नई दिल्ली, 06 जून 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) कैबिनेट ने जिओसिंक्रोनस (भू-समकालिक) उपग्रहप्रक्षेपणवाहनमार्क-IIIके लिए निरंतरता कार्यक्रम को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न केन्द्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट)ने जिओसिंक्रोनस (भू-समकालिक) उपग्रहप्रक्षेपणवाहनमार्क-III (जीएसएलवी एमके-III) निरंतरता कार्यक्रम (चरण -1) के वित्तीय सहायता की मंजूरी दे दी है जिसमें दस (10) जीएसएलवी (एमके-III) उड़ानें शामिल हैं तथा जिसकी कुल अनुमानित लागत 4338.20 करोड़ रु• है। इस 4338.20 करोड़ रु• में दस जीएसएलवी एमके-III वाहन, आवश्यक सुविधा वृद्धि, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान की लागत भी शामिल है।
जीएसएलवी एमके–IIIनिरंतरता कार्यक्रम-चरण 1 परिचालन उड़ानों का पहला चरण है जो देश की उपग्रह संचार आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु 4 टन वर्ग के संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षमता प्रदान करेगा।
जीएसएलवी एमके–III के परिचालन से 4 टन संवर्ग के संचार उपग्रहों कोप्रक्षेपितकरने में सक्षम होने के कारण देश आत्मनिर्भर हो जाएगा और जिससे हमारे देश के अंतरिक्ष के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने एवं मजबूत करने तथा विदेशी प्रक्षेपण पर निर्भरता को कम करने में मददगार साबित होगा।
जीएसएलवी एमके–IIIनिरंतरता कार्यक्रम-चरण 1 के अंतर्गत ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए उच्च प्रवाह उपग्रहों की राष्ट्रीय मांग को पूरा करने, डीटीएच, वीसैट और टेलीविजन प्रसारणकर्ताओं के लिए ट्रांसपोंडर की उपलब्धता को बढ़ाने तथा बनाए रखने हेतु संचार उपग्रहों की प्रक्षेपण आवश्यकता को पूरा करेगा।
जीएसएलवी एमके–IIIनिरंतरता कार्यक्रम-चरण 1जीएसएलवी एमके–III प्रक्षेपण वाहन की परिचालन उड़ानों का पहला चरण होगा और इसकी मंजूरी से 2019-2024 की अवधि के दौरान उपग्रहों के प्रक्षेपण को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा।
• पृष्ठभूमि : जिओसिंक्रोनस (भू-समकालिक) उपग्रहप्रक्षेपणवाहनमार्क-III (जीएसएलवी एमके–III) को जिओसिंक्रोनस (भू-समकालिक) स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में उपग्रहों के 4 टन वर्ग में प्रक्षेपित करने के लिए विकसित किया गया है।इसने 2014 में एक प्रयोगात्मक उड़ान (एलवीएम 3-एक्स) और 2017 में एक विकास उड़ान (जीएसएलवी एमकेIII-डी 1) पूरा कर लिया है।दूसरा विकास उड़ान इस वर्ष 2018-19 के दूसरे क्वाटर (जुलाई-सितम्बर) में पूरा कर लिया जाएगा। निरंतरता कार्यक्रम-चरण 1संचार उपग्रहों के 4 टन वर्ग के लिए अंतरिक्ष तक स्वतंत्र पहुंच में सक्षम कर देगा। राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ प्रक्षेपण सेवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी वाणिज्यिक क्षमता को बढ़ावा देने हेतु संचार उपग्रहों के 4 टन वर्ग प्रक्षेपण में जीएसएलवी एमके -III एक लागत प्रभावी वाहन के रूप में स्थापित कर देगा।
(●) मंत्रिमंडल की पोलर सेटेलाइट प्रक्षेपण यान मार्क-3 जारी रखने के कार्यक्रम के छठें चरण को मंजूरी
• पीएमएलवी के तीस परिचालन प्रक्षेपण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पोलर सेटेलाइट प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) जारी रखने के कार्यक्रम (छठें चरण) और इस कार्यक्रम के अंतर्गत 30 पीएसएलवी परिचालन प्रक्षेपण को वित्तीय सहायता प्रदान करने की मंजूरी दी है।
