प्राथमिक और मध्य विद्यालय के नियोजित शिक्षकों के वेतन के लिए दिये जाएंगे 402.5 करोड़



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

• विधानसभा मे तृतीय अनुपूरक बजट पेश

प्राथमिक और मध्य विद्यालय के नियोजित शिक्षकों के वेतन के लिए 402.5 करोड़ रुपए दिये जाएंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 2248.81 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना के लिए 1000 करोड़ और प्राकृतिक विपत्ति से राहत के लिए 832 करोड़ दिए जाएंगे। इसके अलावा गैर सरकारी मदरसों को सहायता के लिए 67.50 करोड़ और मध्याह्न योजना के लिए 100 करोड़ का भी बजटीय प्रावधान होगा।

विधानसभा में गुरुवार को प्रभारी मंत्री बिजेन्द्र यादव ने सदन में 8868.5258 का तृतीय अनुपूरक बजट पेश किया। इसमें इन योजनाओं के लिए राशि का प्रावधान किया गया है। 2 मार्च को इसपर सदन में वाद-विवाद होगा और सरकार उत्तर देगी। इसी दिन विनियोग विधेयक पेश होगा।

तृतीय अनुपूरक बजट के तहत वार्षिक योजना मद में 6933.5282 करोड़ रुपए, जबकि स्थापना एवं प्रतिबद्धता व्यय मद में 1876.2282 करोड़ रुपए दिए गए हैं। केन्द्रीय क्षेत्र योजना मद में 8.7694 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें त्वरित सिंचाई लाभ योजना के लिए 741.39 करोड़ जबकि सिंचाई सृजन परियोजनाओं को लिए 218.03 करोड़ दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के लिए 200 करोड़, बाढ़ नियंत्रण की सिंचाई योजना के लिए, 173.79 करोड़ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई परियोजना के लिए और 151.86 करोड़ उत्तर कोयल जलाशय प्रबंधन कार्यक्रम के लिए दिए जाएंगे। इसमें जल जीवन हरियाली अभियान के लिए 70.68 करोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 50-50 करोड़ फसल सहायता योजना के लिए और 29 करोड़ अक्षर आंचल योजना के लिए देने का भी प्रावधन किया गया है।

● बजट पर चर्चा: विपक्ष ने गरीब विरोधी तो सत्ता पक्ष ने विकास के संकल्पित बताया

इसके पहले वित्तीय वर्ष 2020-21 के आय-व्यय पर सामान्य विमर्श हुआ। विपक्षी सदस्यों ने बजट को गरीब विरोधी बताया और कहा कि इसमें विकास का कोई विजन नहीं। दिखाने के लिए विभागों में राशि तो बढ़ायी गयी है लेकिन वास्तिव रुप में वे विकाय कार्यों पर खर्च नहीं होते। सत्ता पक्ष की ओर से इसका तीखा प्रतिवाद किया गया।

सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि सरकार की दृष्टि स्पष्ट है। हर वर्ग के विकास के लिए संकल्पित राज्य सरकार ने शिक्षा, कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, पथ निर्माण और पंचायती राज को कोर फैक्टर में शामिल किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखती है। बहस में नवाज आलम, मेवालाल चौधरी, नीतिन नवीन, आनंद शंकर सिंह, प्रह्लाद यादव, रत्नेश सदा, सुदामा प्रसाद, राजेन्द्र चौधरी, रामदेव राय, राजू तिवारी और संजीव चौरसिया ने हिस्सा लिया।

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