वीणा देवी व चामी मुर्मू को राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति सम्मान



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ मुंगेर की 'मशरूम महिला' वीणा देवी को मिला राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति सम्मान

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को जिन महिलाओं को नारी शक्ति सम्मान से नवाजा, उसमें बिहार के मुंगेर जिले की 43 वर्षीय वीणा देवी भी शामिल हैं। वीणा देवी नक्सल प्रभावित बेलहर प्रखंड क्षेत्र में परंपरागत कृषि के साथ-साथ मशरूम की व्यवसायिक खेती में भी हाथ आजमा रही हैं।

पिछले पांच सालों में उनके अथक प्रयास से कई गावों में मशरूम की खेती शुरू हो गई है। इसकी वजह से मशरूम की खेती और मार्केटिंग से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

वीणा देवी को 'मशरूम महिला' भी कहा जाता है। मशरूम की खेती के साथ-साथ वीणा देवी कई सालों से किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिग, कम्पोस्ट प्रोडक्शन और ऑर्गेनिक इंसेक्टिसाइड को तैयार करने का गुण भी सिखा रही हैं। वीणा देवी के हौसलों की बदौलत आज ग्रामीण महिलाओं में दुग्ध और बकरी पालन के प्रति खास रुझान देखा जा रहा है।

वीणा देवी ने अपने अथक प्रयास से मुगेर के पांच ब्लॉक के 105 गांवों में मशरूम खेती की अलख जगा दी है, जिसकी वजह से 1500 परिवारों के जीवन-यापन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अलावा वीणा देवी डिजिटल प्रशिक्षण के काम में भी लगी हुई हैं। इन्हीं की बदौलत इस क्षेत्र की 700 महिलाओं ने मोबाइल इस्तेमाल करने का तरीका सीखा।


■ 'नारी शक्ति' से सम्मानित चामी मुर्मू के नाम है 25 लाख पौधे लगाने का रिकॉर्ड

इरादे मजबूत हों तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता। पिछले 24 सालों में 25 लाख से ज्यादा पौधे लगाकर ऐसा ही कर दिखाया है चामी मुर्मू ने। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पर्यावरण के क्षेत्र में उनके इस काम के लिए उन्हें रविवार को 'नारी शक्ति सम्मान' से सम्मानित किया है।

चामी मुर्मू पिछले 24 सालों से झारखंड के एक छोटे से इलाके राजनगर में पर्यावरण संरक्षण का काम करती आ रही हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मुर्मू पिछले 24 सालों में 25 लाख से ज्यादा पौधे लगाकर पर्यावरण और धरती का श्रंगार कर चुकी हैं। अपने इस अभियान में उन्होंने 3000 से ज्यादा महिलाओं को भी जोड़ा है।

इसके साथ ही लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरे और पर्यावरण को नुकसान भी न हो, इसके लिए वाटर हार्वेस्टिंग के साथ-साथ बकरी पालन, कुक्कुट पालन जैसे कार्यों को भी वह बढ़ावा देती हैं। उनकी इस मुहिम का लाभ हजारों महिलाएं उठा चुकी हैं।

चामी मुर्मू जंगल में अवैध कटाई के खिलाफ भी टिंबर माफियाओं के विरोध में अभियान चलाती रहती हैं। जानवरों के अवैध शिकार के खिलाफ भी चामी अभियान चलाती रहती हैं। नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाने की वजह से इस इलाके में चामी मुर्मू को 'लेडी टॉर्जन' भी कहा जाता है।

उनके इस योगदान को देखते हुए चामी मुर्मू को 1996 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार दिया था।

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