यह कार्यक्रम पृथ्वी अवलोकन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए सेटेलाइट के प्रक्षेपण की आवश्यकता को भी पूरा करेगा। इससे भारतीय उद्योग में उत्पादन भी जारी रहेगा।
कुल 6,131 करोड़ रुपये के कोष की आवश्यकता है और इसमें 30 पीएसएलवी यान, आवश्यक सुविधा बढ़ाने, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान की लागत शामिल है।
• प्रमुख प्रभाव : पीएसएलवी के परिचालन से देश पृथ्वी अवलोकन, आपदा प्रबंधन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए सेटेलाइट प्रक्षेपण क्षमता में आत्मनिर्भर बना है। पीएसएलवी जारी रखने के कार्यक्रम से राष्ट्रीय जरूरतों के अधिक सेटेलाइट प्रक्षेपण में क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
पीएसएलवी जारी रखने के कार्यक्रम के छठें चरण के दौरान अधिकतम भारतीय उद्योग की भागीदारी से प्रतिवर्ष आठ प्रक्षेपण करने की सेटेलाइट प्रक्षेपण की मांग पूरी होगी। 2019-2024 की अवधि के दौरान सभी परिचालन अभियान संपन्न हो जाएंगे।
इस कार्यक्रम से पृथ्वी अवलोकन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए सेटेलाइट प्रक्षेपण की आवश्यकता को पूरा किया जाएगा। इससे भारतीय उद्योग में उत्पादन भी जारी रहेगा।
पीएसएलवी जारी रखने का कार्यक्रम 2008 में शुरू किया गया था और इसके चार चरण पूरे हो चुके हैं तथा 2019-20 के पहले छह माह तक पांचवें चरण के संपन्न होने की आशा है। छठें चरण की मंजूरी से 2019-20 से 2023-24 के पहले तीन माह के दौरान सेटेलाइट प्रक्षेपण अभियान में मदद मिलेगी।
• पृष्ठभूमि : पीएसएलवी सन सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट (एसएसपीओ), जीओ सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट(जीटीओ) और लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) प्रक्षेपण अभियान में बहुपयोगी प्रक्षेपणयान के रूप में उभरा है। हाल ही में 12 अप्रैल 2018 को पीएसएलवी-सी41 के सफल प्रक्षेपण के साथ ही पीएसएलवी ने तीन विकास और 43 परिचालन प्रक्षेपण संपन्न किए हैं तथा पिछले 41 प्रक्षेपण भी सफल रहे हैं। पीएसएलवी ने अपनी उत्पादन क्षमता से स्वयं को राष्ट्रीय सेटेलाइट के लिए कार्य-यान के तौर पर स्थापित किया है, जिससे व्यावसायिक प्रक्षेपण के अवसरों पर तेजी से कार्य किया जा सकेगा।
(●) कैबिनेट ने सतत और स्मार्ट शहरी विकास के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग पर भारत और डेनमार्क के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न केन्द्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) को सतत और स्मार्ट शहरी विकास के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग पर भारत और डेनमार्क के बीच अप्रैल 2018 में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) से अवगत कराया गया था।
• विवरण : इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य ज्ञान, संस्थागत सहयोग, अनुसंधान और विकास तथा संबंधित मुद्दों पर वाणिज्यिक संबंधों के आदान-प्रदान के माध्यम से पारस्परिक और लाभ के आधार पर सतत और स्मार्ट शहरी विकास के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके अतंर्गत सहयोग के क्षेत्रों जैसे स्मार्ट शहरी समाधान, जीवितता, टिकाऊ और एकीकृत शहरी नियोजन, पुनर्विकास और भूमि उपयोग, ऊर्जा में अपशिष्ट समेत एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, टिकाऊ परिवहन प्रणाली, जल और स्वच्छता प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, संसाधनों का उपभोग और अन्य संबंधित क्षेत्रों आदि में पारस्परिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति हुई।
