--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
कोरोना के संक्रमण के समय ड्यूटी से गायब पाये गये 363 डॉक्टरों के खिलाफ महामारी एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी। सरकार इन सभी चिह्नित किए गए डॉक्टरों का लाइसेंस भी रद्द करने की तैयारी में है।
नीतीश सरकार पहली बार स्वास्थ्य विभाग में एक बड़े बदलाव की तैयारी में है। राज्य में डॉक्टरों पर सख्त सरकार 363 चिकित्सकों की बर्खास्तगी की तैयारी कर रही है।
सरकार ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से राज्य के 37 जिलों से ड्यूटी से गायब पाये गये 363 डॉक्टरों पर आपदा प्रबंधन एक्ट और महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने 31मार्च से 12 अप्रैल तक ड्यूटी से गायब रहनेवाले डॉक्टरों की सूची तैयार की है।
हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब अपनी ड्यूटी बजाने से कतरा रहे इन डॉक्टरों पर सख्त एक्शन की पहल की गई हो, बल्कि इससे पहले भी दो बार उनको नोटिस भेजा जा चुका है। इसके बावजूद वे बाज नहीं आ रहे।
विदित हो कि राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा चिकित्सा पदाधिकारियों का समय-समय पर अनुश्रवण किया जाता है। इस क्रम में कटिहार को छोड़कर सभी 37 जिलों के 363 चिकित्सा पदाधिकारी ड्यूटी से अनुपस्थित पाये गये हैं। इन सभी से समाचार के माध्यम से आपदा प्रबंधन एक्ट और महामारी एक्ट के तहत कार्रवाई करने के लिए स्पष्टीकरण की मांग की गयी। सरकार ने अब उनसे ड्यूटी से गायब होने पर जवाब मांगा है। उनके खिलाफ महामारी एक्ट के तहत कार्यवाही की जाएगी। सरकार इन सभी चिह्नित किए गए डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द करने की तैयारी में है।
■ 81 फीसदी कोरोना केस में नहीं दिखा बीमारी का कोई भी लक्षण
बिहार में अब-तक मिले कोरोना पॉजिटव लोगों में 81 प्रतिशत वैसे थे, जिनमें इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। 19 प्रतिशत ही ऐसे थे, जिनके अंदर कोरोना बीमारी के लक्षण जैसे सर्दी, सूखी खांसी, सांस लेने में तकलीफ और बुखार आदि के लक्षण देखे गए।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 28,711 सैंपल की जांच हुई है। इनमें 1.83 प्रतिशत मरीज कोरोना पाॅजिटिव पाये गये। कोरोना से लड़ कर अब तक 142 लोग ठीक होकर घर लौटे हैं। कुल मरीजों में इनकी संख्या 26.84 प्रतिशत है।
हर घर सर्वेक्षण के तहत एक करोड़, 49 लाख से अधिक घरों तक स्वास्थ्य विभाग की टीम की टीम ने आठ करोड़, 20 लाख, 24,000 लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली गयी। जिसमें 3,744 लोग ही खांसी, सर्दी व सांस लेने की तकलीफ बतायी।
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि 81 प्रतिशत पॉजिटिव लोगों में लक्षण नहीं पाया जाना चिंता का विषय है, क्योंकि उन्हें इसका आभास ही नहीं रहता है कि उन्हें यह बीमारी है और वे अनजाने में दूसरे लोगों में यह संक्रमण फैला देंगे। इसको लेकर राज्य सरकार पूरी तरह तत्पर है और जांच का दायरा निरंतर बढ़ा रही है।
वहीं लाॅकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों से आये 65 लाेग कोरोना पाॅजिटिव पाये गये हैं। 21 जिलों में ऐसे मामले पाये गये। सबसे अधिक मधुबनी में नौ लोग कोरोना पाॅजिटिव पाये गये, जो लॉकडाउन की अवधि में दूसरे जिलों से आये हैं। दूसरे नंबर पर रोहतास है, जहां दूसरे प्रदेशों से आये आठ लोग कोरोना पॉजिटिव हैं। पटना, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी व औरंगाबाद में पांच-पांच ऐसे मामले सामने आये हैं।