--विजया पाठक
एडिटर - जगत विजन
रायपुर - छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज।
■सिद्धार्थ सिंघानिया को अपराधी से शासकीय गवाह बना रही जांच एजेंसियां
■कटघरे में राज्य की जांच एजेंसियां, करोड़ों की मिल रही रिश्वत
■70 अपराधियों में से कई को बचाने में लगी जांच एजेंसियां
भूपेश सरकार के समय हुए 2161 करोड़ के शराब घोटाले में कई सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। इस घोटाले में 70 लोग अपराधी हैं। जिनमें से कुछ अपराधियों को राज्य की जांच एजेंसियां बचाने में लगी हुई हैं। सूत्रों का कहना है कि 48 नंबर के अपराधी सिद्धार्थ सिंघानिया को ईओडब्ल्यू सरकारी गवाह बनाने वाली है। जिसके लिए सिद्धार्थ सिंघानिया ने 05 करोड़ की रिश्वत दी है। वहीं घोटाले के प्रमुख अपराधी आशीष सिंह, वैभव मित्तल और आशीष श्रीवास्तव को भी जांच एजेंसियां बचाने में लगी हैं। यह लोग भूपेश सरकार को पैसा कमाकर देते थे। बताया यह भी जा रहा है कि बीजेपी सरकार में भी कुछ नेता इन लोगों से पैसा ले रहे हैं। शराब घोटाले में ज्ञात/अज्ञात/संदेही/आरोपी लगभग नामजद 70 लोगों के खिलाफ एवं अन्य के विरूद्ध एफआईआर दर्ज किया गया, जिस पर शुरूआती दौर में अनेकों लोगों के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही की गई, जिसमें नामजद लोगों की गिरफ्तारी व उन्हें जेल भेजने तक की कार्यवाही की गई। कुछ समय उपरांत ईओडब्ल्यू/एसीबी रायपुर एवं ईडी रायपुर के अधिकारी एवं कर्मचारी उपरोक्त मामले को ज्ञात/अज्ञात आरोपियों से सांठगांठ एवं उनसे मिलकर इस मामले में संलिप्त लोगों को बचाने, छोड़ने का खेल चालू हो गया। आशीष श्रीवास्तव 2161 करोड़ के शराब घोटाले के मुख्य कर्ताधर्ता थे। उनको ईओडब्ल्यू/एसीबी रायपुर एवं ईडी रायपुर द्वारा आज दिनांक तक उनसे उपरोक्त अपराध के संबंध में कोई पूछताछ नहीं की गई। न ही उन्हें गिफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। आबकारी विभाग के द्वारा भी उनके विरूद्ध आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियां भी सांठगांठ/मिलीभगत एवं भ्रष्टाचार कर उससे लगातार बचाया जा रहा है।
●सिंडीकेट के माध्यम से होता था पैसों का लेन-देन
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में अनिल टुटेजा, संयुक्त सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा अनवर ढेबर, अरूणपति त्रिपाठी विशेष सचिव, आबकारी विभाग एवं एमडी छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड रायपुर के साथ सिंडिकेट के रूप में कार्य कर अनवर ढेबर के सहयोगी विकास अग्रवाल, अरविंद सिंह, संजय दीवान, देशी शराब आसवनी मालिक तथा जिला मुख्यालयों में पदस्थ आबकारी अधिकारियों के साथ मिलकर राज्य में मदिरा की बिक्री में अवैधानिक कमीशन की उगाही कर तथा बिना हिसाब के मदिरा की शासकीय मदिरा दुकानों में सप्लाई कर लगभग 2161 करोड़ रू. की अवैध कमाई की गयी है। इसी अवैध रकम से उच्च पदस्थ अधिकारी अनिल टुटेजा, अरूणपति त्रिपाठी एवं अनवर ढेबर द्वारा बहुत सारी अचल संपत्ति अर्जित की गयी है, जिसे ईडी द्वारा प्राविजनल अटैचमेंट आदेश क्रमांक 03/2023 के तहत अटैच भी किया गया है। ईडी द्वारा आयकर विभाग से प्राप्त सूचना के आधार पर ईसीआईआर क्रमांक 11/2022 पंजीबद्ध कर जांच की गयी तथा पीएमएलए एक्ट 2002 की धारा 3 एवं 4 के तहत कार्यवाही कर अनवर ढेबर, अरूणपति त्रिपाठी