नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में छापेमारी की
आयकर विभाग ने 18.12.2021 को उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सिविल भवन-निर्माण एवं रियल एस्टेट के कारोबार में संलग्न तथा शैक्षणिक संस्थानों को चलाने वाले विभिन्न व्यक्तियों और उनकी व्यावसायिक संस्थाओं पर तलाशी व जब्ती अभियान चलाया। कोलकाता स्थित एक प्रवेश प्रदाता के परिसर में भी छापेमारी की गई है।
तलाशी अभियान के दौरान लखनऊ, मैनपुरी, मऊ, कोलकाता, बेंगलुरु और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों में फैले 30 से अधिक परिसरों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई है। तहकीकात के दौरान हार्ड कॉपी दस्तावेजों तथा डिजिटल डेटा सहित बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सबूत मिले हैं और जब्त किए गए हैं।
जांच के दौरान प्रारंभिक विश्लेषण से कर चोरी के निम्नलिखित तौर-तरीकों का पता चला है:
क.) यह पाया गया कि सिविल भवन-निर्माण के व्यवसाय में लगी कई संस्थाएं करोड़ों रुपये के फर्जी खर्च के दावे में शामिल थीं। जाली बिल बुक, स्टांप एवं नकली सप्लायरों की हस्ताक्षरित चेक बुक सहित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं और उन्हें जब्त कर लिया गया है। एक कंपनी के मामले में इसके निदेशकों की 86 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित आय का पता चला है। कंपनी से संबंधित व्यक्ति ने अपनी अघोषित आय के रूप में 68 करोड़ रुपये की राशि स्वीकार की है और उस पर कर का भुगतान करने की पेशकश की है। एक मालिकाना प्रतिष्ठान के प्रकरण में, पिछले कुछ वर्षों के दौरान 150 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार से संबंधित लेखा बही खातों में प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। एक अन्य संस्था की जांच में भी यह पाया गया कि उसने अपनी अघोषित आय और निवेश को रूट करने के लिए मुखौटा कंपनियों के माध्यम का इस्तेमाल किया है। जांच के दौरान 12 करोड़ रुपये के ऐसे अस्पष्ट निवेश की पहचान की गई है। एक अन्य व्यक्ति के केस में एक मुखौटा कंपनी में 11 करोड़ रुपये के रहस्यमय निवेश और 3.5 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों में निवेश की पहचान की गई है।
ख.) इसके अलावा, इन व्यक्तियों को आवास प्रविष्टियां प्रदान करने के संबंध में कोलकाता स्थित एक आवास प्रवेश प्रदाता को भी शामिल किया गया था। जांच में यह पाया गया कि इन जालसाज कंपनियों के माध्यम से एंट्री ऑपरेटर ने 408 करोड़ रुपये की फर्जी शेयर पूंजी और 154 करोड़ रुपये के फर्जी असुरक्षित ऋण की आवास प्रविष्टियां प्रदान करने के लिए विभिन्न मुखौटा कंपनियों का गठन किया था। तलाशी अभियान के दौरान हवाला लेनदेन का पर्याप्त मात्रा में डिजिटल डेटा भी मिला और जब्त किया गया। एंट्री ऑपरेटर ने उपरोक्त कार्यप्रणाली को स्वीकार किया है और 5 करोड़ रुपये की बेहिसाब कमीशन आय का भी खुलासा किया है।
ग.) इस पूरी कार्रवाई में शामिल बेंगलुरु स्थित ट्रस्ट और उससे संबंधित संस्थाओं के संबंध में यह जानकारी निकल कर सामने आई है कि 80 लाख रुपये की पर्याप्त मात्रा में ट्रस्ट फंड दान की आड़ में गैर-भरोसेमंद उद्देश्यों के लिए केरल स्थित कुछ संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया है, जिसमें मरकज़ु सकफाथी सुन्निया ट्रस्ट और मरकज़ नॉलेज सिटी ट्रस्ट शामिल हैं, जो खाड़ी देशों से जुड़े हुए हैं और इससे न्यासियों को लाभ मिलना है। इन सब से प्रथम दृष्टया छूट के दावे के साथ-साथ फेमा प्रावधानों के लिए आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ट्रस्टों के पंजीकरण से संबंधित प्रासंगिक प्रावधानों के उल्लंघन के संकेत मिलते हैं। पिछले तीन वर्षों में न्यासियों के व्यक्तिगत लाभ के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये के कैपिटेशन शुल्क के संग्रह के संबंध में और ट्रस्ट के खाते से किए गए 4.8 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च के संबंध में साक्ष्य भी प्राप्त किए गए हैं।
तलाशी अभियान में 1.12 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकदी बरामद हुई है।
आगे की जांच जारी है।
■ आयकर विभाग का पश्चिम बंगाल में तलाशी अभियान
