कोरोना वायरस का कहर भागलपुर के सिल्क उद्योग पर



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

कोरोना वायरस फैलने का असर भागलपुर के सिल्क बाजार पर भी दिखने लगा है। चीन में फैले कोरोना वायरस के चलते अब वहां से सिल्क धागे की आपूर्ति नहीं होने के कारण स्टॉकिस्टों ने चाइनीज धागे की कीमत बढ़ा दी है। जिससे सिल्क धागे की आपूर्ति में बीस फिसदी से अधिक की कमी आ गई है। सिल्क सिटी के तौर पर पहचान रखने वाले भागलपुर को यह पहचान दिलाने में चीन का अहम योगदान है। चीन से बड़े पैमाने पर सिल्क धागे की आपूर्ति भागलपुर के सिल्क कारोबार में होती है लेकिन चीन में कोरोना वायरस के फैलाव के कारण इन दिनों चीन से आपूर्ति किए जाने वाले सिल्क धागे का आना ठप्प है।

चीन से माल नहीं आने के कारण महानगरों में बैठे स्टॉकिस्टों ने चाइनीज धागे की कीमत बढ़ा दी है और भागलपुर में धागे की कीमत में डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति किलो का उछाल आया है। अब सिल्क के उत्पादन से लेकर मजदूरों के हाथों को मिलने वाले कामों में कमी आ गई है। सिल्क के कारोबार करने वालों ने बताया कि भागलपुर के सिल्क वस्त्र निर्माण में साठ फिसदी चीन से आयातित धागे का उपयोग होता है जबकि चालीस फिसदी देशी तसर सिल्क का उपयोग होता है। मुख्य रूप से सिल्क कपड़े के निर्माण में भागलपुर में पावरलूम का उपयोग होता है और चाइनीज धागा पतला और लचीला होने के कारण काम करने में आसानी होगी है। वहीं तसर सिल्क निर्माण में हैंडलूम पर कपड़े तैयार किए जाते हैं और इसमें देशी धागों का उपयोग ज्यादा होता है।

वहीं कारोबारी मोहम्मद इकबाल अंसारी ने चीन से यान और थ्रेड की कमी का असर कारोबार पर पड़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि चीन के धागों के स्टॉक कर रखने वाले कारोबारियों ने दाम में काफी इजाफा कर दिया है, जिसके कारण सिल्क कपड़े का निर्माण कम हो गया है। विदेशों से मिले ऑर्डर को पूरा करने के लिए ऊंची कीमतों पर धागा लेकर माल को तैयार किया जा रहा है।

● इसलिए हैं मांग ज्यादा

दरअसल भागलपुर में पावरलूम की संख्या अधिक होने के कारण चाइनीज धागों की मांग अधिक है। चाइनीज धागा पतला होने के साथ अधिक लचीला होता है। जबकि देसी तसर हस्तकरघा पर चलता है और इसमें पहले कोकुन से धागा निकाला जाता है। धागा निकालने में भी व्यापारियों को अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है। जबकि चाइनीज धागे बना बनाया मिल जाता है। इसमें कारोबारियों को मजदूरी भी बच जाती है। यही कारण है कि सिल्क कपड़ों के निर्माण में साठ फिसदी तक चाइनीज धागों का इस्तेमाल होता है। धागों के आवक में कमी और ऊंची कीमतों पर मिलने के कारण सिल्क कपड़ों की कीमत में उछाल के साथ कारोबार में गिरावट की संभावना तेज हो गई है।


■ कोरोना के वायरस से बचाव के लिए सभी ट्रेनों में किए जा रहे हैं ये उपाय

कोरोना के वायरस से बचाव के लेकर पूर्व मध्य रेलवे ने कई सख्त कदम उठाए हैं। यात्री की सुरक्षा के लिए रेलवे ट्रेनों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दे रहा है।

पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ राजेश कुमार ने बताया कि मेमो से लेकर सुपरफास्ट तक हर ट्रेन में कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा। इसके अलावा संक्रमण को रोकने के लिए एसी के हर कोच से कुछ दिनों के लिए पर्दे हटा दिए जाएंगे। कोरोना वायरस को लेकर ट्रेनों में कई और परिवर्तन सहित कुछ सुविधाएं भी बढ़ाई गई है।

दानापुर मंडल के डीआरएम सुनील कुमार ने बताया कि कोरोना को लेकर मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर अतिरिक्त साफ सफाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वायरस के फैलाव की स्थिति में मच्छर और मक्खियों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। ऐसे में मंडल की ओर से पटना जंक्शन, राजेंद्र नगर, पाटलिपुत्र, दानापुर, आरा, बक्सर समेत कई अन्य यात्रियों के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर शुक्रवार की शाम से ही फॉगिंग की शुरुआत करा दी गई है। डीआरएम ने सफाई से जुड़े अधिकारियों को विशेष निगरानी करने का निर्देश जारी किए है।

इसके अलावा सभी डिविजन के डिब्बों के अंदर की पूरी सफाई करने, तत्काल प्रभाव से सभी ट्रेनों की एसी कोचों से पर्दे हटाने, सभी बोगियों की सफाई लाईसोल जैसे उपयुक्त कीटनाशक से करने, रखरखाव के दौरान ईएमयू और डेमो कोचों में कीटनाशक दवा का छिड़काव करने, प्रमुख स्टेशनों के सफाई कर्मचारियों को विशेष रूप से सफाई का करने, यात्रियों द्वारा उपयोग की जाने वाली चीजों को कीटाणु रहित रखने को कहा गया है।

साथ ही स्टेशनों पर लगे बेंच और कुर्सियों, वॉशबेसिन, बाथरूम डोर, नॉब्स आदि कीटाणुरहित रखने तथा सभी कोचों में तरल साबुन का स्टॉक प्रयाप्त मात्रा में रखने को कहा गया है।

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