिए एकीकरण योजना शुरू की है और यह वर्ष 2018-19 से पूरे देश में चलाया जा रहा है।

उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (आरयूएसए), एकेडमिक नेटवर्क के लिए ग्लोबल पहल (जीआईएएन), इम्पैक्टिंग रिसर्च, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी (आईएमपीआरआईएनटी) जैसे कई अन्य कार्यक्रम उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए चलाए जा रहे हैं। उच्च और तकनीकी शिक्षा में सुधार के लिए यूजीसी और एआईसीटीई भी कई कार्यक्रम चला रहे हैं।


॥●॥ समग्र शिक्षा-स्कूचली शिक्षा के सभी स्ततरों पर समावेशी और न्यापयसंगत गुणवत्ताक शिक्षा सुनिश्चित करने की एकीकृत योजना

भारत सरकार ने 2018-19 में समग्र शिक्षा- स्‍कूली शिक्षा के लिए एक एकीकृत योजना लांच की। यह स्‍कूल पूर्व से 12वीं कक्षा तक स्‍कूल शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्‍वकांक्षी कार्यक्रम है। इसका उद्देश्‍य स्‍कूल शिक्षा के सभी स्‍तरों पर समावेशी और न्‍यायसंगत गुणवत्‍ता शिक्षा सुनिश्चित करना है। इस योजना में स्‍कूल की परिकल्‍पना निरंतरता के रूप में की गई है। पूर्व प्राइमरी, अपर प्राइमरी, माध्‍यमिक से उच्‍च माध्‍यमिक को स्‍कूल माना गया है और इसमें पहले की केंद्र की प्रायोजित योजनाएं – सर्व शिक्षा अभियान(एसएसए), राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) तथा शिक्षक शिक्षा (टीई) – शामिल हैं।

योजना का एक प्रमुख उद्देश्‍य स्‍कूल शिक्षा के सभी स्‍तरों पर लैंगिक और सामाजिक खाई को पाटना है। योजना की पहुंच अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्‍पसंख्‍यक समुदाय की लड़कियों और बच्‍चों तक है। योजना में शहरी वंचित बच्‍चों, समय-समय पर एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर जाने से प्रभावित बच्‍चों तथा दूरदराज और छिटपुट आबादियों में रहने वाले बच्‍चों पर भी ध्‍यान दिया गया है।

समग्र शिक्षा योजना ग्रामीण क्षेत्रों सहित राज्‍यों को स्‍कूल अवसंरचना मजबूत बनाने में समर्थन देती है। योजना में शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) द्वारा अंतर आधार पर निर्धारित वर्तमान स्‍कूलों की अवसंरचना को मजबूत बनाने का प्रावधान है। इसमें संबंधित राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेशों से मिले प्रस्‍ताव भी शामिल हैं। योजना में वर्तमान स्‍कूल भवनों, शौचालयों तथा स्‍कूल अवसंरचना को उन्‍नत बनाए रखने के लिए अन्‍य सुविधाओं के वार्षिक रखरखाव और मरम्‍मत का भी प्रावधान है।

वर्ष 2001 में केंद्र प्रायोजित योजना, सर्वशिक्षा अभियान के प्रारंभ होने से 31.03.2018 तक 3.2 लाख स्‍कूल भवन, 18.87 लाख अतिरिक्‍त क्‍लास रूम, 2.42 लाख पेयजल सुविधा का प्रावधान, लड़कों के लिए 3.95 लाख शौचालय, लड़कियों के लिए 5.8 लाख शौचालय तथा 1.41 लाख सीडब्‍ल्‍यूएसएन शौचालय राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्‍वीकृत किए गए है। इसमें से राज्‍य और केंद्रशासित प्रदेशों ने 2.94 लाख स्‍कूल निर्माण, 18.3 लाख अतिरिक्‍त क्‍लास रूम निर्माण, 2.35 लाख पेयजल सुविधा, लड़कों के लिए 3.76 लाख शौचालय, लड़कियों के लिए 5.07 लाख शौचालय तथा 1.21 लाख सीडब्‍ल्‍यूएसएन शौचालयों के निर्माण की जानकारी दी है।


