नई दिल्ली, 05 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● गिरीश पिल्लई ने रेल बोर्ड के नए सदस्य ट्रेफिक का कार्यभार संभाला
गिरीश पिल्लई ने 01 जुलाई, 2018 को रेल बोर्ड के नए सदस्य ट्रैफिक का कार्यभार संभाल लिया। श्री पिल्लई इससे पहले 1 सितंबर, 2016 से 30 जून, 2018 तक पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर के महाप्रबंधक थे। वह 1980 बैच के भारतीय रेल यातायात सेवा (आईआरटीएस) के अधिकारी हैं। वह जनवरी 1982 में भारतीय रेल में शामिल हुए। गिरीश पिल्लई ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमएससी (गणित) तथा एम•फिल किया है।
गिरीश पिल्लई ने भारतीय रेल में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। इनमें अपर सदस्य (पर्यटन और कैटरिंग) सलाहकार (अवसंरचना) रेल बोर्ड, मुख्य संचालन प्रबंधक पश्चिम रेलवे, मंडलीय रेल प्रबंधक, मुंबई मंडल, पश्चिम रेलवे कार्यकारी निदेशक (नियोजन), रेल बोर्ड मुख्य यात्री परिवहन मैनेजर, पश्चिम रेलवे, मुख्य यातायात नियोजन प्रबंधक, पश्चिम रेलवे तथा सेंट्रल स्टाफिंग येाजना के अंतर्गत समुद्र विकास विभाग में निदेशक तथा क्षेत्रीय रेलों में विभिन्न पद शामिल हैं।
गिरीश पिल्लई को भारतीय रेल के विभिन्न विभागों का अच्छा ज्ञान और अनुभव है इनमें कॉरपोरेट प्लान, नीति तथा नियोजन विषय, अंतर्राष्ट्रीय समझौते तथा प्रोटोकोल, परियाजना विकास तथा संबंधित अध्ययन, भारतीय रेल की प्रमुख संरचना योजनाओं का नियेाजन, रेलवे के लिए पंचवर्षीय योजना, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, रेलवे में सावर्जनिक-निजी भागीदारी और एफडीआई शामिल हैं।
● रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने पश्चिम रेलवे में रतलाम संभाग के ट्रैकमैन बलवंत को सम्मानित किया
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने आज रेल भवन में पश्चिम रेलवे में रतलाम संभाग के ट्रैकमैन बलवंत को सम्मानित किया। बलवंत ने रतलाम संभाग में थांडला-बजरंग गढ़ स्टेशन पर पुल के गिरते रोड़ा को देखकर एक गंभीर दुर्घटना को टाल दिया था। उनका मनोबल बढ़ाने और उनकी प्रशंसा के तौर पर उन्हें एक प्रशस्ति पत्र और 5000 रुपये का नकदी पुरस्कार दिया गया। बलवंत और उनके परिवार को फर्स्ट क्लास एसी यात्रा पास और नई दिल्ली में ठहरने के लिए एसी आवास दिया गया।
पहली जुलाई, 2018 की शाम लगभग 7 बजे बलवंत अपनी ड्यूटी पूरी कर अपने मुख्यालय लौट रहे थे। उन्होंने थांडला और बजरंग गढ़ स्टेशनों के बीच पुल संख्या 178 (18.3 मीटर लंबा) के रोड़े गिरते देखा। उन्होंने बड़ी सूझ-बूझ दिखाते हुए तत्काल रेल की पटरियों को भारी क्षति से बचा लिया और फिर अपने वरिष्ठ अधिकारी सीनियर सेक्शन इंजीनियर/पाथवे को इस बारे में बताया। इस पर प्राथमिकता के आधार पर पुल को पहले जैसा बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए। इस प्रकार बलवंत की सतर्कता और मुस्तैदी से एक गंभीर दुर्घटना टल गई।