मध्य प्रदेश में बीजेपी के चाणक्य हैं कैलाश विजयवर्गीय



--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

■मालवा को बीजेपी का गढ़ बनाने में विजयवर्गीय की महत्वपूर्ण भूमिका

■बड़ा सवाल: क्या आपसी सामंजस्य से जूझ रही है मप्र बीजेपी?

■कैलाश जी जैसे नेताओं की उपेक्षा से कैसे मजबूत होगी भाजपा?

■आखिर मुख्‍यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली पर क्‍यों लग रहे प्रश्‍नचिन्‍ह?

जैसे केन्द्रीय बीजेपी में गृहमंत्री अमित शाह को बीजेपी का चाणक्य कहा जाता है वैसा ही कैलाश विजयवर्गीय को मध्यप्रदेश बीजेपी का चाणक्य कहा जाता है। सत्ता और संगठन के तमाम मामलों में विजयवर्गीय ने चाणक्य की भूमिका निभाकर पार्टी को मुसीबतों से उबारा है। वह चाहे लोकसभा-राज्यसभा के चुनाव हो या फिर विधानसभा के चुनाव हो उन्होंने एक संकटमोचक के रूप में सामने आकर बीजेपी को विपरीत स्थितियों से बाहर निकाला है। और कैलाश जी के कारण हर बार बीजेपी एक मजबूत स्थिति में उभरी है। कैलाश विजयवर्गीय के सत्ता-संगठन की कुशलता से राष्ट्रीय नेतृत्व भी प्रभावित है। पश्चिम बंगाल और हरियाणा जैसे राज्यों में बीजेपी को फतेह दिलाने के सूत्रधार कैलाश जी हैं। उनकी राष्ट्रीय पहचान विशेष रूप से तब मजबूत हुई जब भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल का प्रभारी बनाया। उस समय पश्चिम बंगाल में भाजपा का संगठन अपेक्षाकृत कमजोर था। विजयवर्गीय ने लगातार दौरे किए, स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को संगठित किया तथा बूथ स्तर पर संगठन निर्माण पर विशेष ध्यान दिया। प्रबंधन की क्षमता और नेतृत्व का विश्वास उन्हें भाजपा की राजनीति में विशिष्ट स्थान दिलाता है। राजनीति में किसी भी नेता की उपयोगिता केवल उसके चुनाव जीतने की क्षमता से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि वह संगठन को कितना मजबूत करता है, कार्यकर्ताओं को किस तरह प्रेरित करता है, नेतृत्व के प्रति कितना भरोसेमंद है और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पार्टी के लिए कितनी प्रभावी भूमिका निभाता है।

●मध्यप्रदेश के लिए अहम हैं विजयवर्गीय

वर्तमान परिस्थितियों में मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार में सामंजस्य की कमी दिखाई दे रही है। बाहर से भले ही सरकार और संगठन में एकता दिख रही हो लेकिन अंदरूनी खानों में देंखे तो तस्वीर अलग दिखाई देती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट, शिवराज सिंह चौहान गुट और प्रहलाद पटेल गुट अंदर ही अंदर सरकार और संगठन को कमजोर करने में लगे हुए हैं। और मोहन सरकार से कन्नीं काट रहे हैं। खासकर जब से उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जमीनों का मामला उजागर हुआ है तबसे विरोधी गुट हावी होता जा रहा है। और अंदर ही अंदर खिचड़ी पकाता नजर आ रहा है। ऐसी परिस्थिति में केवल कैलाश विजयवर्गीय ही एक ऐसे नेता हैं जो विरोधी गुटों को संभाल सकते हैं। लेकिन‍ मोहन सरकार कैलाश जी के मालवा क्षेत्र की उपेक्षा कर उन्हें नाराज करने पर उतारू है। चूंकि मालवा क्षेत्र उनकी कर्मभूमि है और उनकी कर्मभूमि की जो उपेक्षा करेगा उसे कैलाश जी बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। विजयवर्गीय के कारण ही आज मालवा बीजेपी का गढ़ बना हैं। यदि सरकार इस गढ़ की उपेक्षा कर रही है तो वह कहीं न कहीं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। मालवा को बचाना है तो कैलाश जी को नाराज नहीं किया जा सकता है। मेरा तो मानना है कि केवल मालवा ही नहीं संपूर्ण मध्यप्रदेश में उनका सम्मान है, प्रभाव है।

●विजयवर्गीय की अहमियत: संगठन, रणनीति और नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा

भाजपा में कुछ ऐसे नेता हैं जिनकी भूमिका केवल चुनाव लड़ने या सरकार चलाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे संगठन को मजबूत करने, राजनीतिक रणनीति तैयार करने और कठिन परिस्थितियों में पार्टी के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाने के लिए भी जाने जाते हैं। विजयवर्गीय ऐसे ही नेताओं में शामिल हैं। प्रदेश की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय का प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है। वे कई बार विधायक चुने गए और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में नगरीय प्रशासन, उद्योग, आवास तथा अन्य महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता का यह संयोजन उन्हें पार्टी के अन्य नेताओं से अलग पहचान देता है। भाजपा नेतृत्व ने हमेशा उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखा है जो सरकार और संगठन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर सकते हैं। भाजपा में उनकी सबसे बड़ी ताकत संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। पार्टी का विस्तार केवल चुनावी भाषणों से नहीं होता, बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करने से होता है। विजयवर्गीय लंबे समय तक इसी कार्य में सक्रिय रहे। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सहज पहुंच और नियमित संवाद ने उन्हें ज़मीनी नेता के रूप में स्थापित किया हैं। यही कारण है कि जब भी भाजपा को किसी राज्य में संगठन को नई ऊर्जा देने की आवश्यकता महसूस हुई, नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया।

●बेबाक अंदाज से रखते हैं अपनी बात

कैलाश विजयवर्गीय की एक विशेषता उनकी स्पष्टवादिता भी है। वे कई बार ऐसे बयान देते रहे हैं जो राजनीतिक बहस का विषय बन जाते हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि वे बिना लाग-लपेट अपनी बात रखते हैं, जबकि आलोचक इसे विवादास्पद शैली बताते हैं। हालांकि इन विवादों के बावजूद संगठन में उनकी उपयोगिता कम नहीं हुई। इसका प्रमुख कारण यह है कि भाजपा नेतृत्व उनके संगठनात्मक योगदान और चुनावी क्षमता को अधिक महत्व देता है।

कुल मिलाकर कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं जिनकी पहचान केवल चुनाव जीतने वाले नेता की नहीं, बल्कि संगठन निर्माता, कुशल रणनीतिकार और नेतृत्व के भरोसेमंद सहयोगी की है। उन्होंने नगर राजनीति से लेकर राष्ट्रीय संगठन तक अपने अनुभव और कार्यशैली के माध्यम से अलग स्थान बनाया है। भाजपा की संगठनात्मक संस्कृति में ऐसे नेताओं का विशेष महत्व होता है जो कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें, चुनावी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करें और कठिन परिस्थितियों में पार्टी का मनोबल बनाए रखें। इसी कारण विजयवर्गीय आज भी भाजपा की राजनीति में एक प्रभावशाली और महत्वपूर्ण चेहरा माने जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर यह दर्शाता है कि भारतीय जनता पार्टी में केवल जनाधार ही नहीं, बल्कि संगठन के प्रति समर्पण, नेतृत्व का विश्वास और लगातार सक्रिय रहने की क्षमता भी किसी नेता की वास्तविक अहमियत तय करती है।

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