उद्धव ठाकरे के 6 बागी सांसद मोदी के 'आईने' में अपना भविष्य देखेंगे....



--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में एक बार फिर फूट पड़ने की आशंका है, क्योंकि पार्टी की ओर से 'थ्री-लाइन व्हिप' जारी किए जाने के बावजूद, उसके नौ में से छह लोकसभा सांसद नई दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए। पार्टी बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

यह घटनाक्रम ऐसी खबरों के बीच सामने आया है कि यूबीटी के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली यूबीटी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी "अलग हुए" गुट को मान्यता न दें। इससे पहले पार्टी ने एक बयान में कहा था कि बिरला ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि "अगर कोई उनसे मिलने आता है तो वे सभी पहलुओं को ध्यान में रखेंगे।"

लोकसभा में शिवसेना और यूबीटी के क्रमशः पांच और नौ सदस्य हैं। अगर यूबीटी के छह सांसद पाला बदलते हैं, तो निचले सदन में शिवसेना की संख्या बढ़कर 11 हो जाएगी। गौरतलब है कि 'दल-बदल विरोधी कानून' के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए बागी गुट को पार्टी के कम से कम दो-तिहाई लोकसभा सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

शिव सेना से मिल रही जानाकारी के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे शुक्रवार को षणमुखानंद हॉल में होने वाले पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, ठाकरे स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और गुरुवार को संसदीय बैठक में शामिल न होने वाले सांसदों के बारे में लगातार जानकारी ले रहे हैं।

इसबीच, उद्धव ठाकरे की शिवसेना के छह बागी सांसद - जो पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं - बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिले। सूत्रों ने बताया कि इन छह सांसदों ने बिरला से कहा कि ठाकरे गुट - जो जून 2022 में शिंदे के विद्रोह से पहले 'असली' शिवसेना थी, अपनी विचारधारा से भटक गयी है। खास तौर पर, इन छह सांसदों का दावा था कि ठाकरे गुट के सीनियर नेताओं की योजना अंततः कांग्रेस के साथ विलय करने की थी, जो विपक्षी महा विकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा है और पूर्व मुख्यमंत्री की सहयोगी पार्टी है। उन्होंने कहा कि इसी 'विलय' की वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ी। उन्होंने बिरला से यह भी अनुरोध किया कि उन्हें सदन में उन सात सीटों के पास जगह दी जाए जिन पर एकनाथ शिंदे गुट के सांसद बैठे हैं।

ठाकरे के लिए यह एक पुरानी कड़वी याद को फिर से जीने जैसा है। बागी सांसदों का आरोप है कि पार्टी प्रमुख उनके निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करने की उनकी मांगों को नजरअंदाज करते थे और चुनाव के समय भी समर्थन की कमी रहती थी। उन्होंने यह भी शिकायत की कि उनके बेटे आदित्य ठाकरे तक भी उनकी पहुंच नहीं थी। हालांकि यह ड्रामा महीनों से बंद कमरों में चल रहा था, लेकिन पिछले 48 घंटों में ठाकरे खेमे ने पलटवार किया है। पार्टी के कद्दावर नेता संजय राउत ने कल तीखे तेवरों वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आज भी वही बातें दोहराईं।

• आगे क्या?

ये छह लोग शनिवार को फिर से शिंदे से मिलेंगे, जिसके बाद उम्मीद है कि वे बिड़ला के साथ हुई बैठक के बारे में जानकारी देंगे। वे स्पीकर को भेजा गया पत्र भी साझा करेंगे और अपने फैसले के बारे में बताएँगे। इस बीच, ठाकरे गुट ने नेताओं को सात दिन का 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है और बिड़ला से उनकी मांगों - पार्टी से अलग होने और सीट बदलने - को खारिज करने की अपील की है। बिड़ला को बताया जाएगा कि इन छह नेताओं पर पार्टी-विरोधी व्यवहार के आरोप लगेंगे। आज सुबह जब इन छह नेताओं ने मीटिंग में शामिल होने के लिए जारी पार्टी व्हिप को नज़रअंदाज़ किया, तो ठाकरे गुट और भी नाराज़ हो गया।

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