खबरें रेल मंत्रालय से...



नई दिल्ली, 06 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) रेल मंत्रालय ने यात्रियों की पहचान प्रमाण के रूप में डिजिटल लॉकर से डिजिटल आधार तथा ड्राइविंग लाइसेंस को मंजूरी दी

रेल मंत्रालय ने डिजिटल लॉकर से वैध पहचान प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किये जाने वाले आधार और ड्राइविंग लाइसेंस के विषय की समीक्षा की है और यह निर्णय लिया गया है कि ट्रेन में यात्रा करते समय यात्री अपने डिजिटल लॉकर एकाउंट के ‘जारी दस्तावेज’ सेक्शन से आधार/ ड्राइविंग लाइसेंस दिखाते हैं तो इन पहचानों को वैध प्रमाण माना जाएगा लेकिन यह स्पष्ट किया जाता है कि यूजर द्वारा ‘अपलोडेड डॉक्यूमेंट’ में अपलोड किये गए दस्तावेज पहचान के वैध प्रमाण नहीं माने जायेंगे।

फिलहाल भारतीय रेल की किसी भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा करने के लिए निम्नलिखित पहचान प्रमाण पत्र वैध माने जाते हैं –

• भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी फोटो युक्त पहचान पत्र
पासपोर्ट

• आयकर विभाग द्वारा जारी पैनकार्ड

• आरटीओ द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस

• केंद्र/राज्य सरकार द्वारा जारी क्रम संख्या वाला फोटो युक्त पहचान पत्र

• मान्यता प्राप्त स्कूल/ कॉलेज द्वारा अपने विद्यार्थियों के लिए फोटो युक्त पहचान पत्र

• फोटो के साथ राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक

• लैमिनेटिड फोटो के साथ बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड

• आधार, एम आधार तथा ई-आधार कार्ड

• राज्य/ केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान, जिला प्रशासन, पालिका प्रशासन तथा पंचायत द्वारा क्रमसंख्या के साथ जारी फोटो पहचान पत्र

• कम्प्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) केंद्रों द्वारा बुक किये गए आरक्षित टिकटों के मामलें में शयनयान तथा द्वितीय आरक्षित सीटिंग श्रेणियों में यात्रा करने के लिए फोटो के साथ राशनकार्ड की फोटो कॉपी, फोटो के साथ राष्ट्रीयकृत बैंक के पासबुक को स्वीकार किया जाएगा।


(●) पूर्व तट रेलवे ने संबलपुर डिविजन में एक दिन में सबसे अधिक-6 सीमित ऊंचाई वाले सब-वे (एलएचएस) को लांच किया

संबलपुर डिविजन ने सभी मानवरहित रेल क्रॉसिंग को समाप्‍त करने के उद्देश्‍य से पूर्व तट रेलवे ने 6 सीमित ऊंचाई वाले सब-वे को लांच किया है और इसे 5 जुलाई, 2018 को साढ़े चार घंटों की अल्‍प अवधि में पूरा किया है। 6 सीमित ऊंचाई वाले सब-वे का निर्माण न सिर्फ पूर्व तट रेलवे के संबलपुर डिविजन में बल्कि यह पूरे भारतीय रेल में अपनी तरह का पहला उदाहरण है।

6 सीमित ऊंचाई वाले सब-वे को लांच करने के साथ ही ओडिसा के कालाहांडी क्षेत्र में स्थित भवानीपटना-लंजीगढ़ सड़क खण्‍ड में 7 मानवरहित लेवल क्रॉसिंग गेट बंद कर दिए जाएंगे।

चार घंटे में एक एलएचएस का निर्माण ही अपने आप में एक उपलब्धि है। इतनी सीमित अवधि में 6 एलएचएस का निर्माण ऐसा वाक्‍या है, जो पहले कभी नहीं सुना गया। 6 एलएचएस को लांच करने में कई चुनौतियां थीं और मानसून का मौसम होने के बावजूद संबलपुर डिविजन ने चुनौती को अवसर में बदल दिया और एक ही बार में 6 एलएचएस को लांच करने का कार्य पूरा किया। इस प्रकार यह निर्माण भारतीय रेल के इतिहास में एक मील का पत्‍थर साबित हुआ।

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