--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों में में बढ़ती दागियों की संख्या पर चिंता जताते हुए राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया है कि अब वे अपने आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों का पूरा विवरण पार्टी की वेबसाइट सहित हर तरह के प्लेटफॉर्म पर जारी करें। अब इसका असर सबसे पहले बिहार में दिखने लगा है। क्योंकि इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार में दागी नेताओं की पैठ हमेशा से राजनीती में अच्छी रही है।
भाजपा में कुल 53 विधायक हैं जिनमें से 34 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं जेडीयू की बात की जाए तो 71 विधायकों में से 37, आरजेडी में 80 में से 46 और कांग्रेस के 27 में से 16 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
राजनीतिक पार्टियों पर नजर डाली जाए तो हर दल में आपराधिक मामले के लिप्त विधायकों की संख्या आधे से भी अधिक है। अब सभी दल कोर्ट का फैसला आने के बाद से इससे बचने का रास्ता ढूंढ रहे हैं।
अलग अलग दलों के नेताओं की ये बेचैनी देखकर ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कोई न कोई रास्ता निकाल हीं लेंगे। वैसे भी राजनीति में इसका चलन पहले से है कि अगर किसी नेता पर गंभीर आरोप लगे हैं तो उस नेता की पत्नी को पार्टीयां उम्मीदवार बना देती हैं। बिहार में शहाबुद्दीन, अनंत सिंह, सुरजभान सिंह, मुन्ना शुक्ला जैसे दर्जनों ऐसे उदाहरण भी है जिन पर आरोप लगने या जेल जाने के बाद उनकी पत्नी को उम्मीदवार बनाया गया। इनमें से लगभग सभी ने जीत भी दर्ज की।