नई दिल्ली, 04 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(■) मंत्रिमंडल ने सर्वे संख्या 408, जालंधर कैंट में केंद्रीय विद्यालय के निर्माण के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन को 7.5 एकड़ रक्षा भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वे संख्या 408, जालंधर कैंट में केंद्रीय विद्यालय नं• 04 के निर्माण के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन को 1 रुपये प्रति वर्ष के मामूली किराए के साथ पट्टे पर 7.5 एकड़ ए-1 रक्षा भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है।
• पृष्ठभूमि : फिलहाल जालंधर कैंट के केंद्रीय विद्यालय नं• 04 का संचालन जालंधर के सर्वे संख्या 408 में कुलवंत हॉल के सामने एमईएस भवन तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर 1987 से हो रहा है। यह 26 एकड़ ए-1 रक्षा भूमि में विस्तृत है। फिलहाल, जालंधर कैंट के केंद्रीय विद्यालय नं• 04 में कुल 1346 बच्चे पढ़ रहे है। केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा खुद के स्थायी विद्यालय भवन के निर्माण से स्कूल प्रशासन को वहां कार्यरत कर्मियों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ईष्टतम बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी। विद्यालय भवन का निर्माण पूरा होने के बाद शेष 18.5 एकड़ भूमि सेना को हस्तांतरित कर दी जाएगी।
(■) मंत्रिमंडल ने तवांग में सशस्त्र सीमा बल की 5.99 एकड़ भूमि अरुणाचल प्रदेश सरकार को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तवांग में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 5.99 एकड़ भूमि मेगा-फेस्टिवल-कम-मल्टीपरपस ग्राउंड के निर्माण के लिए अरुणाचल प्रदेश सरकार को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है।
अरुणाचल प्रदेश सरकार ने पार्किंग सुविधा (4.73 एकड़) और रिंग रोड निर्माण (1.26 एकड़) के साथ मेगा-फेस्टिवल-कम-मल्टीपरपस ग्राउंड के निर्माण के लिए तवांग में एसएसबी परिसर के भीतर 5.99 एकड़ उपयुक्त भूमि की पहचान की थी। तदनुसार, राज्य सरकार ने इस 5.99 एकड़ भूमि को हस्तांतरित करने का आग्रह किया था।
भारत सरकार (पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय) मार्च, 2016 में अरुणाचल प्रदेश के तवांग में पार्किंग सुविधा और संपर्क सड़क के साथ मेगा-फेस्टिवल-कम-मल्टीपरपस ग्राउंड के निर्माण के लिए परियोजना पहले ही आवंटित कर दी थी। इस मेगा-फेस्टिवल-कम-मल्टीपरपस ग्राउंड का इस्तेमाल विभिन्न पर्यटन उत्सवों/त्योहारों आदि के आयोजन के लिए किया जाएगा।
(■) मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पुनर्पूंजीकरण योजना को 2019-20 तक विस्तार देने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की पुनर्पूंजीकरण योजना को अगले तीन वर्षों अर्थात् 2019-20 तक विस्तार देने की मंजूरी दी है। इसके माध्यम से आरआरबी को न्यूनतम निर्धारित पूंजी को 9 प्रतिशत के जोखिम परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) पर बनाये रखने में सहायता मिलेगी।
प्रभाव : एक मजबूत पूंजीगत संरचना और सीआरएआर के न्यूनतम स्तर से आरआरबी की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी। इसके माध्यम से आरआरबी वित्तीय समावेश में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने और ग्रामीण क्षेत्रों की पूंजीगत जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे।
