--राजीव रंजन नाग, नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
●एक नवम्बर को रामलीला मैदान में इंडिया गठबंन की रैली की अनुमति मिली
एक नवंबर की रामलीला मैदान रैली से पहले, 30 अक्टूबर को होने वाले 'इंडिया' गठबंधन के एक अन्य कार्यक्रम की अनुमति को लेकर विवाद हुआ था। कांग्रेस इस कार्यक्रम को अपनी मुख्य रैली की शुरुआत (कर्टेन-रेज़र) के तौर पर आयोजित करना चाहती थी।
सरकार ने इंडिया गठबंधन को सरकारी अशोक होटल में कार्यक्रम करने की अनुमति देने से मना कर दिया है। वहां 'इंडिया' गठबंधन में शामिल 21 दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक "सार्वजनिक महाभियोग" आयोजित करने की योजना बनाई थी। 12 अक्टूबर को, राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 'लोकतंत्र के लिए मार्च' में हिस्सा लिया था।
इसबीच, हालांकि कांग्रेस को रामलीला मैदान में विरोध रैली करने की अनुमति मिल गई है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी हैं। विपक्षी गठबंधन कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी रैली करने की योजना बना रहा है। वे मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने रामलीला मैदान के अलावा किसी और जगह की ओर मार्च करने पर भी रोक लगा दी है।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन के अनुसार यह रैली कथित चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ है। हालांकि, इस अनुमति के साथ भीड़ प्रबंधन, सीसीटीवी निगरानी, भाषणों, परिवहन और कार्यक्रम खत्म होने के समय को लेकर कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। विपक्षी गठबंधन कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी रैली करने की योजना बना रहा है। वे मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस ने इस कार्यक्रम में 10 लाख लोगों को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए देश भर से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जुटा रही है। पुलिस के अनुसार, कांग्रेस को 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक रामलीला मैदान बुक करने के लिए 'नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' दिया गया है। हालांकि, इसके लिए उस प्राधिकरण से भी अनुमति लेनी होगी जिसके पास यह जमीन है। रैली 1 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित की जाएगी।
आयोजकों को निर्देश दिया गया है कि वे एंट्री और एग्जिट गेट, मंच, रामलीला मैदान के आसपास के इलाकों और बैठने की जगह सहित कई महत्वपूर्ण जगहों पर हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाएं। निगरानी व्यवस्था में रिकॉर्डिंग की सुविधा, कम से कम पांच स्क्रीन वाला मॉनिटरिंग सिस्टम और एक अलग सीसीटीवी कंट्रोल रूम होना चाहिए।
आयोजकों को पर्याप्त पानी के टैंकर और शौचालय (महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था के साथ) उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही, भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों (वॉलंटियर्स) को तैनात करना होगा। इन स्वयंसेवकों को एक जैसी पोशाक पहननी होगी या एक जैसे बैज लगाने होंगे, ताकि उन्हें आसानी से पहचाना जा सके।
स्पष्ट शर्तों में से एक यह है कि रैली 1 नवंबर को शाम 5 बजे समाप्त हो जानी चाहिए, जिसके बाद लोगों का वहां से जाना शुरू हो जाना चाहिए। पुलिस ने कहा है कि किसी भी परिस्थिति में कार्यक्रम का समय नहीं बढ़ाया जा सकता। आयोजकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि रैली में शामिल होने वाले लोग रामलीला मैदान में रात न रुकें - चाहे वह रैली से पहले हो या बाद में। सभी बसों, कारों, टेम्पो और अन्य वाहनों को ट्रैफिक पुलिस द्वारा तय की गई जगहों पर ही पार्क करना होगा।
पुलिस ने आयोजकों को यह भी निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि रैली शांतिपूर्ण रहे और इसमें शामिल होने वाले लोग कोई उपद्रव या हंगामा न करें। पुलिस ने रामलीला मैदान के अलावा किसी अन्य जगह की ओर मार्च करने पर भी रोक लगा दी है।
इसबीच, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने शनिवार को दिल्ली के इंदिरा भवन स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) मुख्यालय में पार्टी के विभिन्न संगठनों के प्रमुखों से मुलाकात की। इसके बाद, उन्होंने रैली की तैयारियों का जायजा लेने के लिए दिल्ली कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ एक बैठक की। एआईसीसी के कोषाध्यक्ष अजय माकन भी इन चर्चाओं में शामिल थे।
1 नवंबर की इस रैली से पहले, 30 अक्टूबर को होने वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के एक अन्य कार्यक्रम की अनुमति को लेकर विवाद हुआ था। कांग्रेस इस कार्यक्रम को अपनी मुख्य रैली की शुरुआत (कर्टेन-रेज़र) के तौर पर आयोजित करना चाहती थी।
पार्टी का आरोप है कि उसे सरकारी अशोक होटल में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी गई। वहां 'इंडिया' गठबंधन में शामिल 21 दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक "सार्वजनिक महाभियोग" आयोजित करने की योजना बनाई थी। 12 अक्टूबर को, राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 'लोकतंत्र के लिए मार्च' में हिस्सा लिया था।