• कार्यान्वयन रणनीति : इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत, एमओयू के ढांचे के तहत सहयोग हेतु कार्यक्रमों की रणनीतियों और कार्यान्वित करने हेतु एक संयुक्त कार्यकारी दल (जेडब्ल्यूजी) की स्थापना की जाएगी। प्रतिभागियों की सहमति से भारत और डेनमार्क का ये संयुक्त कार्य समूह एक तय समय अंतराल पर मिलते भी रहेंगे।
• प्रमुख प्रभाव : इस समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के बीच सतत और स्मार्ट शहरी विकास के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगा।
• लाभार्थी : इस समझौता ज्ञापन के जरिए ऊर्जा, टिकाऊ परिवहन प्रणाली, जल और स्वच्छता प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, संसाधन संग्रहण सहित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
(●) मंत्रिमंडल ने भारत और रूस के बीच संयुक्त डाक टिकट जारी करने को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल को भारतीय डाक विभाग और रशिया पोस्ट (रूसी संघ की संयुक्त साझेदारी वाली कंपनी ‘मार्का’) के बीच संयुक्त डाक टिकट जारी करने के संबंध में हुए समझौते से अवगत कराया गया। इसका उद्देश्य डाक टिकट जारी करने के क्षेत्र में पारस्परिक लाभ के लिए परिचालन उत्कृष्टता हासिल करना और डाक सेवा में सहयोग स्थापित करना है।
भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंध पारस्परिक हितों के मुद्दों पर व्यापक समझ से प्रेरित हैं। भारत और रूस द्विपक्षीय संबंध के लगभग सभी क्षेत्रों में व्यापक सहयोग का फायदा उठा रहे हैं।
(●) मंत्रिमंडल ने डाक विभाग के ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) के वेतन भत्तों में संशोधन को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज डाक विभाग के ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) के वेतन भत्तों में संशोधन को मंजूरी दी है।
वेतन भत्तों में संशोधन के लिए वर्ष 2018-19 के दौरान 1257.75 करोड़ रुपये (860.95 करोड़ रुपये के गैर-आवर्ती खर्च 396.80 करोड़ रुपये के आवर्ती खर्च) खर्च होने का अनुमान है।
वेतन भत्तों में इस संशोधन से 3.07 लाख ग्रामीण डाक सेवक लाभान्वित होंगे।
विवरण : समय से संबंधित नियमित्ता भत्ता (टीआरसीए) ढांचा और स्लैब को युक्ति संगत बनाया गया है। कुल जीडीएस को इन दो श्रेणियों के तहत लाया गया है – ब्रांच पोस्ट मास्टर (बीपीएम) और ब्रांच पोस्टर से इतर जैसे असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर (एबीपीएम)।
मौजूदा 11 टीआरसीए स्लैब को केवल तीन स्लैबों के तहत लाया गया है जिनमें बीपीएम एवं बीपीएम के इतर कर्मियों के लिए एक-एक स्तर होंगे।
समय से संबंधित नियमित्ता भत्ते (टीआरसीए) के रूपरेखा इस प्रकार होगी:
काम के घंटे/स्तर के अनुसार जीडीएस की प्रस्तावित दो श्रेणियों का न्यूनतम टीआरसीए
क्रम संख्या
श्रेणी
चार घंटे/स्तर 1 के लिए न्यूनतम टीआरसीए
पांच घंटे/स्तर 2 के लिए न्यूनतम टीआरसीए
1.
बीपीएम
12,000 रुपये
14,500 रुपये
2.