विवरण : देश में 56 आरआरबी कार्यरत हैं। 31 मार्च, 2017 तक आरआरबी ने कुल 2,28,599 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। ऋण की प्रमुख श्रेणियां निम्न हैं -
विवरण
ऋण राशि (करोड़ रुपये में)
कुल ऋण का प्रतिशत
प्राथमिकता क्षेत्र के कुल ऋण (पीएसएल)
2,05,122
89.73 प्रतिशत
कृषि (पीएसएल के अंतर्गत)
1,54,322
67.51 प्रतिशत
छोटे व सीमांत किसान (कृषि के अंतर्गत)
1,02,791
44.97 प्रतिशत
(स्रोत: नाबार्ड)
आरआरबी की पुनर्पूंजीकरण योजना की शुरूआत वित्त वर्ष 2010-11 में हुई थी और इसे 2012-13 तथा 2015-16 में दो बार विस्तार दिया गया। अंतिम विस्तार 31 मार्च, 2017 तक के लिए था। कुल 1450 करोड़ रुपये में से भारत सरकार के हिस्से के रूप में 31 मार्च, 2017 तक कुल 1107.20 करोड़ रुपये की धनराशि आरआरबी को जारी की गई। शेष 342.80 करोड़ रुपये की धनराशि उन आरआरबी के पुनर्पूंजीकरण सहयोग के लिए उपलब्ध करायी जाएगी जिनका सीआरएआर 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के दौरान 9 प्रतिशत से कम था।
नाबार्ड के परामर्श से उन आरआरबी की पहचान की जाएगी जिन्हें पुनर्पूंजीकरण की आवश्यकता है। यह व्यवस्था वित्त मंत्री द्वारा 2018-19 के बजट घोषणा के अतिरिक्त होगी। बजट घोषणा में वित्तीय रूप से मज़बूत आरआरबी को भारत सरकार, राज्य सरकार और प्रायोजक बैंक स्रोतों के अलावा अन्य स्रोतों से पूंजी निर्माण की स्वीकृति दी गई थी।
पृष्ठभूमि : आरआरबी की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे व सीमांत किसानों, कृषि-श्रमिकों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को ऋण व अन्य सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से की गईं थीं। इनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, व्यापार, वाणिज्य, उद्योग व अन्य उत्पादक गतिविधियों का विकास करना है। आरआरबी भारत सरकार, संबंधित राज्य सरकार तथा प्रायोजक बैंक का एक संयुक्त उद्यम है जिसमें इनका पूंजी निवेश क्रमश: 50 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 35 प्रतिशत है।
(■) मंत्रिमंडल ने दिल्ली कैंट के कंधार लाइंस के केन्द्रीय वि़द्यालय नं•- 4 के निर्माण के लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन को पट्टे के आधार पर 4 एकड़ रक्षा भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली कैंट के कंधार लाइंस के केन्द्रीय वि़द्यालय नं•- 4 के निर्माण के लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) को 1 रुपये प्रति वर्ष के मामूली किराए के साथ पट्टे पर 4 एकड़ रक्षा भूमि हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है।
पृष्ठभूमि : वर्तमान में दिल्ली कैंट में केन्द्रीय वि़द्यालय नं•- 4 का संचालन सर्वे संख्या-14, दिल्ली कैंट के भवन में तात्कालिक आधार पर 1994 में उसकी स्थापना से ही किया जा रहा है। फिलहाल इस विद्यालय में 956 बच्चे पढ़ रहे हैं। केन्द्रीय वि़द्यालय संगठन द्वारा खुद के स्थायी विद्यालय भवन के निर्माण से विद्यालय कर्मियों के बच्चों एक्स सर्विस मैन, पूर्व सैनिकों के परिवारों और दिल्ली कैंट के आसपास के आम लोगों के बच्चों के लिए उपयुक्त शैक्षणिक माहौल एवं जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
(■) मंत्रिमंडल ने त्रिपुरा के अगरतला हवाई अड्डे का नाम बदलकर महाराजा बीर विक्रम माणिक्य किशोर हवाई अड्डा, अगरतला करने की मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने त्रिपुरा के अगरतला हवाई अड्डे का नाम बदलकर महाराजा बीर विक्रम माणिक्य किशोर हवाई अड्डा, अगरतला करने की मंजूरी दी। यह निर्णय, त्रिपुरा के लोगों की लम्बे समय से चली आ रही मांग तथा त्रिपुरा सरकार द्वारा महाराजा बीर विक्रम माणिक्य किशोर को श्रद्धांजलि देने के आलोक में लिया गया।
