--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■09 माह बाद भी कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं कर सके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन
■पार्टी के कार्यकर्ता और नेताओं में भेदभाव करने में अव्वल है नितिन
■पार्टी कार्यालय के बाहर भी आने लगा है नितिन नबीन के प्रति कार्यकर्ताओं का गुस्सा
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को पार्टी के शीर्ष पद पर बैठे हुए लगभग 9 महीने का समय पूरा होने को आया। लेकिन 09 महीने में नितिन नबीन ने ऐसे 09 कार्य भी नहीं किये जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते उन्हें करना चाहिए। उनके कार्यकाल में पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष, वैमनस्य से लेकर मनमुटाव जैसे मामले ही सामने आये हैं। फिर बात चाहे दिल्ली भाजपा की हो, राजस्थान भाजपा की हो या फिर मध्यप्रदेश की। मध्यप्रदेश में तो आलम यह हुआ कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इशारे पर दतिया उपचुनाव में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटा गया तो नाराज नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने सड़क से लेकर रेल तक जाम कर दिया था। हर तरफ नितिन नबीन की साजिश उजागर हो गई और समर्थकों का गुस्सा फूटकर सड़क पर आ गया। नितिन नबीन की इस साजिश का आंकलन जब पार्टी के वरिष्ठ नेता अमित शाह और संगठन के पदाधिकारियों को चला तो उन्हें आगे बढ़कर नरोत्तम मिश्रा से बात कर समर्थकों को शांत करने को कहा। कहने का आशय यह है कि एक अनुभवहीन और गैर जिम्मेदार व्यक्ति को अगर सड़क से उठाकर अचानक ताज पर बैठने को कहा जायेगा तो वह ताज को कैसे संभालेगा।
●कभी राष्ट्रीय अध्यक्ष का था दबदबा
अगर हम भारतीय जनता पार्टी के अब तक के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इतिहास पर नजर डाले तो उस समय में और आज के समय में जमीन आसमान का अंतर सामने आता है। एक समय था जब इस पार्टी की कमान लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजनाथ सिंह, वैंकैया नायडू, अमित शाह, डॉ. जेपी नड्डा जैसे दिग्गत नेताओं के हाथ में थी। लेकिन इस बार पार्टी आलाकमान ने जिस ढंग से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को साधने के लिए नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर बैठाकर जो प्रयोग किया है उसका खामियाजा आने वाले चुनाव में पार्टी को झेलना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार पार्टी के आलादर्जे के नेता बिल्कुल नहीं चाहते कि कोई प्रभावी व्यक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष बने इसी कारण उन्होंने डमी कैंडिडेंट के रूप में नितिन नबीन जैसे हारे हुए व्यक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद सौंपा।
●छत्तीसगढ़ में फूट डालने का किया था काम
वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने नितिन नबीन को प्रदेश प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी। सूत्रों के अनुसार नबीन ने छत्तीसगढ़ राज्य के अंदर पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच ऐसी फूट डाली कि पार्टी का चुनाव जीतना मुश्किल हो गया था। जब छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं को नितिन नबीन की इस दोहरेपन का पता चला तो उन्होंने अपने बल पर चुनाव की तैयारियां आरंभ की और मुख्यमंत्री डॉ. विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की। यही नहीं नबीन ने जबरदस्ती दबाव बनाकर कुछ दिनों पहले गौतम अदाणी की कंपनी को 1200 करोड़ रुपये की खदान दिलवाई।
●हारे हुए व्यक्ति साबित हुए नबीन
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी ने नबीन की बांकीपुर सीट खाली कराई और वहां उपचुनाव कराने का फैसला किया। बांकीपुर की जनता नितिन नबीन के भ्रष्टाचारों और दुराचारों से इतनी त्रस्त हो गई कि उन्होंने नबीन के स्थान पर खड़े हुए भाजपा के अन्य प्रतिनिधि को भी वोट करने से साफ इंकार कर दिया और परिणाम यह हुआ कि भाजपा को बांकीपुर सीट जो कभी भाजपा का गढ़ कही जाती थी उससे हाथ धोना पड़ा। विधानसभा सीट छोड़ बाहर निकलते ही नितिन नबीन के कारगुजारे सामने आने लगे। आलम यह हो गया कि बांकीपुर की जनता नितिन नबीन को दोबारा अपने विधानसभा क्षेत्र में घुसने भी नहीं देना चाहती है।
●दलित नेता होने कारण टटवाल को धकेला पीछे
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने उज्जैन आये राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने जिले के प्रथम नागरिक मुकेश टटवाल के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार किया जिससे उज्जैन की जनता खासी नाराज है। दरअसल नितिन नबीन के आने पर उज्जैन में रोड शो का आयोजन किया गया। यह रोड शो के आयोजन की जिम्मेदारी जिला अध्यक्ष के साथ स्वयं मुकेश टटवाल ने संभाली थी। लेकिन दलित वर्ग होने का करण मुकेश टटवाल को नितिन नबीन के इशारे पर नीचे उतार दिया गया। अपने ही पार्टी के कार्यकर्ता और नेता के साथ ऐसा दुर्व्यवहार करते समय नितिन नबीन को तनिक भी शर्म नहीं आई और उन्होंने बड़ी ही बेशर्मी से मुकेश टटवाल को गाड़ी से उतारने का इशारा कर दिया। भला ऐसा राष्ट्रीय अध्यक्ष किस काम जो अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं में भेदभाव करे। भाजपा के इतिहास में अभी तक ऐसा कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हुआ जिसने कभी कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक तौर पर इस तरह से दुर्व्यवहार किया हो। लेकिन अशिक्षित नितिन नबीन के संस्कार इस एक कदम से साफ तौर पर दिखाई पड़ गये।