वाराणसी में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया ब्रह्मलीन श्री श्री 108 श्री देवी प्रसाद जी का अवतरण दिवस



वाराणसी
उत्तर प्रदेश
इंडिया इनसाइड न्यूज।

■कालभैरव और लहरतारा पर अनुयायियों ने केक काटकर मनाया उत्सव, जरूरतमंदों में किया प्रसाद व जूस का वितरण

■भजन कार्यक्रम में गायक विपुल ने बांधा समाँ, गुरु जी के विचारों को आत्मसात करने का लिया संकल्प

मैहर माता शारदा देवी के पूर्व प्रधान पुजारी, परम भजनानंदी, ब्रह्मलीन श्री श्री 108 श्री देवी प्रसाद जी महाराज का अवतरण दिवस वाराणसी में उनके अनुयायियों और भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा, हर्षोल्लास और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर काशी के कालभैरव और लहरतारा क्षेत्रों में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

अपने पूज्य गुरुदेव के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में भक्तों ने भव्य भंडारे (प्रसाद वितरण) का आयोजन किया। इसके साथ ही, भीषण गर्मी को देखते हुए काल भैरव मंदिर के समीप अनुयायियों ने विशेष स्टॉल लगाकर राहगीरों और दर्शनार्थियों के बीच ठंडे जूस का वितरण किया। लहरतारा और कालभैरव दोनों ही स्थानों पर भक्तों ने केक काटकर अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

अवतरण दिवस के अवसर पर एक भव्य भजन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गायक विपुल ने अपनी सुमधुर आवाज में एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति देकर समाँ बांध दिया। भजनों की धुन पर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।

इस मौके पर वक्ताओं ने स्वामी जी के दिव्य संदेशों को याद करते हुए कहा कि गुरु जी हमेशा जातिवाद और धर्मवाद से ऊपर उठकर इंसानियत की राह पर चलने की सीख देते थे। उनका मानना था कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा है'। न जाने नारायण किस रूप में हमारे सामने आ जाएं, इसलिए हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए।

गुरु जी अक्सर प्रेरणा देते थे कि मनुष्य को अपने तन को संसार के कर्मों में लगाते हुए, मन से हमेशा भगवान के नाम का सुमिरन करना चाहिए। उन्होंने चेताया था कि सांसारिक बैंक बैलेंस आज नहीं तो कल खत्म हो जाएगा, लेकिन भगवान के नाम का जो बैलेंस (पुण्य) होगा, वही परलोक में जीवन को सँवारेगा।

इस पूरे सेवा और धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य रूप से ओम प्रकाश शास्त्री, चंद्रशेखर शास्त्री, विजय गुप्ता, आशीष सिंह, अजीत मिश्रा, विपुल सिंगर और बाबू शिवा दीपक सहित भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और गुरु भक्त उपस्थित रहे।

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