पृष्ठभूमि : महाराजा बीर विक्रम माणिक्य किशोर 1923 में त्रिपुरा राज्य के राजा बने। वे एक विद्वान और विन्रम शासक थे। महाराजा बीर विक्रम माणिक्य किशोर द्वारा दान में दिये गये जमीन पर 1942 में अगरतला हवाई अड्डे का निर्माण किया गया। एक दूर दृष्टि वाले शासक के रूप में महाराजा ने पूरे विश्व की यात्रा की और त्रिपुरा के चहुंमुखी विकास के लिए कई कदम उठाए। उनके प्रयासों से अगरतला में एक एरोड्रोम का निर्माण हुआ, जो वर्तमान में पूर्वोत्तर क्षेत्र का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। यह त्रिपुरा को हवाई मार्ग से जोड़ता है। इसलिए यह उचित है कि उनके नाम पर अगरतला हवाई अड्डे का नाम रखा जाए और यह महाराजा बीर विक्रम माणिक्य किशोर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
(●) कैबिनेट ने डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक-2018 को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक-2018 को मंजूरी दे दी है।
• विवरणः
‘डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक’ को कानून बनाए जाने के पीछे प्राथमिक उद्देश्य देश की न्यायिक प्रणाली को समर्थन देने एवं सुदृढ़ बनाने के लिए डीएनए आधारित फोरेन्सिक प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग को विस्तारित करना है।
आपराधों के समाधान एवं गुमशुदा व्यक्तियों की पहचान के लिए डीएनए आधारित प्रौद्योगिकियों की उपयोगिता दुनियाभर में स्वीकृत है।
डीएनए प्रयोगशालाओं के अनिवार्य प्रत्यायन एवं विनियमन के प्रावधान के जरिए इस विधेयक में इस प्रौद्योगिकी का देश में विस्तारित उपयोग सुनिश्चित किया गया है। इस बात का भी भरोसा दिलाया गया है कि डीएनए परीक्षण परिणाम भरोसेमंद हो और नागरिकों के गोपनीयता अधिकारों के लिहाज से डाटा का दुरुपयोग न हो सके।
त्वरित न्याय प्रणाली
अपराध सिद्धि दर में बढ़ोतरी
विधेयक के प्रावधान एक तरफ गुमशुदा व्यक्तियों तथा देश के विभिन्न हिस्सों में पाए जाने वाले अज्ञात शवों की परस्पर मिलान करने में सक्षम बनाएंगे, दूसरी तरफ बड़ी आपदाओं के शिकार हुए व्यक्तियों की पहचान करने में भी सहायता प्रदान करेंगे।
• पृष्ठभूमिः
फोरेन्सिक डीएनए प्रोफाइलिंग का ऐसे अपराधो के समाधान में स्पष्ट महत्व है जिनमें मानव शरीर (जैसे हत्या, दुष्कर्म, मानव तस्करी या गंभीर रूप से घायल) को प्रभावित करने वाले एवं संपत्ति (चोरी, सेंधमारी एवं डकैती सहित) की हानि से संबंधित मामले से जुड़े अपराध का समाधान किया जाता है। 2016 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, देश में ऐसे अपराधों की कुल संख्या प्रति वर्ष तीन लाख से अधिक है। इनमें से केवल बहुत छोटे हिस्से का ही वर्तमान में डीएनए परीक्षण किया जाता है। उम्मीद है कि अपराधों के ऐसे वर्गों में इस प्रौद्योगिकी के विस्तारित उपयोग से न केवल न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि सजा दिलाने की दर भी बढ़ेगी, जो वर्तमान में केवल 30 प्रतिशत (2016 के एनसीआरबी आंकड़े) है।
(■) मंत्रिमंडल ने जिला उधमपुर, जम्मू-कश्मीर में केन्द्रीय विद्यालय संख्या-2 धार रोड, के निर्माण के लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन को 7.118 एकड़ रक्षा भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज मंत्रिमंडल ने जिला उधमपुर, जम्मू-कश्मीर में केन्द्रीय विद्यालय संख्या-2 धार रोड, के निर्माण के लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन को 30 वर्ष की अवधि के लिए 7.118 एकड़ रक्षा भूमि हस्तांतरित करने को मंजूरी दी, जिसका नवीकरण 30 वर्ष की अवधि के बाद फिर किया जा सकता है।
