--राजीव रंजन नाग
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज।
●कांग्रेस कार्य समितित के प्रस्ताव में कई राज्यों में वोटर लिस्ट के एसआईआर को रोकने की मांग
●13 लाख से ज़्यादा नाम वापस जोड़ने की भी मांग
●मोदी और शाह के कहने पर 'खुलेआम वोट चोरी' की गई
मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन और सांसद सोनिया गांधी, पार्टी सांसद केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, पी चिदंबरम, जयराम रमेश, कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला मौजूद रहे। इंडिया गठबंधन की बैठक से एक दिन पहले, मंगलवार (29 सितंबर) को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग की। यह मांग पिछले हफ़्ते 'इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट के बाद की गई जिसमें पता चला था कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तहत विवादित 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (एसआईआर) के कामकाज पर सवाल उठाए थे।
मोदी और शाह के इस्तीफ़े की कांग्रेस की यह मांग मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद आई। बैठक में पास किए गए प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के तुरंत इस्तीफ़े, कई राज्यों में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' को रोकने, वोटर लिस्ट से हटाए गए 13 लाख से ज़्यादा नामों को वापस जोड़ने और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की गई।
प्रस्ताव में कहा गया, "प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के कहने पर यह खुलेआम वोट चोरी की गई है। उनके इस्तीफ़े के बिना हमारे संविधान और मुश्किल से हासिल लोकतंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती।"
बैठक के बाद कांग्रेस सांसद और पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले पर बुधवार (30 सितंबर) को होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक में भी चर्चा की जाएगी, जिसमें नेता वोट की चोरी के खिलाफ़ देशव्यापी आंदोलन के बारे में फ़ैसला लेंगे। उन्होंने कहा, "कल इंडिया गठबंधन की बैठक है। कांग्रेस निश्चित रूप से चाहती है कि सभी राजनीतिक दलों की मदद से देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए एक बड़ा आंदोलन चलाया जाए। इंडिया गठबंधन के सदस्यों से महत्वपूर्ण सुझाव मिलेंगे, जिसके बाद हम भविष्य के आंदोलन के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करेंगे।" कांग्रेस कार्य समिति के प्रस्ताव के अनुसार भारत के चुनावों की निष्पक्षता को लेकर चिंताएं हैं, क्योंकि सीईसी अन्य चुनाव आयुक्तों से सलाह किए बिना फ़ैसले ले रहे हैं, जिससे यह प्रक्रिया "एक व्यक्ति का शो" बनकर रह गई है।
'द इंडियन एक्सप्रेस' ने पिछले हफ़्ते रिपोर्ट दी थी कि दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - ने एसआईआर प्रक्रिया पर 14 आपत्तियां जताई थीं, जिसमें 'फॉर्म 6' में किए गए बदलावों को "गैर-कानूनी" बताना भी शामिल था। कार्य समिति के प्रस्ताव में कहा गया, "देशव्यापी एसआईआर के दौरान कुछ बीजेपी-समर्थित अधिकारियों के हाथों में मतदाता सूची पर नियंत्रण का अभूतपूर्व केंद्रीकरण चुनाव आयोग की विश्वसनीयता के ताबूत में आखिरी कील साबित होता है।"
कांग्रेस कार्य समिति के सामने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अब लड़ाई "किसी पार्टी, संस्था या व्यक्ति के खिलाफ़ नहीं है, बल्कि भारत के मतदाताओं के अधिकारों, संविधान और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की है।"
"लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पहली शर्तों में से एक है। लेकिन क्या यह पूछना गलत है कि एसआईआर का फ़ैसला किसने लिया? उन्होंने कहा क्या यह पूछना गलत है कि दो चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से क्यों दूर रखा गया? क्या कुछ गुप्त चल रहा था?"
खरगे ने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि वोटर लिस्ट में हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए, जिन वोटर्स के नाम हटाए गए हैं उन्हें पूरी जानकारी दी जाए और अपील करने का मौका दिया जाए, राजनीतिक पार्टियों को समय पर वोटर लिस्ट दी जाए और जहां भी गंभीर गड़बड़ियों के सबूत मिलें, वहां एक स्वतंत्र और तय समय-सीमा वाली जांच हो।
उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे को सिर्फ़ चुनाव जीतने या हारने की लड़ाई के तौर पर नहीं देखते। चुनाव आते-जाते रहते हैं, सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान हमेशा बने रहते हैं। यही भारतीय लोकतंत्र की नींव है।"