एवं अन्य को विशेष न्यायालय (पीएमएलए एक्ट) रायपुर में पेश कर रिमाण्ड प्राप्त किया गया है। जिसका प्रकरण लंबित है। सूत्रों से प्राप्त प्रमाणिक जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में देशी मदिरा के निर्माणकर्ता आसवनी मेसर्स छत्तीसगढ़ डिस्टलरीस लिमिटेड, मेसर्स भाटिया वाईन मर्चेंट प्रायवेट लिमिटेड एवं वेलकम डिस्टलरिस प्रायवेट लिमिटेड है, जिन्हें राज्य में देशी मदिरा प्रदाय करने का लाईसेन्स प्राप्त है। अनवर ढेबर द्वारा अनिल टुटेजा से अपने पारिवारिक संबंध एवं राजनितिक प्रभाव का लाभ लेते हुए सीएसएमसीएल के प्रबंध संचालक अरूणपति त्रिपाठी के साथ मिलकर शराब निर्माता आसवनी से शराब निर्माण कर उपलब्ध कराने के रेट में बढ़ोतरी करने जिसके एवज में आसवनी मालिकों से लाखों रूपयों का अवैध कमीशन प्राप्त किया गया। ईडी ने इसे पार्ट-ए के भ्रष्टाचार के रूप में दर्शित किया है कि व्यवस्था के समानांतर नयी व्यवस्था बनाकर आसवनी संचालकों से बिना रिकार्ड के देशी मदिरा इसी तरह देशी मदिरा के सप्लाई हेतु राज्य में बनायी गयी शासकीय शराब दुकानों का निर्माण कराकर डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर शासकीय मदिरा दुकानों के माध्यम से पृथक से बिक्री कराकर उससे करोड़ों रूपयों की अवैध कमाई की गयी है। इस कृत्य में आसवनी मालिकों, बोतल सप्लाईकर्ता एजेंसी, डुप्लीकेट होलोग्राम प्रदायकर्ता एजेंसी, बी-पार्ट की शराब बिक्री के पैसे कलेक्ट करने वाली एजेंसी, आबकारी विभाग के अधिकारी, अरूणपति त्रिपाठी के संलिप्त रहे हैं। ईडी द्वारा इसे बी-पार्ट के कमीशन के रूप में आरोपित किया गया है। इस प्रकार के विक्रय वर्ष 2019-2020, 2020-21, 2021-2022 में किया गया। इस अवैध मदिरा की बिक्री से प्राप्त अवैध वसूली राशि का कार्य विकास अग्रवाल के माध्यम से किया जाता था, जो अनवर ढेबर एवं अरूणपति त्रिपाठी को इसकी जानकारी देता था। सूत्रों के अनुसार प्रतिमाह लगभग 200 ट्रक, जिसमें प्रति ट्रक लगभग 800 मदिरा के केस होते थे जो कि शराब निर्माताओं द्वारा सिंडीकेट को प्रदान किये जाते थे। सूत्रों के अनुसार 2019-2020 में अवैध मदिरा 560 रू. प्रति प्रकरण के हिसाब से शराब निर्माताओं से प्राप्त की जाती थी, जिसे 2880 रू. एमआरपी पर बेचा जाता था, जो बाद में 3880 रूपये तक बेचा गया। इस सम्पूर्ण कार्य के लिए शराब निर्माताओं को 560-600 रूपये प्रति केस तथा आबकारी अधिकारियों को लगभग 150 रू. प्रति केस दिया जाता था। शेष सम्पूर्ण राशि अनवर ढेबर द्वारा विकास अग्रवाल उर्फ सूब्बू के माध्यम से ली जाती थी। सूत्रों के अनुसार इसी राशि का लगभग 15 प्रतिशत शेयर अनिल टुटेजा एवं अनवर ढेबर स्वयं रख लेते थे तथा शेष हिस्सा राजनेताओं को बाँट देते थे। राशि लेने-देने का कार्य भी अनवर ढेबर एवं उसके अधीनस्थ लोगों द्वारा किया जाता था।
●ननकीराम ने लिखा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र
पूर्वमंत्री ननकीराम ने प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर आशीष श्रीवास्तव, तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त रायपुर एवं सिद्धार्थ सिंघानिया को एजेंसियों द्वारा बचाने एवं क्लीनचिट देने पर कार्यवाही करने की मांग की गई है। उन्होंने लिखा है कि निर्देश के बाद भी ईओडब्ल्यू/एसीबी एवं ईडी द्वारा कार्यवाही नहीं की जा रही है। और अपराधियों को बचाया जा रहा है।