-अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
लॉकडाउन ने परिवारों को साथ वक्त गुजारने का सुनहरा अवसर दिया है। लेकिन, आंकड़े कह रहे हैं कि लॉकडाउन के बीच बिहार में अपराध के मामले में वृद्धि हुई है। पटना में फरवरी के मुकाबले अप्रैल में अपहरण और दंगों के मामले लगभग दाेगुने काे गए हैं।
अपराध के मामलों मे फरवरी की तुलना में लॉकडाउन के बीच मार्च माह में कमी आनी चाहिए थी, किन्तु ऐसा होने की जगह मार्च में अपराध के ग्राफ में वृद्धि दर्ज की गई।
साधारण दंगा में 41फीसदी और भीषण दंगा मे 109 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह फिरौती के लिए अपहरण मे 50 फीसदी, हत्या के मामले में 18 फीसदी, डकैती 28.57, लूट 26.8, विविध 56.48 और संज्ञेय अपराध में 26 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई।
आंकड़ों के अनुसार साधारण दंगा के मामले में फरवरी में 483 मामले रिकॉर्ड है, वहीं 20 मार्च तक 560 मामले रिकॉर्ड हुए। जबकि 20 मार्च के बाद अब तक 434 मामले प्रकाश में आए है। वहीं भीषण दंगों के मामले में फरवरी मे 11, 20 मार्च तक 20, 20 मार्च के बाद अब तक 18 मामले दर्ज हुए हैं।
इसी तरह अपहरण के लिए फरवरी मे 817, मार्च 845 व अप्रैल मे 96 और फिरौती फरवरी में 2 व मार्च में 3 दर्ज किए गए। वहीं हत्या के मामले में फरवरी में 218, मार्च 254 व अप्रैल में 82, विविध अपराध के मामले में फरवरी में 6494, मार्च 11062 व अप्रैल मे 4815 और संज्ञेय अपराध के मामले में फरवरी मे 21065, मार्च 81119 व अप्रैल में 7181 मामले दर्ज किए गए।
लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार पुलिस प्रशासन को सिर्फ उनके कार्य को निष्पादित करने देती। अन्य कार्य एनडीआरएफ, होमगार्ड और सिविल डिफेंस के कर्मियों से निष्पादित कराती, तो संभवतः राज्य में अपराध में वृद्धि नहीं होती।