--राजीव रंजन नाग, नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी न्यायिक हिरासत के खिलाफ दायर याचिका वापस ले ली है। रिपोर्ट के अनुसार, विशेष ईक्जक्यूटिव मैजिस्ट्रेट (एसईएम) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी गई थी। यह फैसला हाई कोर्ट के सुझाव के बाद लिया गया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट्स) पर कोई राय नहीं बनाई है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने कहा, "मान लीजिए कि आज शाम 4 बजे चीजें आपके पक्ष में हो जाती हैं, तो मामला ही खत्म हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो कल रिवीजन याचिका या अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की जा सकती है। क्या आप आज ही अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं, जबकि कानूनन इसकी जरूरत शायद न हो? उन्होंने कहा, "हमें बहस तभी करनी चाहिए जब यह जरूरी हो। आज लोगों का ध्यान खींचने के लिए बहस करने की कोई जरूरत नहीं है।" उन्होंने सलाह दी कि हाई कोर्ट आने से पहले उन्हें रिवीजनल कोर्ट (निचली अदालत) जाना चाहिए।
रांका और दास की ओर से पेश वकील अभिक चिमनी ने दलील दी कि यह आदेश टिकने लायक नहीं है। उन्होंने कोर्ट से कहा, "मेरी सबसे बुनियादी दलील यह है कि प्रिवेंटिव कस्टडी (एहतियाती हिरासत) को मनमाने ढंग से लागू नहीं किया जा सकता।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि 19 अक्टूबर का आदेश पूरी तरह से गलत था, क्योंकि एसईएम कोर्ट के पास हिरासत बढ़ाने का अधिकार क्षेत्र ही नहीं था। उन्होंने एसईएम का आदेश पढ़कर बताया कि उसमें दी गई तस्वीरों और दास के माता-पिता के विवरण आदि में विसंगतियां थीं।
हालांकि, कोर्ट के बार-बार सुझाव देने के बाद, चिमनी ने कहा कि आज एसईएम कोर्ट में सुनवाई के बाद वे आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला लेंगे। रंका और दास 14 अक्टूबर से न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी न्यायिक हिरासत बुधवार को खत्म होने वाली है और आज उन्हें एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के सामने पेश किया जाना है।
मंगलवार को, सीजेपी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, ताकि दास और रंका को न्यायिक हिरासत से रिहा करने की उनकी याचिका को 21 अक्टूबर (बुधवार) के लिए सूचीबद्ध (लिस्ट) किया जा सके। दिल्ली के एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ने सोमवार को दास और रंका की हिरासत बढ़ा दी थी - उसी दिन, जब उनकी शुरुआती पांच दिन की हिरासत अवधि खत्म होने वाली थी।
उनकी ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जमानत पेश करने के बावजूद दोनों नेताओं को लंबे समय तक हिरासत में रखा गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि एसईएम ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल "मनमाने ढंग से" किया और उन्हें अपनी तैयार जमानत पेश करने का "मौका नहीं दिया गया"।



