--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
दैनिक जीवन में मानव कई तरह की दालों का सेवन करते हैं। सभी लोगों की अलग-अलग पसंदीदा दाल होंगी। दाल प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। अगर हम एक खाने की थाली की कल्पना करें तो उसमें दाल न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। दालों के स्वास्थ्य लाभ कई होते हैं। न्यूट्रिशियन भी रोजाना दालों को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। दाल न सिर्फ मानव शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल की आपूर्ति करती है बल्कि उसे तंदरुस्त बनाए रखने में भी मदद करती हैं।
मूंग की पीली दाल को धुलि हुई मूंग दाल के नाम से भी जाना जाता है। मूंग दाल खाने में काफी हल्की होती है और इसे पचाना बहुत ही ज्यादा आसान माना जाता है। यह भी सबसे अधिक वजन घटाने वाली डाइट में शामिल की जाती है। भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली सबसे आम दाल में से एक है। यह प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड, फाइबर और विटामिन बी 1 का एक अच्छा स्रोत है।
मूंग की दाल वजन घटाने में फायदेमंद मानी जाती है। मूंग की दाल का सेवन गर्भवती महिलाओं के लिए लाभदायक मानी जाती है। मूंग की दाल का सेवन शरीर में जमा एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद कर सकता है।
मसूर की दाल शायद भारतीय रसोई में सबसे आम दालों में से एक है। मसूर दाल प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड, पोटेशियम, आयरन, फाइबर और विटामिन बी 1 का एक अच्छा स्रोत है। लाल रंग की मसूर दाल फाइबर और प्रोटीन के खजाने से कम नहीं है। एक मात्र कप मसूर दाल में 230 कैलोरी, लगभग 15 ग्राम आहार फाइबर और लगभग 17 ग्राम प्रोटीन होता है।
मसूर दाल का सेवन पेट और पाचन संबंधी सभी रोगों को दूर करने में मदद मिल सकती है। मसूर की दाल पेट संबंधी परेशानियों से भी राहत दिलाने में मदद मिल सकती है। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने और शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकती है।
अरहर की दाल सबसे ज्यादा इस्तेमाल और पसंद की जाने वाली दाल है। अरहर की दाल के स्वास्थ्य लाभ कई होते हैं। अरहर की दाल एक भारतीय रसोई में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री है। इसे पकाने के सबसे स्वादिष्ट तरीकों में से एक है गुजराती खट्टी मीठी दाल। अरहर की दाल में आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, कैल्शियम, विटामिन बी और पोटैशियम होता है। अरहर की दाल का सेवन न केवल आपके शरीर को तंदरुस्त बनाए रखने में मदद करती है बल्कि हमें जरूरी विटामिन और मिनरल्स की भी आपूर्ति करती है।
अरहर दाल में काफी फाइबर होता है। इससे कब्ज की समस्या से छुटकारा मिल सकता ह। नियमित रूप से फाइबर लेने से दिल संबंधी रोग, स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है साथ वजन को भी कंट्रोल में रखा जा सकता है। इसमें फोलिक एसिड पाया जाता है। जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। ये दाल कार्बोहाइड्रेट्स का अच्छा स्रोत्र है। इससे शरीर को एनर्जी मिल सकती है।
उड़द दाल को आम तौर पर काली दाल कहा जाता है। दाल मखनी में काली उड़द स्टार सामग्री है। उड़द का उपयोग बंध, पापड़, मडु वड़ा, पायसम और यहां तक कि डोसा बनाने के लिए भी किया जाता है। अरहर की दाल के बाद जिस दाल को लोग सबसे ज्यादा खाना पसंद करते हैं उसे उड़द दाल के नाम से जाना जाता है। उड़द दाल न सिर्फ स्वाद में बल्कि कई पौष्टिक गुणों से भी भरपूर होती है। उड़द दाल में आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। पेट में जलन को दूर करने में फायदेमंद व ग्लोइंग स्किन पाने के लिए असरदार है।
चने की दाल में फाइबर और प्रोटीन की काफी मात्रा पाई जाती है। चने की दाल आपके शरीर को तंदरुस्त बनाएं रखने के साथ-साथ पर्याप्त ऊर्जा प्रदान करने में मददगार हो सकती है। चने की दाल का सेवन युवाओं के लिए अधिक फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्रोटीन की काफी मात्रा होती है जिससे मशल्स बनाने में काफी मदद मिल सकती है। चने की दाल का सेवन डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बहुत कम पाई जाती है। चने की दाल का सेवन एनिमिया, पीलिया, कब्ज के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है।