--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
● चरणदास महंत या टीएस सिंहदेव के ''हाथ'' में सौंपी जानी चाहिए छत्तीसगढ़ की कमान
● छत्तीसगढ़ में कांग्रेस आलाकमान अब नहीं संभला तो फिर संभलने का अवसर नहीं मिलेगा
● भूपेश बघेल के बंटाधार से उबरने का अवसर
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बुरे दौर से गुजर रही है। धीरे-धीरे कांग्रेस का जनाधार घटता जा रहा है। कुशल नेतृत्व न होने से पार्टी बिखरने लगी है। न विपक्ष की भूमिका निभाई जा रही है और न ही किसान और युवाओं के मुददे उठाये जा रहे हैं। जिसके कारण लोगों के बीच भी पकड़ कमजोर हो गई है। भूपेश बघेल की दागदार छबि ने प्रदेश से कांग्रेस का बंटाधार कर दिया है। यहीं वह समय है जब प्रदेश में फिर से पार्टी को खड़ा किया जा सकता है। 2028 में अभी तीन साल का समय है। इन तीन साल में बेहतर और प्रभावी नेतृत्व कांग्रेस की वापसी करा सकता है। प्रदेश में डॉ. चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव जैसे अनुभवी और बेदाग छबि के नेता मौजूद हैं। जो अपने दमखम से पार्टी को जिंदा करने की काबिलियत रखते हैं। डॉ. चरणदास महंत छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक अनुभवी और भरोसेमंद नाम हैं। वे सरल स्वभाव, स्पष्ट सोच और मजबूत संसदीय अनुभव के लिए जाने जाते हैं। केंद्रीय मंत्री से लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष तक, उन्होंने हर भूमिका को गरिमा के साथ निभाया है। किसानों, आदिवासियों और आम जनता की आवाज़ बनकर वे लगातार संघर्ष करते रहे हैं। अनुभव, संतुलन और नेतृत्व- यही डॉ. चरणदास महंत की पहचान है। डॉ. चरणदास महंत छत्तीसगढ़ की राजनीति में अत्यंत प्रतिष्ठित और वरिष्ठ नेता हैं। उनकी गिनती कांग्रेस पार्टी के अनुभवी और संतुलित नेतृत्व में होती है। सदन की मर्यादा, लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष निर्णयों के लिए उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है। उनका पद और प्रतिष्ठा अनुभव, विश्वास और गरिमा का प्रतीक है। अब प्रदेश में महंत से बेहतर कोई विकल्प अब बचा नहीं है। गांधी परिवार से भी उनके अच्छे रिश्ते हैं। भूपेश बघेल जब राज्य के सीएम बने थे उस समय चरण दास महंत भी रेस में शामिल थे।
• आज भी पार्टी में मौजूद है कई काबिल नेता
प्रदेश में आज भी ऐसे कई नेता मौजूद हैं जिनको आलाकमान जिम्मेदारी सौंपकर पार्टी के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को दूर कर सकती है। लेकिन बघेल के मोह की पट्टी आलाकमान की आंख में ऐसी बंधी है कि उन्हें कुछ सूझ ही नहीं रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पार्टी आलाकमान को बघेल से जिम्मेदारी वापस लेकर चरणदास महंत को दी जा सकती है। क्योंकि यही वह नेता हैं जिन्हें कार्य करने का अनुभव भी है और बघेल से बिल्कुल अलग हटकर पार्टी लाइन पर काम करने का दमखम भी रखते हैं। इस विषय पर एक बार फिर पार्टी आलाकमान को विचार करने की आवश्यकता है।
• महंत और सिंहदेव के पास है जनाधार
टीएस सिंहदेव और चरणदास महंत वे नेता हैं जिनके पास जनता का पर्याप्त जनाधार हैं। दोनों ही नेता सभी पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों को साथ लेकर चलने का माद्दा रखते हैं। इसका सबसे बड़ा परिणाम है कि सिंहदेव ने उप मुख्यमंत्री रहते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा किये जा रहे बघेल के विद्रोह को स्वतः आगे आकर संभाला और पार्टी की छवि को धूमिल होने से बचाया था। चरणदास महंत भी बेहद लोकप्रिय नेता हैं। यही कारण कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास अगर कोई लोकसभा सीट आई तो वह उनकी पत्नी ज्योत्सना महंत की सीट थी। क्योंकि इस सीट पर न सिर्फ ज्योत्सना ने बल्कि चरणदास महंत ने भी जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क साधा और जनाधार पाने में सफलता प्राप्त की।
• अब नहीं संभले तो कभी नहीं संभल पायेंगे
हम सभी ने भूपेश बघेल के हिटलरशाही रवैये को बहुत करीब से देखा है। ऐसे में कोई भी कार्यकर्ता अब उनके नेतृत्व में कार्य करने को इच्छुक नहीं है। हर कार्यकर्ता और पार्टी नेता अपने-अपने स्तर से पार्टी आलाकमान तक बघेल के कारनामों का पुल्लिंदा पहुंचा चुके हैं। ऐसे में अब वह समय आ गया है जब पार्टी आलाकमान को बघेल पर कोई कड़ा एक्शन लेकर किसी जिम्मेदार व्यक्ति को छत्तीसगढ में पार्टी की कमान सौंपनी चाहिए। इससे पार्टी का कल, आज और कल में अवश्य सुधार आने की अपेक्षा है। क्योंकि अगर अब नहीं संभले तो कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में दोबारा कभी नहीं संभल पाएगी।
• महंत और सिंहदेव जैसे अनुभवी नेताओं को मिली कमान तो छत्तीसगढ में वापस आ सकती है कांग्रेस
आज छतीसगढ़ कांग्रेस को अनुभवी और जनाधार वाले नेताओं की जरूरत है। चरणदास महंत और टीएस सिंहदेव जैसे अनुभवी और कर्मठ नेता यदि आज भी प्रदेश की कमान संभालते हैं तो निश्चित रूप से प्रदेश में कांग्रेस वापसी कर सकती है। क्योंकि आज भी प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार है। यदि इनको कमान सौंपी जाती है तो प्रदेश में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ शासन में आ सकती है। केवल अयोग्य नीति निर्धारक के कारण कांग्रेस वहां पर पैर नहीं जमा पा रही है। भूपेश बघेल ने जिस तरह से भ्रष्टाचार और अत्याचार किया हैं उसका ही परिणाम है कि वह सत्ता से बाहर हो गई। लेकिन कहते है कि समय के साथ सब कुछ बदल जाता है। पार्टी हाईकमान आज भी चाहे तो राज्य के नीति निर्धारक को बदलकर कांग्रेस को पुन: प्रदेश में काबिज कर सकते हैं। हम जानते हैं कि प्रदेश में ऐसे कई नेता आज भी मौजूद हैं जिनका जनाधार काफी मजबूत है।
• बघेल के पापों की सजा भुगत रही पार्टी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बोये गये भ्रष्टाचार के बीज का परिणाम पार्टी को पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। बावजूद उसके कांग्रेस आलाकमान के कान में जूं तक नहीं रेंगी और उन्होंने अभी भी प्रदेश की कमान भ्रष्टाचारी और अनाचारी भूपेश बघेल को सौंप रखी है। बघेल ने मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान एक ऐसी चंडाल चौक़ड़ी का निर्माण किया था जिसने शासन की योजनाओं में घोटाले-भ्रष्टाचार करने का निर्णय लिया।