पृष्ठभूमि : धार रोड-उधमपुर में स्थित केन्द्रीय विद्यालय संख्या-2, 1985 से एक स्थायी भवन में संचालित हो रहा है। वर्तमान में केन्द्रीय विद्यालय संख्या-2, धार रोड, उधमपुर में कुल 851 छात्र पढ़ रहे हैं। केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा खुद के स्थायी विद्यालय भवन के निर्माण से स्कूल प्रशासन को वहां कार्यरत कर्मियों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इष्टतम बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।
(■) मंत्रिमंडल ने बोइंग 747-400 विमान के एसईएसएफ परिचालन पर मुआवजे के संशोधन को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल के आर्थिक मामलों की समिति ने बी 747-400 विमान के रख-रखाव की क्षतिपूर्ति के लिए 10 प्रतिशत वार्षिक बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इससे विशेष अतिरिक्त क्षेत्र उड़ान (एसईएसएस) परिचालन में परिव्यय को 2016-17 के लिए 336.24 करोड़ रुपये तथा टैक्स को बढ़ाकर 534.38 करोड़ रुपये तथा टैक्स कर दिया गया है।
कंपनी की गंभीर आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह बढ़ोतरी कंपनी के वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करेगी।
पृष्ठभूमि : एयर इंडिया (एआई) बी747-400 विमान से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के लिए एससीएसएफ उड़ानों का परिचालन करता है। इन उड़ानों पर होने वाले परिव्यय का भुगतान संबंधित मंत्रालय एयर इंडिया को करता है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने अक्टूबर 2011 में बी747-400 विमान के पूंजीगत व्यय के लिए 336.24 करोड़ रुपये तथा टैक्स की वार्षिक परिव्यय को मंजूरी दी थी।
रख-रखाव के लिए परिव्यय का आवंटन तीन मंत्रालयों को किया गया था। यह परिव्यय की यह राशि 2011-12 से एकसमान है। पिछले पांच वर्षों के दौरान एयर इंडिया द्वारा किए जाने वाले परिव्यय में बढ़ोतरी हुई है। इसका कारण है इन विमानों के रख-रखाव में होने वाले खर्च में वृद्धि, यूएस डॉलर की तुलना में रुपये का अवमूल्यन और साजो-सामान की कीमतों में वृद्धि। इसलिए यह आवश्यकता थी कि 2011-12 से एयर इंडिया को भुगतान किए जाने वाले धनराशि/अनुमान की समीक्षा की जाए, क्योंकि लागत को मुद्रास्फीति के साथ नहीं जोड़ा गया था। चूंकि एयर इंडिया वित्तीय घाटे के दौर से गुजर रही है, इसलिए कंपनी अपनी लागत से कम मूल्य पर सेवा उपलब्ध नहीं करा सकती।
(■) मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में उपाध्यक्ष और सदस्य के एक-एक पद के निर्माण को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में उपाध्यक्ष और सदस्य के एक-एक पद के निर्माण को मंजूरी दी।
यह निर्णय, आयोग के कार्य कुशलता को बेहतर बनाने तथा लक्षित समूह के कल्याण और विकास के उद्देश्य को पूरा करने के संदर्भ में लिया गया।
पृष्ठभूमि : राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग, सफाई कर्मचारियों तथा हाथ से सफाई करने वालों के कल्याण के लिए कार्य करता है। यह सफाई कर्मचारियों में व्याप्त अवसरों व स्थितियों की असमानता को दूर करने के लिए कार्यरत है। सभी हाथ से सफाई करने वालों के लिए समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हाथ से सफाई करने वालों को रोजगार देने का निषेध तथा उनके पुनर्वास अधिनियम 2013 के खंड 31 के अंतर्गत आयोग निम्न कार्य करता है :
क) अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी करना;
ख) अधिनियम में प्रावधानों के उल्लंघन होने की शिकायतों की जांच करना; तथा
ग) अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए केन्द्र तथा राज्य सरकारों को सुझाव देना।
(■) मंत्रिमंडल ने विपो कॉपी राइट संधि 1996 और विपो प्रदर्शन व फोनोग्राम संधि 1996 के प्रस्ताव को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने औद्योगिक नीति व संवर्द्धन विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विपो कॉपी राइट संधि तथा विपो प्रदर्शन व फोनोग्राम संधि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन संधियों के अंतर्गत इंटरनेट और डिजिटल कॉपी राइट भी शामिल हैं। 12 मई, 2016 को सरकार द्वारा लागू राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा कानून (आईपीआर) में उल्लिखित उद्देश्य की दिशा में यह मंजूरी एक महत्त्वपूर्ण कमद है। इसका उद्देश्य वाणिज्यिक उपयोग के जरिए आईपीआर का मूल्य प्राप्त करना है। इसके लिए ईपीआर के मालिकों को इंटरनेट और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अवसरों के संबंध में दिशा-निर्देश व सहायता प्रदान की जाती है।
लाभ:
ये संधियां निम्न तरीकों से भारत की मदद करेंगी:-
अंतर-राष्ट्रीय कॉपी राइट प्रणाली के जरिए रचनात्मक अधिकार धारकों को उनके श्रम का मूल्य प्राप्त होगा। रचनात्मक कार्यों के उत्पादन और उनके वितरण में किए जाने वाले निवेश पर लाभ प्राप्त होगा।
घरेलू कॉपी राइट धारकों को अंतर-राष्ट्रीय कॉपी राइट की सुरक्षा सुविधा मिलेगी। दूसरे देशों में प्रतिस्पर्धा में समान अवसर प्राप्त होगा, क्योंकि भारत विदेशी कॉपी राइट को मान्यता देता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रचनात्मक उत्पादों के निर्माण और वितरण में किए जाने वाले निवेश पर लाभ प्राप्त होगा और इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा।
व्यापार में वृद्धि होगी और एक रचना आधारित अर्थव्यवस्था तथा एक सांस्कृतिक परिदृश्य का विकास होगा।
पृष्ठभूमि:
कॉपी राइट अधिनियम- 1957
मार्च, 2016 में कॉपी राइट अधिनियम-1957 को डीआईपीपी को स्थांतरित कर दिया गया। इसके पश्चात् कॉपी राइट अधिनियम-1957 की डब्ल्यूसीटी और डब्ल्यूपीपीटी के प्रति संगतता विषय पर अध्ययन किया गया। विपो के साथ एक संयुक्त अध्ययन भी किया गया।
2012 में कॉपी राइट अधिनियम-1957 में संशोधन किया गया ताकि इसे डब्ल्यूसीटी और डब्ल्यूपीपीटी के अनुरूप बनाया जा सके। इसकी परिभाषा में भी संशोधन किया गया। जन संचार की परिभाषा में डिजिटल प्लेटफॅार्म को भी शामिल किया गया (खण्ड -2 एफएफ), सुरक्षा के उपाय (खण्ड -65ए), अधिकार प्रबंधन जानकारी (खण्ड -65 बी), कलाकारों के नैतिक अधिकार (खण्ड -38बी), कलाकारों के विशेष अधिकार (खण्ड -38ए), इलेक्ट्रानिक माध्यमों में सुरक्षित उपस्थ्िाति के प्रावधान (खण्ड -52-1-बी-सी)।
विपो कॉपी राइट संधि 6 मार्च, 2002 में लागू हुई थी। 96 पक्षों ने इसे अपनाया है। बर्न सम्मेलन में एक विशेष समझौते के जरिए साहित्यिक और कलात्मक रचनाओं को सुरक्षा दी गयी है। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी कॉपी राइट सुरक्षा पर आधारित प्रावधान शामिल हैं।
