--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
मातृ मृत्यु दर में कमी लाना देश के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। लेकिन 1 वर्ष में ही देश की मातृ मृत्यु दर में 8 अंकों की कमी आई है, जो स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता एवं सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता में सुधार की तरफ इशारा करती है। वर्ष 2014-16 में भारत की मातृ मृत्यु दर 130 प्रति लाख जीवित जन्म थी, जो वर्ष 2015-17 में घटकर 122 प्रति लाख जीवित जन्म हो गयी।
इस तरह एक वर्ष में कुल 6.2% की कमी दर्ज हुयी है। ये आंकडें भारत के रजिस्ट्रार जनरल के नवीनतम विशेष बुलेटिन का है। इसका अर्थ है भारत ने वर्ष 2025 तक मातृ मृत्यु दर कम करने का सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) हासिल करने में प्रगति की है। इस तरह वर्ष 2030 से 5 साल पहले ही इस लक्ष्य को पूरा करने में सफलता मिल जाएगी।
11 राज्यों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य निति के लक्ष्य किये पूरे: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत वर्ष 2020 तक 100 प्रति लाख जीवित जन्म (मातृ मृत्यु दर) के महत्वकांक्षी लक्ष्य को देश के 11 राज्यों ने हासिल कर लिया है। जिसमें केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, झारखण्ड, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक एवं हरियाणा राज्य शामिल है। वहीँ बिहार सहित छतीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहली बार स्वतंत्र रूप से मातृ मृत्यु दर की बुलेटिन प्रकाशित की गयी है। जबकि 7 अन्य राज्यों के भी मातृ मृत्यु दर में कमी आई है। जिसमें कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान एवं तेलंगाना शामिल है। ये राज्य मातृ मृत्यु दर में आई राष्ट्रीय औसत कमी 6.2% से अधिक या बराबर है।