टीकमगढ़ सीएमओ ओमपाल भदौरिया के काले कारनामें



--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।

■विभाग के एसीएस संजय दुबे की मेहरबानी से रूका ट्रांसफर!

■नपा में भदौरिया ने किया लगभग 10 करोड़ का भ्रष्‍टाचार

टीकमगढ़ नगर पालिका के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी (सीएमओ) ओमपाल सिंह भदौरिया इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पिछले एक साल में ही भदौरिया ने इतने सारे काले कारनामें किये हैं कि जिले के कई राजनीतिक लोगों ने इनके स्‍थानांतरण की व्‍यापक मांग की थी। लेकिन भदौरिया ने अपनी पहुंच के चलते स्‍थानांतरण रूकवा लिया। चर्चा है कि जब उनके स्थानांतरण की मांग जिले के जनप्रतिनिधियों और भाजपा संगठन की ओर से उठी और मामला विभागीय मंत्री तक पहुंचा, तब उनके तबादले की संभावना लगभग तय मानी जा रही थी। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही सीएमओ भदौरिया को इसकी जानकारी मिली, वे भोपाल पहुंचे और उसके बाद पूरा घटनाक्रम ही बदल गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव के स्तर पर मामला रुक गया और स्थानांतरण की पूरी कवायद ठंडी पड़ गई। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जनप्रतिनिधियों, संगठन और मंत्री स्तर पर चल रही चर्चाओं के बावजूद सीएमओ अपने पद पर बने रहे? भदौरिया भ्रष्‍टाचार पर भ्रष्‍टाचार करते जा रहे हैं लेकिन‍ सब कुछ जानते हुए भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। खुलेआम शासकीय पैसे का दुरूपयोग हो रहा है। चर्चा यह भी है कि कुछ महीने पहले नगर पालिका अध्यक्ष के हटने के बाद प्रशासक व्यवस्था लागू हो गई है, जिसके चलते नगर पालिका की अधिकांश प्रशासनिक शक्तियां सीएमओ के हाथों में आ गई हैं। करोड़ों के विकास कार्यों, प्रशासनिक निर्णयों और फाइलों की कमान अब एक ही कुर्सी के इर्द-गिर्द घूम रही है। ऐसे में इस प्रभावशाली और “मलाईदार” पद को छोड़ने की उनकी कोई इच्छा नहीं बताई जा रही है।

● जब तक एसीएस साहब हैं, तब तक मेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता

सूत्रों की मानें तो राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि सीएमओ ओमपाल भदौरिया ने बातचीत के दौरान कथित तौर पर यह तक कह दिया कि- “जब तक एसीएस साहब हैं, तब तक मेरा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।” इस कथित बयान के बाद चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर एक अधिकारी को अपनी कुर्सी और अपने प्रभाव पर इतना भरोसा कैसे है? टीकमगढ़ में लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं- “मंत्री बदल जाएं, नेता बदल जाएं, लेकिन सीएमओ साहब की कुर्सी नहीं हिल सकती!” अब यह केवल राजनीतिक चर्चाएं हैं या इसके पीछे कोई और कहानी छिपी है, यह तो संबंधित अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं। लेकिन टीकमगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है। सवाल यह भी है कि आखिर सीएमओ साहब की ताकत का असली राज क्या है?

● स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंक पाने के लिए किए जाते हैं फर्जी फोटोशूट

वार्ड नंबर 06, गोपाल मंदिर के पीछे का नगर पालिका के कर्मचारी नाली पर जाल रखते हैं, फोटो खींचते हैं और तुरंत जाल वापस ले जाते हैं। कमाल है। स्वच्छता सर्वेक्षण पर इस तरह की फर्जी फोटो दिखाकर कब तक नगर पालिका श्रेणी और स्थान प्राप्त करेंगी? अभी कुछ दिन पहले भोपाल की टीम टीकमगढ़ आई थी। लोगों ने उनसे कहा था कि कहीं स्वच्छता नहीं हैं। हमारे मोहल्ले में कचड़े के ढेर रखे हैं। यहां कोई झाडू लगाने तक नहीं आता। लेकिन नगरपालिका के अधिकारी अपनी रैंक बढ़ाने में लगे रहे, किसी की नहीं सुनी।

● फर्जी फाइलें बनाकर किया 10 करोड़ का भ्रष्टाचार

टीकमगढ़ की जनता ने नगर पालिका में बदलाव इसीलिए किया था क्योंकि पूर्व से ही नगर पालिका भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही थी। अधिकारी ऐसे फर्जी सर्वेक्षण कराकर झूठी वाहवाही लूटना चाहती है। लेकिन जनता सब जानती है। टीकमगढ़ नगर पालिका में सीएमओ ओमपाल सिंह भदोरिया ने एक साल में करीब 10 करोड़ का भ्रष्टाचार किया है। यह आरोप टीकमगढ़ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष पप्पू मलिक ने लगाए हैं। पूरी नगर पालिका का बंटाढार कर दिया है। बताया जा रहा है कि भदौरिया एक-एक काम की पॉच-पॉच फाईलें बनाकर बार-बार फुटकर टेंडर निकालते हैं। 06 अगस्‍त 2025 से अब तक एक ही ठेकेदार को 22 ठेके दिये गये हैं। यह ऑनलाईन टेंडर प्रक्रिया पर प्रश्‍नचिंह है। मतलब साफ है कि ठेकेदार के माध्‍यम से खुद के फायदे के लिए यह सब फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।

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