नागरशैली तकनीक से अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण चार वर्ष मे हो जायेगा : कामेश्वर चौपाल



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

अयोध्या में राम मंदिर बनने में तीन से चार साल का वक्त लग सकता है और इसके निर्माण के लिए नागरशैली का इस्तेमाल किया जाएगा। 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट के 15 सदस्यों में शामिल कामेश्वर चौपाल ने यह बात कही। राम मंदिर कितने समय में बनकर तैयार हो जाएगा, के सवाल पर उन्होंने कहा, "मेरे ख्याल में तीन से चार साल में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। मंदिर को जल्द से जल्द तैयार करने के लिए बेहतर वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाएगा।"

ट्रस्ट में बतौर एक दलित सदस्य चौपाल अपने शामिल होने पर कहते हैं, "देश की आबादी डेढ़ अरब से ज़्यादा है। हज़ारों जातियां हैं। अगर जाति के आधार से सबको भागीदारी देनी होगी तब तो बहुत मुश्किल हो जाएगा। मेरे ख़याल से मोदी सरकार ने ट्रस्ट में उन्हें ही शामिल किया है जिन्हें संत परंपरा और जिनको हिंदू धर्म और श्री राम से गहरा लगाव है।

वो आगे कहते हैं, "बीजेपी का संकल्प भी है कि हम सबको साथ लेकर सबका विकास करेंगे और मेरे शामिल होने का मतलब केवल दलित समुदाय से होना ही नहीं लगाया जाना चाहिए। मै बहुत प्रारंभ से रामजन्मभूमि आन्दोलन से जुड़ा रहा हूँ। मेरी हार्दिक इच्छा थी कि मंदिर मेरे आंखो के सामने बनकर खड़ा हो जाए। ट्रस्ट में सभी लोग अच्छे हैं। सबकी भावना शीघ्र मंदिर निर्माण की है। वो अब चाहते हैं कि मंदिर का निर्माण जल्द से जल्द हो जाए।

कामेश्वर चौपाल को राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल किए जाने के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। क्योंकि चौपाल ख़ुद एक सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति हैं। शिलान्यास कार्यक्रम के बाद जब वे देश भर में चर्चा में आ गए थे तब बीजेपी ने साल 1991 में रोसड़ा सुरक्षित लोकसभा सीट से उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया। साल 1995 में वे बेगूसराय की बखरी विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़े। 2002 से 2014 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे।

1989 में जब राम मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम हुआ था, तो भारतवर्ष के सभी संतों ने कामेश्वर चौपाल के नाम का चयन किया। इसके पीछे मुख्य वजह - दलित नेता कामेश्वर चौपाल की राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका थी। वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति संघर्ष समिति के बिहार प्रदेश के संजोयक और भाजपा के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं।

बातचीत में चौपाल कहते हैं, "शिलान्यास के कार्यक्रम से पहले कुंभ मे धर्म सभा की बैठक हुई थी, जिसमें साधु-संतों और सभी धर्माचार्यों ने सर्वसम्मति से तय किया था कि किसी दलित समुदाय के आदमी से ही शिलान्यास कराया जाएगा। मैं उस कार्यक्रम में बतौर कारसेवक तो मौजूद था ही, इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद का बिहार प्रदेश संगठन मंत्री होने के नाते भी मौजूद था। संयोगवश सभी धर्माचार्यों और साधु-संतों ने अपने निर्णय पर विचार करते हुए मुझे ही पहली ईंट रखने के लिए आमंत्रित किया।"

राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने को लेकर कामेश्वर कहते हैं, "हम लोग मिथिला के लोग है। हमारे अंदर बचपन से ही ये भाव आ जाता है कि भले ही संसार के लिए राम भगवान हों, मगर हमारे लिए लिए तो वो पाहुन (दामाद) ही हैं। मेरी मां रोज़ सुबह-शाम अपनी मातृभाषा में राम के ये गीत गुनगुनाया करती थीं। फिर छात्र जीवन में संघ से जुड़ गए। इस तरह परिवार से लेकर विद्यालय तक हर जगह हिंदुत्व और हिंदू संस्कृति के माहौल में ही बड़ा होते हुए मैं इस आंदोलन से जुड़ गया।"

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