--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बिहार में कोरोना के सातवें संक्रमित मरीज की आज पटना के कोरोना अस्पताल एनएमसीएच में मौत हो गई है। बिहार में पहली बार किसी महिला मरीज की कोरोना से मौत हुई है। महिला कैंसर की बीमारी से जूझ रही थी। महिला मरीज पटना के आलमगंज थाना के मक्खनपुर ईदगाह की रहनेवाली थी और कोरोना संक्रमण के कारण एनएमसीएच में उसका इलाज चल रहा था। उऩकी आज सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई।
इससे पहले कोरोना पॉजिटिव छठे मरीज की रविवार को पटना के पीएमसीएच में मौत हो गई थी, वह 60 साल का था और अस्थमा से पीड़ित था। उसकी मौत के बाद कोरोना की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव पायी गई थी। आज एक महिला की मौत हो गई है। इस तरह से पटना के आज दूसरे मरीज की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु हुई है।
वहीं कोरोना मरीजों की संख्या बिहार में लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को एक ही दिन में कुल 130 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं, जिसके बाद राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या अब 879 हो चुकी है। इनमें से कुल 386 मरीज ठीक हो चुके हैं और अब सात मरीजों की मौत हो चुकी है।
बिहार में 22 मार्च को हुई थी कोरोना से पहली मौत, मुंगेर का था युवक जो कतर से लौटा था। उसे किडनी की बीमारी थी। मौत के बाद उसकी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। 17 अप्रैल को बिहार में कोरोना से हुई थी दूसरी मौत, पटना एम्स में वैशाली जिले के राघोपुर के रहनेवाले युवक की गई थी जान, वह 35 साल का था और दो साल से बीमार था। 17 अप्रैल को इलाज के दौरान एम्स में उसने दम तोड़ दिया था। एक मई को पटना के एनएमसीएच में कोरोना से तीसरी मौत हुई थी। मृतक मोतिहारी का रहनेवाला था और उसकी उम्र 54 साल थी। साल भर से इस पीड़ित को कैंसर था। 2 मई को कोरोना से बिहार मे हुई थी चौथी मौत। पटना के एनएमसीएच में ही 45 साल के शख्स की, जो कैंसर का मरीज था उसकी इलाज के दौरान मोत हो गई थी। कोरोना से छठी मौत सासाराम के 70 साल के बुजुर्ग की हुई थी जो सासाराम के नारायण मेडिकल कॉलेज जमुहार में भर्ती थे। मृतक को पहले से ही सांस से जुड़ी बीमारी थी।
■ बिहार आने वाले प्रवासियों की संख्या के साथ संक्रमितों मे वृद्धि
बिहार में कोरोना वायरस के प्रसार की रफ्तार प्रवासियों की संख्या में लगातार वृद्धि के साथ तेज हो चुकी है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि 30 अप्रैल को जो आंकड़ा 422 था, वह अब बढ़कर 900 के पार चला गया है। यानी बीते 13 दिनों में आंकड़ा दोगुना से भी अधिक हो गया है। जाहिर है स्थिति गंभीर होती जा रही है। इसकी गंभीरता इसलिए और भी बढ़ गई है कि अब बिहार आने वाले प्रवासियों की संख्या में भी लगातार वृद्धि होती जा रही है।
बीते चार मई से राज्य में स्पेशल ट्रेनों से बिहारी मजदूर और छात्र लौट रहे हैं, उनमें 200 से अधिक लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। 12 मई तक बिहार में कुल 107 ट्रेनें आ चुकी हैं जिनसे करीब 1.43 लाख प्रवासी लौट चुके हैं। बिहार में 4 मई से अब तक 200 से अधिक प्रवासी बिहारियों में कोरोना पॉजिटिव पाया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा बेगूसराय में 26, नालंदा में 15, मुंगेर में 13, भागलपुर में 13, पटना में 11 , सहरसा 11, खगड़िया 10 समेत कुल 29 जिलों में प्रवासी बिहारियों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है।
वहीं दिल्ली से आए कुल 55, मुम्बई से आये 36, गुजरात से आए 33, कोलकाता से आए 14, तेलंगाना से आए 10 और हरियाणा से आए 3 प्रवासी बिहारियों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है।
बिहार के सभी 38 जिलों में कोरोना ने अपने पांव पसार दिए हैं और 51 दिनों तक कोरोना से बचा रहा जमुई जिला भी इसकी चपेट में आ गया है।
प्रदेश में कोरोना मरीजों की कुल संख्या 908 हो गई है। इनमें आ चुके हैं। इनमें सबसे अधिक सबसे अधिक मुंगेर में 116 मामले सामने आये हैं। इसके बाद पटना में 80, रोहतास में 75, नालंदा में 63, बक्सर में 59, बेगूसराय में 43, सिवान में 34, कैमूर में 32, मधुबनी में 30, पश्चिम चंपारण एवं खगडिया में 27-27, भागलपुर में 32, गोपालगंज में 24, जहानाबाद में 21 और भोजपुर में 21 मामले हैं।वहीं अन्य जिलों में इसकी संख्या 20 से कम है।
अगले सात दिनों तक 179 ट्रेनों से ढाई लाख लोगों के आने की संभावना है। इसके बाद भी और प्रवासी मजदूर बिहार आना चाहते हैं। ऐसे में बिहार में क्वारंटाइन सेंटर की संख्या भी कम पड़ती दिख रही है। राज्य में प्रखंड और पंचायत स्तर पर क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। आपदा प्रबंधन के मुताबिक प्रखंड स्तर पर बने 3,880 क्वारंटाइन केन्द्रों में फिलहाल 1,54,209 व्यक्ति रह रहे हैं।
बिहार में 81 प्रतिशत ऐसे लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनमें कोई लक्षण ही नहीं था।
राज्य में अलग-अलग अस्पतालों से संक्रमित होने वाले अब तक 383 लोग स्वस्थ होकर घर लौट गए हैं। यानी बिहार में 44 प्रतिशत संक्रमित मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। यानी राज्य में लगभग 44 प्रतिशत का शानदार रिकवरी रेट है, जबकि राष्ट्रीय औसत 29.36 प्रतिशत है। वहीं, बिहार में कोरोना से मरने वालों की संख्या भी महज 7 है। यानि मौत का प्रतिशत भी एक से कम ही है। जाहिर है बिहारवासियों के लिए ये बड़ी बात है।