मील का पत्थर साबित होगी 'हिन्दी लघुकथा का शास्त्रीय अध्ययन' पुस्तक



--एकलव्य कुमार,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

लेखक डॉ. ध्रुव कुमार की नई पुस्तक "हिन्दी लघुकथा का शास्त्रीय अध्ययन" का सोमवार को खादी मॉल में लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर समारोह की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी के प्रसिद्ध कथाकार व उपन्यासकार अवधेश प्रीत ने कहा कि किसी भी साहित्यिक विधा के लिए सृजन के साथ-साथ आलोचना भी बहुत जरूरी पक्ष है। इस दिशा में लघुकथा आलोचना पर शोधपरक गंभीर कार्य की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। "हिन्दी लघुकथा का शास्त्रीय अध्ययन" ने इस कमी को पूरा किया है। इस महती कार्य के लिए इस पुस्तक के लेखक डॉ. ध्रुव कुमार बधाई के पात्र हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि लघुकथा को विद्यालय और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में भी शामिल किया जाना चाहिए जिससे नई पीढ़ी इस सशक्त विधा से परिचित हो सके।

वहीं समारोह के मुख्य अतिथि व वरिष्ठ लघुकथाकार व कवि डॉ. भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि डॉ. ध्रुव की यह पुस्तक लघुकथा समालोचना के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।

जेपी विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनीता राकेश ने लघुकथा को साहित्य की सबसे सशक्त विधाओं में एक बताया।

लेखिका ममता मेहरोत्रा ने कहा कि यह पुस्तक लघुकथा के कथ्य, तथ्य व सौंदर्य पर गंभीर चिंतन की उपज है। उन्होंने कहा कि यह किताब लघुकथा समालोचना का प्रतिमान तय करने वाली विशिष्ट पुस्तक सिद्ध होगी।

उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव व कवि दिलीप कुमार ने कहा कि इस पुस्तक से लघुकथा की रचना और समीक्षा को लेकर जारी अनेक भ्रांतियां दूर होंगी।

लेखक व खादी मॉल के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच डॉ. ध्रुव लगातार गंभीर लेखन में जुटे हैं।

वहीं इस पुस्तक के लेखक डॉ. ध्रुव ने कहा कि जिस विधा की समीक्षा व आलोचना जितनी पैनी और धारदार होगी, सृजन उतना ही अधिक सार्थक और समाजोपयोगी होगा।

पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर साहित्य अकादमी के सदस्य प्रो. अरुण भगत, डॉ. प्रभास कुमार, चितरंजन भारती, विभा रानी श्रीवास्तव, अनिल रश्मि, पंकज प्रियम, अभय सिन्हा, अर्चना त्रिपाठी, सोमा चक्रवर्ती, लता पराशर, मोहन कुमार, सुधीर मधुकर, जितेंद्र कुमार सिन्हा, विनय कुमार विष्णुपुरी, दिनेश दिवाकर, प्रभास कुमार, रवि श्रीवास्तव, एकता कुमारी, प्रेमलता सिंह, बी एन विश्वकर्मा, मेहता नगेन्द्र सिंह भी मौजूद थे।

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