विपो प्रदर्शन और फोनोग्राम संधि 20 मई, 2002 को लागू हुई थी और इसके 96 सदस्य हैं। डब्ल्यूपीपीटी दो प्रकार के कॉपी राइट अधिकारों की रक्षा करता है- क) कलाकार (प्रदर्शन करने वाले गायक, संगीतकार आदि) ख) ध्वनि रिकार्ड करने प्रोड्यूसर। यह कलाकारों को विशेष आर्थिक अधिकार देता है।
दोनों ही संधियां रचनाकारों को तकनीकी सुविधाओं का उपयोग करते हुए रचनाओं को सुरक्षित रखने के लिए फ्रेम वर्क उपलब्ध कराता है। रचनाओं का उपयोग करने से संबंधी जानकारियों को सुरक्षित रखता है। तकनीकी सुरक्षा उपायों की सुरक्षा (टीपीएम) और अधिकार प्रबंधन जानकारी (आरएमआई)।
(■) मंत्रिमंडल ने नई दिल्ली स्थित फिजी के उच्चायोग को आवंटित भूमि के लिए वाणिज्यिक दरें वसूलने से छूट दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज मंत्रिमंडल ने चाणक्यपुरी, राजनयिक क्षेत्र नई दिल्ली स्थित फिजी के उच्चायोग को आवंटित प्लॉट संख्या-31-बी, 2800 स्कवायर फीट भूमि के लिए वाणिज्यिक दरें वसूलने से छूट दी और फिजी द्वारा सुआ, फिजी में भारतीय उच्चायोग को प्रस्तुत किये गये इसी तरह की नियम और शर्तें को आगे विस्तारित किया गया है।
पृष्ठभूमि : अगस्त 2015 में फिजी सरकार ने सुआ, फिजी में स्थित भारतीय उच्चायोग को निर्माण के लिए 6695 वर्गमीटर का एक भूखंड प्रदान किया था जिसकी लीज अवधि 99 वर्ष थी और प्रति वर्ष इसका किराया 100 फीसदी डॉलर है। किराये का आकलन हर पांच साल बाद होता है। फिजी के साथ द्विपक्षीय संबंधों की विशेष प्रकृति को देखते हुए फिजी उच्चयोग को आवंटित भूमि के लिए वाणिज्यिक दरें वसूलने से छूट दी है।
(■) मंत्रिमंडल ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया और सऊदी ऑर्गनाइजेशन और सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट्स के बीच एमओयू के नवीनीकरण को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 2014 के सहमति पत्र के नवीनीकरण को मंजूरी दे दी, जो इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और सऊदी अरब के सऊदी ऑर्गनाइजेशन और सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट्स (एसओसीपीए) के बीच कॉर्पोरेट प्रशासन, तकनीकी शोध व सुझाव, फारेंसिंक एकांउटिंग, छोटे व लघु अभ्यास के मामले (एसएमपी), इस्लामिक फाइनेंस, निरंतर पेशेवर विकास (सीपीडी) और अन्य विषयों में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए कार्य करता है।
प्रमुख प्रभाव :
आईसीएआई के सदस्यों, छात्रों और उनके संगठनों के हित में आपसी संबंध को विकसित करने के लिए साथ मिलकर कार्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
एमओयू, आईसीएआई के सदस्यों को अपने पेशेवर क्षितिज को विस्तार देने का अवसर प्रदान करेगा। यह स्थानीय नागरिकों को क्षमता निर्माण को मजबूत करने के लिए एक संस्था के रूप में कार्य करेगा।
एमओयू लेखा व लेखा परीक्षण को बढ़ावा देने में आईसीएआई को सहायता प्रदान करेगा। इससे इस पेशे का विकास होगा।
लाभार्थी : आईसीएआई की पूर्वी राज्य के तीन क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति है। इसमें जेद्दा, रियाद और सऊदी अरब आते हैं। यहां आईसीएआई के 200 से अधिक सदस्य विभिन्न पेशेवर स्तरों पर कार्यरत हैं। इस एमओयू से आईसीएआई और एसओसीपीए के बीच मजबूत संबंध विकसित होंगे। इससे भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भारत में तथा पूर्वी राज्य के रोजगार प्रदाताओं को अधिक आत्मविश्वास प्राप्त होगा। इस प्रकार भारतीय लेखाकारों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
