पार्टी छोड़ने के एलान पर तृणमूल कांग्रेस ने छह साल के लिए किया निलंबित



--- रंजीत लुधियानवी, वरिष्ठ पत्रकार, कोलकाता।

कभी ममता बनर्जी के दाहिना हाथ रहे और बीते कई महीनों से हाशिए पर चल रहे तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य मुकुल राय ने सोमवार को पार्टी छोड़ने का एलान किया। उसके कुछ देर बाद ही तृणमूल कांग्रेस ने उनको पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निलंबित कर दिया। पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी ने इसकी जानकारी दी।

चटर्जी ने कहा कि राय कुछ समय से पार्टी को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी की अनुशासन समिति ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से राय को सजा देने की सिफारिश की। उसके बाद उनको छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया है।

इससे पहले मुकुल राय ने सुबह पार्टी की कार्यकारी समिति से और दुर्गापूजा के बाद प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा देने का एलान किया था। पार्थ चटर्जी ने सवाल किया कि अगर राय पार्टी छोड़ना ही चाहते हैं तो वे इसी समय ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं ? उनको ऐसा करने से कौन रोक रहा है ?

ध्यान रहे कि बीते साल भर से मुकुल राय को पार्टी में कोई खास तवज्जो नहीं मिल रही थी। ममता ने बीते दिनों उनको पार्टी के उपाध्यक्ष पद, राज्यसभा में पार्टी के नेता के साथ ही तमाम संसदीय समितियों से भी हटा दिया था। उसके बाद राय ने राज्य सरकार की ओर से मिली सुरक्षा लौटा दी थी। 21 जुलाई को यहां तृणमूल कांग्रेस की सालाना शहीद रैली में मंच पर मौजूद होने के बावजूद राय को बोलने का मौका नहीं दिया गया। उसके बाद राय के भाजपा में जाने की भी अफवाहें उड़ती रहीं। बीते सप्ताह ही तृणमूल कांग्रेस ने भाजपाइयों से मेल-जोल बढ़ाने के लिए राय की खिंचाई की थी।

राय ने सुबह पत्रकारों से कहा कि तृणमूल के गठन के समय वे हस्ताक्षकर्ताओं में से एक थे। लेकिन अब उन्होंने भारी मन से आज कार्यकारी समिति से इस्तीफा देने का फैसला किया है। उन्होंने पूजा के बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता व राज्यसभा से भी इस्तीफा देने का एलान किया। राय ने कहा कि वे पूजा के बाद ही इसका खुलासा करेंगे कि उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला क्यों किया और इसके लिए उन पर कैसा दबाव था। उन्होंने कहा कि पार्टी के संस्थापकों में से एक होने के बावजूद उनकी अनदेखी की जा रही थी और कोई अहम पद नहीं दिया जा रहा था। क्या वे भाजपा में शामिल होंगे ? इस सवाल पर राय ने कहा कि उ्नको जो कहना है, पूजा के बाद ही कहेंगे। राज्य के लोग दुर्गा पूजा के दौरान राजनीतिक विवाद नहीं चाहते।

तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने बीते शुक्रवार को राय के लगातार दिल्ली दौरे और वहां भाजपा नेताओं से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा था कि भाजपा के मित्र तृणमूल कांग्रेस के मित्र नहीं हो सकते। उन्होंने कहा था कि राय ने अगर सीमा लांघने का प्रयास किया तो पार्टी उनसे बातचीत करेगी। चटर्जी ने आज कहा कि ममता बनर्जी ने राय को कई अहम पद सौंपे थे। लेकिन महज अपने निजी हितों का ध्यान रखते हुए पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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