नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार देखेंगे पैंक्रियाटाइटिस रोग की स्वदेशी चिकित्सा



--प्रदीप फुटेला,
रूद्रपुर-उत्तराखंड, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ उपाध्यक्ष, राजीव कुमार से मिलेंगे वैद्य बालेन्दु प्रकाश

■ "पैंक्रियाटाइटिस रोग की स्वदेशी चिकित्सा" पुस्तिका का करेंगे विमोचन

■ पद्‌मश्री से सम्मानित वैद्य बालेन्दु कर चुके है 1111 पैंक्रियाटाइटिस के रोगियो का इलाज

■ लाइलाज और जानलेवा है पैंक्रियाटाइटिस रोग

■ अमेरिकन पैंक्रियटिक एसोसिएशन के सदस्य है वैद्य बालेन्दु

■ तांबा, पारे, गंधक और स्थानीय जड़ी बूटियों से लगभग तीन साल में तैयार होती है आयुर्वेदिक औषधि

रस शास्त्र आयुर्वेद की एक विशेष विधा है, जिसमें सोना, चांदी, तांबा, लोहा, रांगा, सीसा और जस्ता धातुओ की पारद, गंधक, हरताल आदि खनिजो को अनेक तरह की जड़ी बूटियों के साथ शोधन मारण कर असाध्य अवस्था प्राप्त रोगियो की चिकित्सा की जाती है। विज्ञान और आयुर्वेद मे स्नातक उपाधि प्राप्त वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने रस-शास्त्र की व्यवहारिक शिक्षा अपने पिता स्व• वैद्य चंद्र प्रकाश से लिया है। वर्ष 1999 मे पद्‌मश्री से अलंकृत वैद्य बालेन्दु कुछ तरह के रक्त कैंसर, पुराने और गंभीर माइग्रेन, बार बार और हमेशा होने वाली सर्दी-जुकाम तथा जटिल एवम् जानलेवा पैंक्रियाटाइटिस जैसे रोगों की समूल चिकित्सा कर देश और विदेश मे विशेष स्थान बना चुके है।

मूलत: मेरठ निवासी वैद्य प्रकाश ने लगभग तीस सालों तक देहरादून मे रहने के बाद कुछ साल पहले बिलासपुर मे रसशाला स्थापित करने के बाद रूद्रपुर के रतनपुरा गाँव मे विशिष्ट आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र का निर्माण किया है, जहां मुख्यतौर पर पैंक्रियाटाइटिस की अनेक किस्मों के मरीजो के इलाज के साथ उनके चिकित्सकीय आंकड़ों को एकत्रित कर समय समय पर पुस्तिका के रूप मे प्रकाशित किया जाता है।

वर्ष 1997 से 2020 तक देश और विदेश से एक हजार एक सौ ग्यारह पैंक्रियाटाइटिस के मरीजों के अनुभवो वाली पुस्तिका का विमोचन नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार द्वारा गंगापुर रोड स्थित जेपीएस के सभागार मे आयोजित एक समारोह मे किया जाएगा। जिसकी अध्यक्षता कुलपति, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय करेंगे। वैद्य बालेन्दु से इलाज करा स्वस्थ हुए कुछ रोगी, देश के आयुर्वेद और एलोपैथिक के चुनिंदा विशेषज्ञ भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।

केंद्र की वर्तमान सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा देने का पुरजोर कोशिश कर रही है। राजीव कुमार वैद्य प्रकाश के अनुभवो का संज्ञान लेते हुए रसशाला मे औषध निर्माण प्रकिया, चिकित्सा केंद्र मे रोगियो का इलाज और अनुसंधान की जानकारी लेने के लिए एक दिवसीय दौरा करेंगे।

आयुर्वेद के परम्परागत ज्ञान को विज्ञान की विधाओं की कसौटियों पर परख और विकसित कर भारत चिकित्सा के क्षेत्र मे विश्वगुरु की भूमिका निभा सकता है। वैद्य बालेन्दु प्रकाश का दृढ़संकल्प है कि तांबा, पारा और गंधक से बनी रस औषधि का वैज्ञानिक विकास कर भारत चिकित्सा में नोबल पुरस्कार प्राप्त कर सकता है।

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