वायसराय से प्रधानमंत्री तक मेहमान बने हैं किला हाउस में



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

पुराने पटना यानी पटना सिटी में अंग्रेजी दौर की एक से एक इमारतें हैं, मगर किला हाउस इन सबमें खास है। माना जाता है कि शेरशाह सूरी के किले की बुनियाद पर इसका निर्माण हुआ है। किला हाउस में फिलहाल जालान परिवार रहता है। इसी किले के निचले हिस्से के हॉल में जालान संग्रहालय है, जो भारत का सबसे समृद्ध निजी संग्रहालय माना जाता है।

गंगा किनारे ऊंचे टीले पर खड़ा किला हाउस जैसे पटना शहर का सिरमौर लगता है। इस किले की खासियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1975 की बाढ़ में जब पटना शहर डूब रहा था, तब भी गंगा के ठीक किनारे होने के बावजूद यह किला पूरी तरह सुरक्षित था। माना जाता है कि किला हाउस मशहूर शासक शेरशाह सूरी के किले की बुनियाद पर बना है। गंगा के किनारे से अब भी इसकी मजबूत बुनियाद देखी जा सकती है, जिससे टकराकर लहरें आज भी दम तोड़ देती हैं।

किला हाउस को जालान किला भी कहा जाता है, क्योंकि पिछले 100 वर्षों से यहां जालान परिवार रह रहा है। ब्रिटिश और डच आर्किटेक्ट से बने इस खूबसूरत किले को 1920 ई• में दीवान बहादुर राधाकृष्ण जालान ने गया के नवाब से खरीदा था। इसे खरीदे जाने का किस्सा भी काफी रोचक है।

जालान परिवार के सदस्य आदित्य जालान बताते हैं कि उनके परदादा राय बहादुर राधाकृष्ण जालान एक बार ट्रेन से पटना लौट रहे थे। इसी ट्रेन में गया के नवाब भी सवार थे। बातचीत में पता चला कि वे पटना सिटी स्थित अपना किला बेचना चाहते हैं, जिसके लिए खरीदार ढूंढ रहे हैं। जब ट्रेन पटना स्टेशन पहुंची तो संयोग से गया के नवाब साहब की गाड़ी वहां नहीं थी। ऐसे में राधाकृष्ण जालान ने उन्हें अपनी गाड़ी से किला हाउस तक छोड़ने की पेशकश की। किला हाउस को देखकर जालान साहब कुछ इस तरह मोहित हुए कि वहीं तत्काल 30 हजार रुपये में इसका सौदा तय कर लिया। चूंकि इमारत काफी जीर्ण-शीर्ण हालत में थी इसलिए लगभग इतनी ही राशि इसे दुरुस्त करने में लगी। फरवरी, 1920 में जालान परिवार इस किले में रहने के लिए आया। जालान परिवार के किले में 100 साल होने के उपलक्ष्य में एक मार्च को पारिवारिक समारोह भी आयोजित किया गया है। इस मौके पर एक बुकलेट भी जारी की जाएगी, जिसमें किला हाउस से जुड़ीं कई महत्वपूर्ण जानकारियां होंगी।

राधाकृष्ण जालान को शुरू से ही देश-विदेश की पुरानी और एंटीक चीजें संग्रह करने का शौक था। किला हाउस में मिली जगह ने उनके इस शौक को और पंख लगा दिए। उन्होंने नीचे के हॉल में उसकी प्रदर्शनी लगाई और अपने मेहमान दोस्तों को बुलाने लगे। देखते-देखते किला हाउस के साथ उनके संग्रह को भी प्रसिद्धि मिली।

किला हाउस या जालान किला अपनी मेहमाननवाजी के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। अंग्रेजों के जमाने में चार वायसराय, देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, प्रथम राष्ट्रपति डॉ• राजेंद्र प्रसाद, प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, वैज्ञानिक सी• वी• रमण, उद्योगपति रतन टाटा, एस• पी• गोदरेज व राहुल बजाज के साथ कई शख्सियतें यहां आ चुकी हैं।

किला हाउस में कई फिल्म स्टार भी पहुंचे हैं। पृथ्वी राजकपूर अपनी पूरी पृथ्वी थिएटर की टीम के साथ यहां आ चुके हैं। आदित्य जालान बताते हैं कि कुछ साल शशि कपूर की बेटी और पृथ्वी थिएटर की संचालिका संजना कपूर किला हाउस आई थीं। जालान परिवार ने तब उन्हें विजिटिंग रजिस्टर में पृथ्वी राजकपूर साहब का संदेश और हस्ताक्षर दिखाया। इस दौरान संजना कपूर ने उनके हस्ताक्षर के ठीक ऊपर पृथ्वी राजकपूर का हस्ताक्षर पहचाना और यह देखकर भावुक हो गईं। इसके अलावा अभिनेता सुनील दत्त, नरगिस, राकेश रोशन, शत्रुघ्न सिन्हा आदि भी किला हाउस आ चुके हैं।

किला हाउस में अंदर आते ही हर जगह आपको एक से बढ़कर एक नायाब चीजें देखने को मिलती हैं। राधाकृष्ण जालान ने ताउम्र जिन नायाब चीजों का संग्रह किया, अब उनकी चौथी-पांचवीं पीढ़ी उसके संरक्षण में लगी है। मुख्य रूप से ड्राइंग रूम को संग्रहालय की शक्ल दी गई है। यहां प्रवेश करते ही पहला हिस्सा चाइना रूम है, जहां 700 से 800 साल पुरानी सेरेमिक प्लेट रखी है। कहा जाता है कि इस सेरेमिक प्लेट की खासियत है कि अगर इसमें सर्व किए गए खाने में जहर हुआ तो प्लेट अपना रंग बदल लेगी या टूट जाएगी। इसके बाद बड़े से हॉल में लुई 15वीं-16वीं का फर्नीचर रखा है। पुराने यूरोपियन झूमर लटक रहे हैं, तो जमीन पर फ्रेंच और बीकानेर जेल की बनी कालीन बिछी है। यहां मुगलकालीन बर्तनों के साथ फ्रेंच और जर्मनी की कई नायाब चीजें हैं।

ड्राइंग रूम से आगे बढऩे पर दो छोटे-छोटे कमरे हैं, जिसमें फ्रांस के राजा नेपोलियन तृतीय का पलंग, मैसूर के राजा टीपू सुल्तान की पालकी, फ्रांस की महारानी के निजी सामान समेत मुगलकालीन कई हथियार आदि रखे हैं। मुख्य भवन से कुछ फर्लांग की दूरी पर गेस्ट हाउस के पास ही नई आकाईव गैलरी भी बनाई गई है। इसमें राधाकृष्ण जालान के साथ किला हाउस की स्वर्णिम यात्रा का उल्लेख है। कई ऐतिहासिक तस्वीरें और पत्र यहां प्रदर्शित किए गए हैं।

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