एबीपीएम/डाक सेवक
10,000 रुपये
12,000 रुपये
महंगाई भत्ते का भुगतान अलग से जारी रहेगा और केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए उसमें समय-समय पर बदलाव होता रहेगा।
नई योजना के तहत 7000 रुपये की सीमा तक टीआरसीए+डीए की गणना के साथ अनुग्रह बोनस जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
01.01.2016 से संशोधित वेतनमान के लागू होने की तिथि तक की अवधि के लिए एरियर की गणना 2.57 गुणक के साथ बढ़े हुए बेसिक टीआरसीए के अनुसार की जाएगी। एरियर का भुगतान एकमुश्त किया जाएगा।
वार्षिक बढ़ोतरी 3 फीसदी की दर से होगी और वह हर साल पहली जनवरी अथवा पहली जुलाई को दी जा सकती है जो जीडीएस के लिखित आग्रह पर आधारित होगी।
एक नया जोखिम एवं कठिनाई भत्ता को भी लागू किया गया है। अन्य भत्ते जैसे कार्यालय रख-रखाव भत्ता एकीकृत ड्यूटी भत्ता, नकदी लाने-ले जाने का शुल्क, साइकिल रख-रखाव भत्ता, नाव भत्ता और निर्धारित स्टेशनरी शुल्क में संशोधन किया गया है।
कार्यान्वयन रणनीति एवं लक्ष्य
ग्रामीण डाक सेवकों के वेतन भत्तों में संशोधन किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल एवं सस्ती बुनियादी डाक सुविधाओं को बेहतर करने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित वेतन वृद्धि से वे अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने में समर्थ होंगे।
प्रभाव : डाकघरों की ग्रामीण शाखा गांवों एवं दूरदराज के क्षेत्रों में संचार एवं वित्तीय सेवाओं का आधार है। ग्राहकों को भुगतान के लिए पोस्ट मास्टर को काफी रकम का हिसाब रखना पड़ता है और इसलिए उनके काम की जिम्मेदारी पहले से ही निर्धारित है। इस वेतन वृद्धि से उनमें जिम्मेदारी का भाव और बढ़ेगा। कुल मिलाकर ग्रामीण आबादी के बीच वित्तीय समावेशीकरण की प्रक्रिया में भारतीय डाक भुगतान बैंक (आईपीपीबी), सीडीएस नेटवर्क की अहम भूमिका होने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि : भारतीय डाक विभाग में अतिरिक्त विभागीय व्यवस्था की स्थापना 150 वर्ष पहले उन ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी आर्थिक एवं कुशल डाक सेवा मुहैया कराने के लिए की गई थी जहां पूर्णकालिक कर्मचारियों को बहाल करने का कोई औचित्य नहीं था। एक लाख उनतीस हजार तीन सौ छियालिस (1,29,346) अतिरिक्त विभागीय डाक शाखा का संचालन मुख्य तौर पर ग्रामीण डाक सेवक ब्रांच पोस्ट मास्टर के द्वारा किया जा रहा है। साथ ही, ग्रामीण डाक सेवक ब्रांच पोस्ट मास्टर के अलावा शाखा, उप एवं मुख्य डाक घरों में भी काम करते हैं। ग्रामीण डाक सेवकों को बहाल करने की मुख्य विशेषता यह है कि वे तीन से पांच घंटे प्रतिदिन अंशकालिक कार्य करते हैं और इससे प्राप्त आय उनके मुख्य आय का पूरक है जो उनके लिए अपने परिवार का भरण पोषण करने का एक पर्याप्त साधन है। वे 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रह सकेंगे।
(●) मंत्रिमंडल की चीनी क्षेत्र की वर्तमान समस्या से निपटने के उपायों की मंजूरी
चीनी मिलों की नगदी की समस्या के कारण किसानों के गन्ना मूल्यों के अत्यधिक बकाया राशि की समस्या को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग 7,000 करोड़ रुपये के निम्नलिखित उपाय करने को मंजूरी दी है:
