सीबीएसई की शिक्षा व परीक्षा व्‍यवस्‍था में दिव्‍यांग बच्‍चों के लिए व्‍यापक नीति बनाने के उद्देश्‍य से विचार-विमर्श सत्र



नई दिल्ली, 05 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● सीबीएसई की शिक्षा व परीक्षा व्‍यवस्‍था में दिव्‍यांग बच्‍चों के लिए व्‍यापक नीति बनाने के उद्देश्‍य से विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया गया

केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड ने 4 जुलाई, 2018 को आईटीएल पब्‍लिक स्‍कूल, द्वारका में शिक्षा व परीक्षा व्‍यवस्‍था में दिव्‍यांग बच्‍चों के लिए व्‍यापक नीति बनाने के उद्देश्‍य से एक विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। राज्‍य स्‍कूल शिक्षा बोर्ड, एनआईओएस, आईसीएसई, इग्‍नू, एनसीईआरटी, विभिन्‍न राज्‍यों के ओपन स्‍कूल, एनजीओ के प्रतिनिधियों तथा प्राचार्यों, अभिभावकों ने इस परिचर्चा में भाग लिया। संकेत भाषा का एक विशेषज्ञ भी इस परिचर्चा में उपस्‍थित था।

सीबीएसई की अध्‍यक्ष अनिता करवाल ने अपने संबोधन में बोर्ड द्वारा दिव्‍यांग बच्‍चों को दी जाने वाली सुविधाओं का ब्‍यौरा दिया। निदेशक, अकादमी डॉ• सन्‍यम भारद्वाज ने बोर्ड द्वारा दिव्‍यांग बच्‍चों को दी जाने वाली सुविधा और छूट का जिक्र किया।

अलीपुर, दिल्‍ली की एसडीएम ईरा सिंघल विशेष आमंत्रित अतिथि थीं। वे स्‍वयं एक दिव्‍यांगजन हैं। उन्‍होंने 2015 की यूपीएससी परीक्षा में सर्वोच्‍च स्‍थान प्राप्‍त किया था।

प्रतिभागियों को परिचर्चा के लिए छह कार्यकारी समूहों में बांटा गया।

समूह-1 लोकोमोटर विकलांगता, कुष्ठ रोगग्रस्त व्यक्तियों और सेरेब्रल पाल्सी।

समूह-2 बौनावाद, मांसपेशी डिस्ट्रॉफी और एसिड अटैक के पीड़ित

समूह-3 श्रवण व दृष्‍टिबाधित

समूह-4 विशिष्ट लर्निंग विकलांगता, बौद्धिक विकलांगता, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और मानसिक बीमारी।

समूह-5 साइरोरोसिस, पार्किंसंस रोग, हैमोफिलिया, थैलेसेमिया, सिकल सेल रोग

समूह-6 दिव्‍यांग बच्‍चों के शिक्षण में तकनीक की भूमिका।

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