वैद्य बालेंदु प्रकाश बने राष्ट्रीय गुरु



--प्रदीप फुटेला,
गदरपुर-उत्तराखंड, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ इकाई द्वारा अनुभवी चिकित्सकों का चयन

● गुरुकुल प्रणाली पर आधारित गुरु-शिष्य परंपरा के तहत होगी आयुर्वेद की पढ़ाई

● रस-शास्त्र के क्षेत्र में देश भर से चुने गए एकमात्र चिकित्सक

अनुभव को उपाधि से ज्यादा तरजीह देते हुए केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ ने पचपन आयुर्वेदिक चिकित्सकों को राष्ट्रीय गुरु की पदवी से नवाजा है, जिन्होंने वर्षों के चिकित्सा के अनुभवों द्वारा स्वयं को समाज में श्रेष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में स्थापित किया है। आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की शिक्षा से परे उक्त अनुभवों को आयुर्वेद के स्नातकों एवं परास्नातकों को प्रयोगात्मक रूप में पहुँचाने के लिए विद्यापीठ द्वारा “गुरु-शिष्य परंपरा” पाठ्यक्रम चलाया जाता है, जिसमें चयनित गुरु अपने चिकित्सकीय अनुभवों को एवं औषधि-निर्माण संबंधित जानकारियों को विद्यापीठ द्वारा चयनित विद्यार्थियो के साथ साझा करते हैं

आयुर्वेद में वर्णित रस-शास्त्र पर आधारित निजी रस-औषधियों का निर्माण कर असाध्य रोगियों की चिकित्सा करने में, वर्तमान में जिला उधमसिंह नगर निवासी वैद्य बालेंदु प्रकाश ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान बनाई है। एक्यूट प्रोमाइलोसिटिक ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर), माइग्रेन (सिर दर्द), न्यूट्रीशनल एनीमिया (आहार जन्य खून की कमी), नाक से संबंधित एलर्जी एवं जानलेवा माने जाने वाले पैन्क्रियाटाइटिस आदि जटिल रोगों को ठीक करने के लिए विख्यात, वैद्य बालेंदु प्रकाश को वर्ष 1999 में राष्ट्रपति द्वारा पदमश्री से नवाजा जा चुका है। मेरठ निवासी तथा तीन दशकों तक देहरादून में निवास करने के बाद वैद्य बालेंदु प्रकाश ने वर्ष 2018 में गदरपुर तहसील के रतनपुरा गाँव में साठ शय्या वाले पड़ाव- विशिष्ट आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना की है।

वैद्य बालेंदु प्रकाश ने बताया कि राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के दो अधिकारियों द्वारा स्थापित चिकित्सालय तथा रस-शाला का औचक निरीक्षण किया गया था। जिसके तहत वर्तमान में उपलब्ध सुविधाओं व दैनिक कार्यवाही का जायजा लिया गया था। राष्ट्रीय विद्यापीठ द्वारा जारी चयनित गुरुओं की सूची में वैद्य बालेंदु प्रकाश रस-शास्त्र के एकमात्र चिकित्सक हैं और वह भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. के. आर. नारायनन् के मानद आयुर्वेदिक चिकित्सक भी रह चुके हैं।

राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ द्वारा चयनित शिष्यों को एवं गुरुओं को शिक्षा पाठ्यक्रम अवधि के दौरान मानद मासिक भत्ता भी दिया जाता है। परीक्षण अवधि के अंत में शिष्य द्वारा अपने काम की एक थीसिस भी तैयार की जाती है। उत्तराखंड के हल्द्वानी क्षेत्र में कार्यरत डॉ. बिनोद जोशी भी कायचिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय गुरु चुने गये हैं ।

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