केजरीवाल की मुश्कलें बढ़ी, सरकारी बंगले के सौंदर्यीकरण का केग करेगा ऑडिट



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (केग) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास के हालिया पुनर्निर्माण में कथित ‘अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघनों’ की विशेष ऑडिट करेगा। लोक निर्माण विभाग ने इस कार्य के लिए मंजूरी नहीं ली थी, जिसमें पहले से मौजूद इमारत को गिराना भी शामिल था। सूत्रों ने कहा कि उसने परिसर के स्वामित्व का भी पता नहीं लगाया है।

इस पूरे मामले पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर मुख्य सचिव ने रिपोर्ट का पहला हिस्सा 27 अप्रैल और फिर 12 मई को रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा उपराज्यपाल सचिवालय को भेजा था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के उस पत्र के बाद ऑडिट का आदेश दिया है जिसमें भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। अनियमितताओं के आरोपों से इनकार करते हुए श्री केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने केंद्र पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के दफ्तर ने 24 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें कैग द्वारा विशेष ऑडिट कराने की सिफ़ारिश की गई थी। इस पत्र में कहा गया था कि ‘पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री आवास के पुनर्निर्माण के नाम पर कई सारे उल्लंघन और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं बरती गई हैं।’ इसके बाद गृह मंत्रालय ने उपराज्यपाल सचिवालय द्वारा भेजी गई सिफारिश को कैग के पास भेज दिया। ऐसे में अब दिल्ली के सिविल लाइन्स में 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास से जुड़े मामले में “केग” विशेष ऑडिट करेगी। यह सब उस वक्त किया जा रहा था जब देश में कोविड-19 महामारी अपने चरम पर थी।

भारतीय जनता पार्टी ने सीएम आवास के पुनर्निर्माण को लेकर आरोप लगाया था कि पीडब्ल्यूडी ने ‘बिना किसी मंजूरी के’ इस काम की लागत 7.62 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 33.20 करोड़ रुपये कर दी। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस मामले में आरोप लगाया था कि ‘सीएम केजरीवाल के बंगले के लिए खरीदे गए 8 पर्दों में से एक की कीमत 7.94 लाख रुपये से अधिक थी, जबकि इनमें से सबसे सस्ता पर्दा 3.57 लाख रुपये का था। बंगले के लिए 1.15 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का संगमरमर वियतनाम से लाया गया था, जबकि 4 करोड़ रुपये पूर्व-निर्मित लकड़ी की दीवारों पर खर्च किए गए थे।

बीजेपी के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि लोगों का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने के लिए यह विवाद खड़ा किया गया है। वहीं पार्टी के एक अन्य सांसद राघव चड्ढा ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि मुख्यमंत्री आवास 75-80 साल पहले 1942 में बनाया गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ऑडिट के बाद इसके जीर्णोद्धार की सिफारिश की थी। दिल्ली में लगातार एक के बाद एक चुनावी हार से बौखलाई भाजपा न सिर्फ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ईमानदार सरकार को बदनाम करने, बल्कि पर्दे के पीछे से यहां की सत्ता हथियाने की भी साजिश रच रही है। इसके तहत पहले फर्जी आबकारी घोटाला और अब सीएम आवास के पुनर्निर्माण में गड़बड़ी के मनगढ़ंत आरोप।

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