संवेदनाओं के सम्प्रेषण का सुगम मार्ग है़ लघुकथा : डॉ. ध्रुव कुमार



--एकलव्य कुमार,
पटना सिटी-बिहार,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

वैश्विक मंच पर लघुकथा के माध्यम से हम जीवन के सभी पहलुओं का आत्मिक चित्रण कर सकते हैं। आज यह विधा सशक्त रूप से साहित्य के क्षितिज पर सर्वमान्य हो गई है़, साथ ही कम समय में सबकुछ मिल जाने के कारण सभी वर्ग के पाठकों में लोकप्रिय हो रही है़। सच कहा जाए तो संवेदनाओं के सम्प्रेषण का सुगम मार्ग है़ लघुकथा। ये बातें महेन्द्रू स्थित "व्योम सभागार" में स्वराँजलि द्वारा अयोजित वरीयतम लघुकथाकर व शिक्षाविद डा.सच्चिदानंद सिंह साथी के प्रथम जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरीय लघुकथाकार व लेखक डॉ. ध्रुव कुमार ने कही।

उन्होंने कहा कि इन दिनों लघुकथाकारों ने लघुकथा लेखन में नाटकीय शैली का प्रयोग किया है़। यदि इसपर मंचन हो तो जीवंतता तो दिखेगी ही लघुकथा का भविष्य कालजई होगा।

इस अवसर पर चर्चित लघुकथाकारों ने लघुकथाओं का पाठ किया। डॉ. साथी की लघुकथा संग्रह : "चरैवेति लघुकथायें" में से उनकी ही लघुकथा का पाठ किया गया।

डॉ. ध्रुव कुमार ने "अनकहा दर्द" व "गुरु दक्षिणा", प्रभात कुमार धवन ने "अंतः स्वर" और "कहां गया देश", अहमद रज़ा हाशमी ने "भींगती पलकें", "सर्वशिक्षा चालीसा", नेक आलम ने "निरुत्तर" तथा "कर्तव्य" का पाठ किया। लघु कथाकार आलोक चोपड़ा ने "जनता जनार्दन", "श्रद्धांजलि", प्रोफ़ेसर अनिता राकेश ने "भगवान? "सच का सवाल", अनिल रश्मि ने "पीड़ित मानवता के लिए", "देश की ख़ातिर", प्रोफ़ेसर डॉ. सूर्य प्रताप ने "बायोडाटा" व "रिक्शा का किराया" तथा वीरेंद्र भारद्वाज ने लघुकथा "माल्यार्पण" और "फाईल का सच" का पाठ किया।

लघुकथाकारों ने कहा कि डॉ. साथी की लघुकथाओं में जहाँ एक ओर अंतहीन वेदनाएं दिखतीं हैं तो दूसरी ओर बिगड़ी व्यवस्था पर करारा प्रहार करती है़ और समाज को आईना दिखाती है़।

कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ. साथी के चित्र पर साहित्यकरों ने पुष्प व माला अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर अभिनेता व साहित्यप्रेमी जितेंद्र कुमार पाल, दूधेश्वर प्रसाद गुप्ता, राजा पुट्टु, संजय यादव, डॉ. विजेंद्र चंद्रवंशी मौजदू थे।

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