I. एक वर्ष के लिए 30 लाख मिट्रिक टन (एलएमटी) चीनी का सुरक्षित भंडार तैयार करने के लिए अनुमानित 1,175 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हालांकि खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) बाजार मूल्य और चीनी की उपलब्धता के आधार पर किसी भी समय इसकी समीक्षा कर सकता है। इस योजना के अंतर्गत अदायगी तिमाही के आधार पर की जाएगी। किसानों के गन्ने के मूल्य का बकाया राशि मिलों की ओर से सीधे उनके खातों में जमा करवाई जाएगी।
II. मिल के द्वार पर सफेद/रिफाइंड चीनी का न्यूनतम ब्रिकी मूल्य तय करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1995 के अंतर्गत चीनी मूल्य (नियंत्रण) आदेश 2018 अधिसूचित किया जाएगा, जिससे कम मूल्य पर चीनी मिल द्वारा सफेद/रिफाइंड चीनी की ब्रिकी घरेलू बाजार में नही की जा सकती है। सफेद चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य गन्ने के उचित लाभ मूल्य (एफआरपी) और सफेद/रिफाइंड चीनी की न्यूनतम परिवर्तनीय लागत के आधार पर तय होगा। सफेद/रिफाइंड चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य शुरू में 29 रुपये प्रति किलो तय किया जाएगा, जिसमें बाद में डीएफपीडी द्वारा एफआरपी आदि में परिवर्तन के आधार पर संशोधन किया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं के लिए उचित मूल्य पर चीनी की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी और सरकार ऐसी प्रक्रिया लागू करेगी जिससे चीनी के खुदरा मूल्य पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके। वर्तमान में चीनी मिलों में भंडारण की सीमा तय कर यह कार्य किया जाएगा। मिलों में भंडारण की सीमा को शुरू में वर्तमान चीनी अवधि के लिए लागू किया जाएगा, जिसकी डीएफपीडी किसी भी समय समीक्षा कर सकता है।
III. चीनी मिलों से संबंधित मौजूदा भट्टियों में इन्सिनरेशन बॉयलर और नई भट्टियां लगाकर उनकी सुधार कर क्षमता बढ़ाना; सरकार पांच वर्ष की अवधि के लिए 1332 करोड़ रुपये के अधिकतम आर्थिक सहायता का ब्याज वहन करेगी, जिसमें ऋण स्थगन की एक वर्ष की अवधि का लगभग 4,440 करोड़ रुपये का बैंक ऋण शामिल है जो तीन वर्ष की अवधि में बैंक द्वारा चीनी मिलों को आवंटित किया जाएगा। इस संबंध में डीएफपीडी विस्तृत योजना तैयार करेगा। इससे अतिरिक्त चीनी होने की स्थिति में चीनी को कम आयात सूची में रखने में मदद मिलेगी।
•पृष्ठभूमि : वर्तमान अवधि में चीनी का अत्यधिक उत्पादन और आगामी अवधि में उच्च उत्पादन के संकेत से चीनी का बाजार मूल्य लगातार कम हो रहा है। बाजार के माहौल और चीनी के मूल्य में कमी के कारण चीनी मिलों पर नगदी की समस्या का बुरा प्रभाव पड़ा है, जिसके कारण गन्ना मूल्य का अत्यधिक बकाया हो गया है। यह बकाया राशि 22000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुकी है।
मिलों में नगदी की स्थिति में सुधार लाने के लिए चीनी उत्पादन को उचित स्तर पर स्थिर करने के वास्ते किसानोंके गन्ने के मूल्य की बकाया राशि देना आवश्यक है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले चार महिने में निम्नलिखित कदम उठाएं हैं:
I. देश में चीनी का आयात रोकने के लिये चीनी के आयात पर सीमाशुल्क 50 प्रतिशत से बढ़ाकर शत प्रतिशत किया गया।
II. घरेलू चीनी मूल्य को स्थिर करने के लिए फरवरी और मार्च, 2018 में चीनी उत्पादकों पर भंडारण सीमा लागू की गई।