॥●॥ पिछले तीन वर्षों में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना पर 282 करोड़ रुपये की कुल राशि खर्च की गई

पिछले तीन वर्षों के साथ-साथ वर्तमान वर्ष के दौरान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना पर खर्च की गई धनराशि का ब्योरा नीचे दिया गया हैः

क्र•सं•
वित्त वर्ष
खर्च की गई धनराशि (करोड़ रुपये में)

1
2015-16
59.37

2
2016-17
28.65

3
2017-18
169.10

4
2018-19
25.40*

* 20.07.2018 तक

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) संबंधी आंकड़ों के अनुसार, बीबीबीपी के तहत चयनित 161 जिलों में से 104 जिलों (एक जिले में स्थिरता का रुख) में वर्ष 2015-16 से लेकर वर्ष 2016-17 तक की अवधि के बीच ‘जन्म के समय बालक-बालिका अनुपात’ में सुधार का रुख देखा गया है।


॥●॥ पिछले 3 वर्षों के दौरान कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए कुल 170426 स्कूलों को अनुमति

भारत सरकार, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की केन्द्र द्वारा प्रायोजित पूर्व योजना के तहत लड़कियों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण को प्रोत्साहन देती रही है। आत्मरक्षा प्रशिक्षण स्कूलों में और उसके बाहर लड़कियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए दी जाती है, ताकि आपातस्थिति में लड़कियों में आत्मविश्वास पैदा हो।

केन्द्र सरकार ने स्कूली शिक्षा के लिए 2018-19 से प्रभावी समग्र शिक्षा नामक एक समेकित योजना शुरू की थी। इसमें स्कूली शिक्षा के लिए केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं को समाहित कर दिया गया है। इनमें सर्वशिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजना शामिल हैं। समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत लड़कियों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके लिए कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं वाले स्कूलों को प्रति स्कूल की दर से 9000 रुपये दिए जाते हैं।

पिछले 3 वर्षों के दौरान कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए जिन स्कूलों को अनुमति दी गई है, उनका ब्यौरा इस प्रकार है-

वर्ष
स्वीकृत स्कूलों की संख्या
स्वीकृत धनराशि (लाख रुपये में)

2015-16
49517
4062.02

2016-17
57500
4880.75

2017-18
63409
5580.81


॥●॥ पाठ्यक्रम का दबाव और स्कूल बैग का भार कम करने के लिए

सरकार ने पाठ्यक्रम के दबाव और स्कूल बैग के भार को कम करने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं। इस दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदम निम्नलिखित हैं:

• राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने वर्ग 1 और 2 के लिए सिर्फ दो पुस्तकें (भाषा और गणित) और वर्ग 3 से लेकर वर्ग 5 तक के लिए तीन पुस्तकें (भाषा, पर्यावरण अध्ययन और गणित) की अनुशंसा की है। एनसीईआरटी ने उनके पाठ्यक्रम वेब (इपाठशालाडॉटनिकडॉटइन) और मोबाइल साधनों के जरिए मुफ्त में उपलब्ध भी कराए हैं।

• केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी सम्बद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि वर्ग 2 तक बच्चों को स्कूल बैग न लाना पड़े। 12 सितंबर, 2016 को अपने नवीनतम सर्कुलर में सीबीएसई ने सभी सम्बद्ध स्कूलों को सलाह दी है कि बच्चों के स्कूल बैग के भार को नियंत्रण में रखने के लिए वे हर संभव उपाय करें।

• केंद्रीय विद्यालय संगठन ने स्कूल बैग का भार करने के उद्देश्य से 25 केंद्रीय विद्यालयों (प्रत्येक क्षेत्र से 1 केंद्रीय विद्यालय) के वर्ग- 7 के सभी छात्रों में 5000 टैबलेट के वितरण के साथ एक प्रायौगिक परियोजना ई-प्रज्ञा को लागू किया है।

शिक्षा के संविधान की समवर्ती सूची में शामिल होने और ज्यादातर स्कूलों के राज्य सरकारों के अधीन होने की वजह से यह संबंधित राज्य / केंद्र शासित प्रदेश सरकारों का काम है कि वो अपने मातहत स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के स्कूल बैग का भार कम करने के लिए उचित कदम उठाए।

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