मानव झरण खिलाने के लिए डाक्टर पर बल प्रयोग



कोलकाता। प्रीमिग्रैविडा मरीज को 28 अगस्त को डेब्रा ग्रामीण अस्पताल में दर्द के साथ भर्ती कराया गया। हालाकि उसे बड़े अस्पताल ले जाने के लिए निर्देश दिया गया परन्तु मरीज के लोगों ने कहा कि वे रोगी को निरीक्षण के लिए आज इसी अस्पताल में रखना चाहते हैं और अगले दिन सुबह ही रोगी को यहाँ से ले जाएंगे। आधी रात में मरीज प्रसव में चला गया। चिकित्सक ने मरीज को मुश्किल योनि वितरण की आशंका जाहीर की और समझाते हुए बताया कि भ्रूण के सिर पर कुटीर गठन है परन्तु मरीज के लोगों ने फिर से इनकार किया। कुछ समय बाद सिस्टर ने एपीसीओटोमी देते हुए बच्चे की प्रसव के दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन यह श्रम बाधित था। अंत में मरीज के लोग उसे वहाँ से ले कर चले गए।

शिशु का जन्म डेब्रा के एक नर्सिंग होम में हुआ और शिशु के जन्म के बाद उसकी खराब स्थिति (श्वासावरोध) के कारण उसे उच्च केन्द्र ले जाने के लिए निर्देश दिया गया था। प्रत्यक्ष तौर पर शिशु की माता अच्छी अवस्था में है।

गुंडों के रूप में लोग वापस आए व अचानक डाक्टर व नर्सों पर धावा बोल दिया। चेंजिंग रूम से नर्सों को खींच कर बाहर लाते हुए ताड़ना शुरू किए तथा मानव झरण खिलाने के लिए डाक्टर पर बल प्रयोग करने लगें। बंगाल राज्य में डाक्टरों के प्रति इस प्रकार का व्यवहार बेहद घटिया व निंदनीय है।

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