आयकर विभाग ने दिनांक 16.12.2021 को लोहा और इस्पात उत्पादों, बुनियादी ढांचे, सीमेंट, पॉली फैब्स, एग्रो-टैक और खाद्य प्रसंस्करण आदि के कारोबार में लगे आसनसोल आधारित दो प्रमुख समूहों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। इन समूहों के पश्चिम बंगाल स्थित 30 से अधिक परिसरों में तलाशी कार्रवाई की गई।
एसडी कार्ड, व्हाट्सएप चैट आदि में संग्रह किए गए दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के रूप में बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सबूत मिले हैं, जिन्हें जब्त किया गया है। तलाशी ले रही टीम ने यह भी पता लगाया है कि एसडी कार्डों का बेहिसाब बिक्री के समानांतर सेट का विवरण, वास्तविक उत्पादन डेटा की एक्सेल शीटों, समानांतर मिलान खातों की फाइलों तथा विभिन्न पार्टियों को किए गए नकद भुगतान के विवरणों आदि को रखने के लिए उपयोग किया गया है।
जब्त किए गए एसडी कार्ड और संबंधित सबूतों के प्रारंभिक विश्लेषण से यह पता चला है कि इस बेहिसाबी नकदी राशि का रखरखाव निदेशकों के प्रमुख कर्मचारियों और संस्थाओं के मालिकों द्वारा किया गया है। एक समूह के प्रमुख व्यक्तियों ने यह भी स्वीकार किया है कि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान अपनी विनिर्माण इकाइयों से बेहिसाबी नकदी बिक्री के माध्यम से 66 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब आय जुटाई गई है। कुछ अन्य संस्थाओं में अप्रमाणित खरीद के दावों से संबंधित सबूत भी मिले हैं। ऐसी खरीदारी में 20 करोड़ रुपये की खरीदारी को निदेशकों ने अघोषित आय के रूप में स्वीकार किया है।
इसके अलावा, दूसरे समूह के जब्त किए गए सबूतों के विश्लेषण से पता चला है कि एंट्री ऑपरेटरों द्वारा चलाई जा रही अनेक कागजी कंपनियों का इनके प्रमुख कारोबार में आवास प्रविष्टियां प्रदान करने के लिए उपयोग किया गया है। इन मुखौटा इकाइयों को समूह के बेहिसाबी धन को शेयर पूंजी/गैर-जमानती ऋण को इन संस्थाओं की लेखा बही की प्रविष्टियों की आड़ में वापस करते हुए पाया गया है। इन संबंधित कंपनियों के निदेशकों द्वारा स्वीकार करने से इस बात की पुष्टि हुई है कि ऐसी रूटिंग राशि की मात्रा 40 करोड़ रुपये से अधिक है।
इस प्रकार, इस तलाशी कार्रवाई ने इन समूहों द्वारा बेहिसाब नकद ब्रिकी, फर्जी खरीदारी के दावों के माध्यम से अपने खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और आवास प्रविष्टियों के माध्यम से बेहिसाब आय को रूटिंग करने जैसे कर चोरी के विभिन्न तरीकों के अपनाए जाने का पता चला है।
इस तलाशी अभियान में 2 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी और आभूषण भी जब्त किए गए हैं और अब तक कुल 125 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब आय का भी पता चला है।
आगे की जांच जारी है।
■ आयकर विभाग का तमिलनाडु में तलाशी अभियान
आयकर विभाग ने चिट फंड, वित्त और रियल एस्टेट के कारोबार में लगे नेवेली स्थित एक समूह पर 16.12.2021 को तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह समूह अपने ट्रस्टों के माध्यम से शैक्षणिक संस्थान भी चलाता है। यह तलाशी अभियान इस समूह के नेवेली, चेन्नई, कोयंबटूर, नीलगिरी जैसे विभिन्न स्थानों पर स्थित लगभग 30 परिसरों पर भी चलाया गया।
तलाशी अभियान के दौरान, समूह के प्रमुख व्यक्तियों द्वारा गुप्त रूप से बनाए गए खाता बही के समानांतर सेट वाले एक दूरस्थ रूप से स्थित क्लाउड सर्वर का पता चला है। विभिन्न दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों और अन्य संबंधित सबूतों से स्पष्ट रूप से चिटफंड व्यवसाय से आय की कम रिपोर्टिंग करने और विभिन्न पक्षों से नकद रूप से प्राप्त जमा राशियों के माध्यम से बेहिसाब धन का सृजन करने का पता चला है। जब्त किए गए सबूतों से यह भी संकेत मिलता है कि इस तरह से जुटाए गए बेहिसाब धन का उपयोग रियल एस्टेट कारोबार में निवेश के लिए ‘ऑन-मनी’ भुगतान करने में किया गया है। प्रथम दृष्टया विश्लेषण से पता चलता है कि अचल संपत्तियों में बेहिसाब नकद लेन-देन वाले धन की राशि 250 करोड़ रुपये से अधिक है।
तलाशी अभियान में 12 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाबी नकदी भी बरामद हुई है।
आगे की जांच जारी है।