III. चीनी के निर्यात की संभावनाएं तलाशने के लिए चीनी उद्योग को बढ़ावा देने हेतु चीनी के निर्यात पर सीमा शुल्क हटा लिया गया।
IV. अवधि 2017-18 के दौरान निर्यात के लिए मील-वार 20 एलएमटी का न्यूनतम निर्देशात्मक निर्यात कोटा (एमआईक्यू) आवंटित किया गया।
V. चीनी मिलों में अतिरिक्त चीनी के निर्यात के लिए सहायता और सुविधा हेतु सीमा शुल्क मुक्त आयात प्राधिकरण (डीएफआईए) योजना दोबारा शुरू की गई।
VI. गन्ने की लागत की भरपाई के लिए अवधि 2017-18 के दौरान चीनी मिलों को 5.50 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर वित्तीय सहायता दी गई।
(●) कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में फाफामऊ, इलाहाबाद में गंगा नदी पर 6 लेन के नए पुल के निर्माण को दी स्वीकृति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इलाहाबाद के फाफामाऊ में राष्ट्रीय राजमार्ग-96 पर गंगा नदी पर 9.9 किलोमीटर लंबे 6 लेन के नए पुल के निर्माण की परियोजना को स्वीकृति दे दी है, जिस पर 1948.25 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
इस परियोजना के लिए निर्माण अवधि तीन साल है और इसके दिसंबर, 2021 तक पूरा होने का अनुमान है। नए पुल से इलाहाबाद में एनएच-96 पर मौजूद 2 लेन के फाफामऊ पुल भीड़भाड़ की समस्या दूर होगी।
नए पुल से कुंभ, अर्ध कुंभ, प्रयाग में होने वाले वार्षिक स्नान के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए तीर्थ नगरी इलाहाबाद में पहुंचना आसान हो जाएगा। इससे तीर्थाटन पर्यटन और पवित्र नगरी प्रयाग की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
यह 6 लेन का नया पुल मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के माध्यम से और नलिनी ब्रिज होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-76 से लखनऊ/फैजाबाद आने वाले यातायात के लिए फायदेमंद होगा।
इसके अलावा नए पुल की इस परियोजना के निर्माण के दौरान 9.20 लाख कार्यदिवसों के बराबर रोजगार पैदा होंगे।
वर्तमान में इलाहाबाद आने वाले वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग-96, राष्ट्रीय राजमार्ग-24 बी, एशियाई राजमार्ग-1 से और अन्य स्थानीय राजमार्गों से फाफामऊ स्थित गंगा नदी पर 2 लेन के पुल को पार करके आते हैं। सामान से भरे व्यावसायिक वाहनों को सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक इस पुल पर प्रवेश नहीं दिया जाता है। वर्तमान में पुराने पुल से लगभग 40,000 पीसीयू (यात्री कार) गुजरते हैं, जो उसकी कुल 15,000 पीसीयू क्षमता से कई गुना ज्यादा है। इसके परिणामस्वरूप पुल पर पूरे दिन और रात भर जाम की स्थिति बनी रहती है। इन नए 6 लेन के पुल से पुराने पुल पर यातायात सुगम होगा और तेज व सुरक्षित यातायात सुनिश्चित होगा।
• पृष्ठभूमि : ध्यान देने की बात है कि मई, 2014 से पहले इलाहाबाद से फरक्का के बीच गंगा नदी पर सिर्फ 13 पुल थे। 2014 के बाद 20 नए पुल बनाने की योजना बनाई गई थी, जिनमें से 5 यातायात के लिए खोल दिए गए और 7 कई टुकड़ों में निर्माणाधीन हैं। इस प्रकार कुल पुलों की संख्या 33 हो जाएगी। बाकी 8 प्रस्तावित पुलों के लिए जल्द ही फरक्का, साहेबगंज और मोकरनाथ काम शुरू होने की उम्मीद है। इस प्रकार यह फाफामऊ पुल इलाहाबाद और फरक्का के बीच गंगा नदी पर बनने वाला 29वां पुल होगा।