देश के प्रमुख शिक्षाविदों ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की



--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।

जाने-माने शिक्षाविदों, लेखकों और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने - जिसमें जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के रिटायर्ड प्रोफेसर भी शामिल हैं - केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने मंत्री से अपनी विफलता की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफ़ा देने को कहा है।

यह विफलता सरकार के उस कुप्रबंधन से जुड़ी है जिसके कारण नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) अंडरग्रेजुएट नतीजों और अन्य परीक्षाओं के आयोजन में गड़बड़ी हुई।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षाविद और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का वज़न उनकी 20 दिनों से चल रही भूख हड़ताल के दौरान काफ़ी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि उनकी जान, और उनके साथ भूख हड़ताल में शामिल छात्रों की जान, "खतरे में" है। वांगचुक पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की गई थी।

धर्मेंद्र प्रधान को लिखे पत्र में कहा गया है कि सोनम वांगचुक, जो एक शिक्षा और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं और जिन्हें आप अच्छी तरह जानते हैं, पिछले बीस दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वे नीट और अन्य परीक्षाओं के आयोजन में हुई गड़बड़ी के लिए सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और इस जवाबदेही के प्रतीक के तौर पर शिक्षा मंत्री के पद से आपके इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। उनका वज़न लगभग दस पाउंड कम हो गया है और उनकी जान, जो देश के लिए बेहद कीमती है, खतरे में है।

कई छात्र भी भूख हड़ताल पर हैं। उनकी जान भी खतरे में है। अगर उन्हें कुछ भी होता है, तो आने वाली पीढ़ियां इसके लिए सीधे तौर पर आपको ज़िम्मेदार ठहराएंगी और कीमती जानें दांव पर लगाकर पद पर बने रहने के आपके व्यवहार को बेहद शर्मनाक मानेंगी। दूसरी ओर, अगर आप सरकार की विफलताओं की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देते हैं, तो यह एक सम्मानजनक कदम होगा। हो सकता है कि आपको लगता हो कि इस्तीफ़ा न देकर आप अपनी पार्टी और सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे हैं, लेकिन अंततः कोई भी व्यक्ति अपने कार्यों की नैतिक ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता। हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप सम्मानजनक रास्ता अपनाएं और सरकार की विफलताओं की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए मंत्री पद से इस्तीफ़ा दें, और श्री वांगचुक तथा भूख हड़ताल पर बैठे आदर्शवादी छात्रों की जान बचाएं।

पत्र पर रोमिला थापर, प्रोफ़ेसर एमेरिटस, जेएनयू, प्रभात पटनायक, प्रोफ़ेसर एमेरिटस, जेएनयू, जॉन दयाल, लेखक और एक्टिविस्ट, सुनंदा सेन, रिटायर्ड प्रोफ़ेसर, जेएनयू, उत्सा पटनायक, प्रोफ़ेसर एमेरिटस, जेएनयू, ज़ोया हसन, प्रोफ़ेसर एमेरिटस, जेएनयू, सी.पी. चंद्रशेखर, रिटायर्ड प्रोफ़ेसर, जेएनयू, नीरा चंडोक, रिटायर्ड प्रोफ़ेसर, दिल्ली यूनिवर्सिटी, और पूर्व आईएएस अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर शामिल हैं।

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