--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
भोपाल - मध्यप्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■सागर शराब त्रासदी मौतों के पीछे किसका संरक्षण, जवाबदेही तय कब होगी?
■क्यों अब तक मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से इस संबंध में पार्टी और संगठन ने नहीं किया कोई सवाल
■सागर में पिछले 05 सालों में जितनी आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं, उनका कहीं न कहीं कनेक्शन मंत्री राजपूत से है
■सागर के बंडा में अवैध और जहरीली शराब निर्माण का कार्य भी वर्षों से मंत्री राजपूत के संरक्षण में फल फूल रहा था
सागर के बंडा और आसपास के इलाकों में जहरीली शराब से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश की कानून-व्यवस्था, आबकारी तंत्र और राजनीतिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना केवल अवैध शराब बेचने वालों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने तक सीमित नहीं रह सकती। असली सवाल यह है कि जिस अवैध शराब के नेटवर्क ने इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी को जन्म दिया, वह इतने समय तक सक्रिय कैसे रहा और उसके पीछे राजनीतिक, प्रशासनिक तथा कारोबारी संरक्षण का कोई तंत्र था या नहीं? यह सवाल इसलिए है क्योंकि बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब की घटना सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने एक संगठित नेटवर्क की बात सामने रखी है। पुलिस के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर शराब तैयार करने, उसे सस्ते दामों पर बेचने और गांवों तक पहुंचाने की कड़ियां सामने आईं।
●38 मौतों के दावे से उठे सवाल
घटना के शुरुआती दिनों में मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे। स्थानीय और राजनीतिक दावों में मृतकों की संख्या इससे अधिक बताई गई, जबकि प्रशासन और बाद में राज्य सरकार की न्यायालय में प्रस्तुत रिपोर्ट में झूठ बोलते हुए 20 मौतों की बात कही। ऐसे में बड़े सवाल यह है कि आखिर इन 38 मौतों का सौदागर कौन है। क्यों प्रशासन इस सौदागर के संरक्षक को गिरफ्तार करने ने असफल है। सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश शासन में मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी नेता गोविंद सिंह राजपूत के तार इस पूरे मामले से बहुत करीब जुड़े हुए हैं। चर्चा है कि राजपूत के इशारे और संरक्षण में ही पूरे सागर जिले में जहरीली शराब का अवैध कारोबार फल फूल रहा है। यही नहीं राजपूत के संरक्षण में पिछले 05 सालों में जिले कानून व्यवस्था पूरी तरह लचर हो गई है और भ्रष्टाचार, आपराधिक घटनाएं कई गुना बढ़ गई हैं।
●मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर उठे आरोपों की जांच क्यों जरूरी?
घटना के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर शराब कारोबार से जुड़े लोगों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों में उनके जन्मदिन पर शराब ठेकेदारों द्वारा विज्ञापन दिए जाने और कुछ लोगों के साथ उनके सार्वजनिक संपर्कों का उल्लेख भी किया गया। हालांकि ये राजनीतिक आरोप हैं और राजपूत ने इन्हें खारिज करते हुए कहा है कि उनका या उनके परिवार का अवैध अथवा जहरीली शराब के कारोबार से कोई संबंध नहीं है। यहीं से सवाल और गंभीर हो जाता है। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए। और यदि जांच में किसी प्रकार का प्रशासनिक, कारोबारी या राजनीतिक संबंध सामने आता है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। बड़ा सवाल यह भी है कि मंत्री की जानकारी के बगैर वर्षों से उनके क्षेत्र में कैसे इतना बड़ा अवैध शराब का कारोबार चल सकता है। निश्चित ही कहीं न कहीं इसके तार मंत्री राजपूत से जुड़े हुए हैं।
●पार्टी और संगठन ने साध रखी है चुप्पी
आश्चर्य करने वाली बात यह है कि अभी तक पार्टी और संगठन ने इस पूरे मामले पर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से किसी प्रकार से बातचीत करना तक उचित नहीं समझा। यही कारण है कि मंत्री राजपूत लगातार इस पूरे कारोबार को निचले स्तर तक पहुंचाने में कामयाब हुए हैं। अगर समय रहते पार्टी ने इस पर शिकंजा कस दिया होता तो यह नौबत नहीं आती और आम जनता को जनहानि नहीं होती। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इन मौतों के लिए सरकार किसे जिम्मेदार ठहराएगी। इतनी बड़ी घटना के बाद केवल पुलिस और आबकारी अधिकारियों से जवाब मांगना पर्याप्त नहीं होगा। गोविंद सिंह राजपूत क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली जनप्रतिनिधि हैं। ऐसे में उन पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच होना इसलिए भी आवश्यक है ताकि किसी राजनीतिक व्यक्ति की छवि केवल आरोपों के आधार पर खराब न हो और यदि कोई वास्तविक प्रशासनिक या राजनीतिक कड़ी हो तो वह भी जांच से सामने आए। पार्टी और संगठन को भी यही पारदर्शिता दिखानी चाहिए। सवाल यह है कि क्या संगठन ने मंत्री से इन आरोपों पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा? क्या यह पता लगाने का प्रयास हुआ कि शराब कारोबारियों और स्थानीय राजनीतिक तंत्र के बीच कोई संपर्क था या नहीं? क्या संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की गई?
●बंडा में वर्षों से चल रहे नेटवर्क की जांच
स्थानीय लोगों के अनुसार सागर की इस घटना ने बंडा क्षेत्र में अवैध शराब के पुराने नेटवर्क की चर्चा भी तेज कर दी है। पुलिस जांच में सामने आए विवरणों के अनुसार कथित नेटवर्क में शराब तैयार करने, अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाने और गांवों में स्थानीय विक्रेताओं के माध्यम से बेचने की कड़ियां थीं। कुछ मामलों में उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाया गया कि सस्ती शराब नकली नहीं है बल्कि वही ब्रांड है जिसे कथित तौर पर उसी “फॉर्मूले” से तैयार किया गया है। यह विवरण बताता है कि मामला किसी एक बोतल या किसी एक दुकान तक सीमित नहीं था। जांच में स्थानीय विक्रेताओं, कथित निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं और लाइसेंसधारी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने एक आरोपी को मुख्य आरोपी के रूप में चिंहित करते हुए कई गिरफ्तारियां की हैं।