पृष्ठभूमि : इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) एक वैधानिक निकाय है जिसकी स्थापना संसद द्वारा पारित एक अधिनियम के अंतर्गत की गई है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अधिनियम 1949 भारत में चार्टर्ड अकाउंटेंसी का नियमन करता है। सऊदी अरब के शाही शासनादेश के अंतर्गत सऊदी ऑर्गनाइजेशन और सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट्स (एसओसीपीए) का गठन किया गया है, जो देश में लेखा व लेखा समीक्षा के पेशे का नियमन करता है।
(■) मंत्रिमंडल ने प्रवासियों और स्वदेश वापसी करने वाले लोगों के राहत और पुनर्वास की वृहत योजना को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रवासियों और स्वदेश वापसी करने वाले लोगों के राहत व पुनर्वास’ की वृहत योजना के अंतर्गत गृह मंत्रालय की 8 वर्तमान योजनाओं को मार्च, 2020 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है।
वित्तीय प्रभाव : 2017-18 से 2019-20 के दौरान इस उद्देश्य के लिए वित्तीय अनुमान 31,83 करोड़ रुपये होगा। वर्षवार वित्तीय अनुमान 2017-18 के लिए 911 करोड़ रुपये, 2018-19 के लिए 1372 करोड़ रुपये और 2019-20 के लिए 900 करोड़ रुपये है।
लाभ : इन योजनाओं से शरणार्थियों, विस्थापित लोगों आतंक/जातीय हिंसा से पीड़ित तथा सीमा पार से होने वाली फायरिंग से पीड़ित और खान/आईईडी विस्फोट व साम्प्रदायिक हिंसा के पीड़ितों को राहत व पुनर्वास प्रदान किया जाएगा।
विवरण : मंजूर की गयी आठों योजनाएं अभी संचालन में हैं और मंजूर किए गए निर्देशों के अनुसार योजना के लाभों को लक्षित समूहों तक विस्तार दिया जाएगा।
योजनाएं निम्न हैं:-
पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर (पीओजेके) से विस्थापित परिवारों तथा जम्मू कश्मीर राज्य में निवास कर रहे चांब के पुनर्वास के लिए एकमुश्त केंद्रीय सहायता।
सीमा भूमि समझौते के अंतर्गत भारत और बांग्लादेश के बीच रिहायशी इलाकों के हस्तांतरण के पश्चात बांग्लादेशी व कूच बिहार जिले के रिहायशी इलाकों में पुनर्वास पैकेज तथा अवसंरचना का उन्नयन।
तमिलनाडु और ओडिशा के कैंपों में रह रहे श्रीलंकाई शरणार्थियों को राहत सहायता।
तिब्बती शरणस्थलों में प्रशासनिक और सामाजिक कल्याण के परिव्यय के लिए पांच वर्षों तक केंद्रीय तिब्बती राहत समिति (सीटीआरसी) को वित्तीय सहायता।
त्रिपुरा के राहत कैंपों में रह रहे ब्रुस के रख-रखाव के लिए त्रिपुरा सरकार को वित्तीय सहायता।
त्रिपुरा के ब्रुस/रियांग परिवारों का मिजोरम में पुनर्वास।
1984 के सिक्ख विरोधी दंगों के मृतकों के लिए राहत राशि को बढ़ा कर पांच लाख रुपये किया गया।
आतंक/जातीय हिंसा से पीडि़त तथा सीमा पार से होने वाली फायरिंग से पीडि़त और खान/आईईडी विस्फोट के पीडि़तों की सहायता के लिए केंद्रीय योजना।
(■) मंत्रिमंडल ने कानून एवं न्याय के क्षेत्र में सहयोग और एक संयुक्त परामर्श समिति गठित करने के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच एमओयू को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कानून एवं न्याय के क्षेत्र में भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग और एक संयुक्त परामर्श समिति गठित करने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी है।
यह एमओयू कानूनी पेशेवरों एवं सरकारी कर्मचारियों द्वारा अनुभव के आदान-प्रदानके क्षेत्र की चिंताओं एवं जरूरतों और उनके प्रशिक्षण का ध्यान रखेगा। साथ ही इससे विभिन्न अदालतों, ट्रिब्यूनलों में विवादों के निपटान के लिए प्रभावी कानूनी ढांचा उपलब्ध होगा और संयुक्त परामर्श समिति के गठन का उद्देश्य पूरा होगा।