--विजया पाठक, एडिटर - जगत विजन, रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
●करीब एक हजार करोड़ रुपये के कथित समाज कल्याण घोटाले और भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े लोहा चोरी प्रकरण की जांच से बढ़ी हलचल
●पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड समेत कई अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
●भूपेश सरकार में भ्रष्ट अफसरों की चलती थी मनमर्जी
●शासकीय योजनाओं का पैसा डकार गये भ्रष्ट अधिकारी
छत्तीसगढ़ में केंद्रीय जांच ब्यूरो की सक्रियता ने प्रशासनिक और कारोबारी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। राज्य में दो चर्चित मामलों को लेकर जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर निगाहें टिकी हुई हैं। पहला मामला समाज कल्याण विभाग में दिव्यांगजनों के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें लगभग 1000 करोड़ रुपये की राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। दूसरा मामला भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े कथित लोहा चोरी और उससे संबंधित कारोबारी नेटवर्क की जांच का है। इन दोनों मामलों की प्रकृति अलग-अलग है, लेकिन इनके केंद्र में सरकारी व्यवस्था, निगरानी तंत्र और कथित अनियमितताओं की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण सवाल हैं। समाज कल्याण विभाग के मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चा है, जबकि भिलाई में लोहा चोरी के प्रकरण में ट्रांसपोर्ट कारोबारी इंद्रजीत सिंह उर्फ छोटू और स्थानीय नेटवर्क की गतिविधियां जांच का विषय बताई जा रही हैं।
•समाज कल्याण विभाग में 2020-21 में दिव्यांगों के नाम पर करीब एक हजार करोड़ की रकम की हुई थी हेराफेरी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सीबीआई जांच के निर्देश दिये थे, लेकिन तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने संदेहियों के साथ मिलकर अदालत में दलील दी थी कि राज्य में जांच एजेंसियां इस घोटाले की विवेचना करने में सक्षम हैं। यही नहीं कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड को राहत दिलाने के लिए कई रोडे़ भी अटकाये थे। यह भी बताया जाता है कि कानूनी दांव पेंचों का सहारा लेकर प्रभावशील आरोपियों ने अदालत से स्टे भी प्राप्त कर लिया था। इस दौरान दलील दी गई थी कि छत्तीसगढ़ राज्य में सीबीआई की एंट्री पर बैन है। हालांकि लंबी चली कानूनी जंग के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को मामला सौंप दिया था। सूत्र तस्दीक कर रहे हैं कि इसी माह चार्जशीट दाखिल किये जाने के आसार हैं। सीबीआई ने इसकी तैयारी भी कर ली है। यह भी बताया जाता है कि आरोपी बनाए गए ज्यादातर आईएएस अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि समाज कल्याण विभाग में पदस्थ आधा दर्जन से ज्यादा द्वतीय और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों को भी एजेंसी ने नामजद किया है।
•हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद
समाज कल्याण विभाग के कथित घोटाले की जांच को लेकर न्यायिक स्तर पर भी विवाद सामने आया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने का प्रश्न उठा। उस समय राज्य सरकार की ओर से राज्य की जांच एजेंसियों की क्षमता और अधिकार क्षेत्र से संबंधित दलीलें पेश किए जाने की बात कही गई थी। सीबीआई की जांच को लेकर विवाद का एक प्रमुख पहलू राज्य में केंद्रीय एजेंसी की सहमति और अधिकार क्षेत्र से जुड़ा था।
•पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड की भूमिका पर सवाल
इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड का नाम चर्चा में रहा है। उनके अलावा अन्य वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारियों के नामों को लेकर भी दावे किए जाते रहे हैं। इनमें सुनील कपूर, एमके राउत और डीएल अग्रवाल के नाम का उल्लेख भी सामने आया है। लेकिन किसी व्यक्ति का नाम चर्चा में होना, जांच के दायरे में होना और औपचारिक रूप से आरोपी बनाया जाना अलग-अलग स्थितियां हैं। विवेक ढांड का शराब कारोबार से संबंधित कथित अनियमितताओं के आरोप भी शामिल हैं। इस आदिवासी बाहुल्य राज्य में आदिवासियों की कल्याणकारी योजनाओं का पैसा विवेक ढांड जैसे भ्रष्ट अफसर डकार जाते हैं। इन अफसरों ने भूपेश सरकार में जो भ्रष्टाचार किया है उसकी परतें खुलना चाहिए और अब ऐसे भ्रष्ट अफसरों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ठोस एक्शन लेना चाहिए।
•क्या इसी माह दाखिल होगी चार्जशीट?
मामले को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि सीबीआई आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है और इस प्रक्रिया के बाद कुछ वरिष्ठ अधिकारियों सहित अन्य संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
•भिलाई स्टील प्लांट में लोहा चोरी का मामला
सीबीआई की सक्रियता का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भिलाई स्टील प्लांट से जुड़े कथित लोहा चोरी प्रकरण से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में स्थानीय ट्रांसपोर्ट क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों और कारोबारियों की गतिविधियों की जांच की चर्चा है। आरोपों का केंद्र यह है कि औद्योगिक सामग्री की चोरी और उसके परिवहन या बिक्री में कथित तौर पर एक नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।



